Opinion: चिरायु योजना का दायरा बढ़ाकर लाखों परिवारों के लिए सहारा बनी हरियाणा सरकार
हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने इसी महीने आम जनता के कल्याण को ध्यान में रखते हुए एक और प्रभावी कदम उठाया है। राज्य सरकार ने विस्तृत आयुष्माण भारत चिरायु हरियाणा योजना लॉन्च की है, जिसका लाभ प्रदेश के 8 लाख अतिरिक्त परिवारों को मिलने जा रहा है।
हरियाणा सरकार प्रदेश के जरूरतमंद तबकों के कल्याण के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही। इस सोच के साथ आयुष्माण भारत चिरायु हरियाणा योजना का लाभ उन परिवारों को देना तय किया गया है, जिनकी सालाना आय 3 लाख रुपए से अधिक नहीं है।

लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य
सीएम खट्टर की सरकार ने गरीबों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पहले ही इसके लिए सालाना आय की सीमा 1.80 लाख रुपए से बढ़ाकर 3 लाख रुपए कर दी थी। हरियाणा सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज में मुख्यमंत्री खट्टर के हवाले से कहा गया, '1.80 लाख रुपए से 3 लाख रुपये की सालाना आय वाले परिवारों को इसका कवरेज देकर और उन्हें 5 लाख रुपये तक के इलाज के दायरे में लाकर, सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि ज्यादा से ज्यादा लोग चिकित्सा के भारी खर्चों का सामना किए बगैर बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।'

965 अस्पतालों में मिलेगा मुफ्त इलाज
खट्टर सरकार की इस नई पहल से आयुष्माण भारत चिरायु हरियाणा योजना के दायरे में प्रदेश के लगभग 38 लाख परिवारों के आने का अनुमान है। हरियाणा के लोग इस योजना का लाभ 965 अस्पतालों में उठा सकते हैं।

बेहतर इलाज में अब आर्थिक तंगी रुकावट नहीं
हरियाणा सरकार ने इस तरह से अंत्योदय परिवारों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बहुत बड़ा कदम उठाया है। यह योजना पूरी तरह से जनसेवा की भावना के प्रति समर्पित है। मतलब साफ है कि आर्थिक तंगी की वजह से राज्य का कोई भी निवासी महंगे इलाज से भी वंचित नहीं रह सकता है।

आधी आबादी को 1500 बीमारियों का मुफ्त इलाज
चिरायु योजना का लाभ हरियाणा के सवा करोड़ लोगों को मिलेगा, जिसका अर्थ हुआ कि प्रदेश की आधी आबादी इसके दायरे में आ चुकी है। इसके लाभार्थियों में दिव्यांगजन भी शामिल हैं। 1500 बीमारियां इसमें कवर की गई हैं।

इस योजना के लाभार्थियों को गोल्डन हेल्थ कार्ड जारी किए जाने हैं। इसके माध्यम से वे अपनी बीमारी का मुफ्त इलाज करवा सकेंगे। इसके दायरे में आने वाले सभी परिवारों को एसईसीसी डेटाबेस में लिस्ट किया जाना है। लाभार्थी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्राप्त कर सकते हैं।
इलाज का सारा खर्च सरकार उठाएगी, लिहाजा लाभार्थी मानसिक और आर्थिक बोझ से पूरी तरह से मुक्त रह सकेंगे।












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