हरियाणा: अस्पताल मांगता रहा आधार कार्ड, इलाज के बिना मर गई कारगिल शहीद की विधवा
नई दिल्ली। हरियाणा में एक और निजी अस्पताल की संवेदहीनता की घटना सामने आई है। मामला सोनीपत का है जहां एक निजी अस्पताल पर आरोप है कि उसने एक कारगिल शहीद की विधवा को सिर्फ इसलिए अस्पताल में भर्ती नहीं किया क्योंकि उसके पास आधार कार्ड की ओरिजनल कॉपी नहीं थी। मौके पर पहुंची हरियाणा पुलिस ने भी अस्पताल का ही साथ दिया जिसकी वजह से अंत में कारगिल शहीद की विधवा की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

1999 में शहीद हुए थे लक्ष्मण दास
मिली जानकारी के मुताबिक सोनीपत जिले के महलाना गांव में रहने वाले लक्ष्मण दास की 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान देश के शहीद हुए थे। उनकी पत्नी शकुंतला काफी समय से बीमार चल रही थीं। बेटे पवन ने उनका कई जगह इलाज कराया लेकिन उन्हें आराम नहीं मिला। गुरुवार शाम में शकुंतला की तबीयत अचानक से फिर खराब हो गई जिसके बाद उन्हें परिजन सेना कार्यालय स्थित अस्पताल ले गए जहां से उन्हें निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।

मांगते रहे आधार की ओरिजिनल कॉपी
परिजनों ने बताया कि निजी अस्पताल ने आधार कार्ड की ओरिजिनल कॉपी मौजूद नहीं होने की वजह से भर्ती करने को मना कर दिया। बेटे पवन ने बताया कि हमने अस्पताल को मोबाइल में आधार-कार्ड दिखाया, उसकी फोटोकॉपी देने को कही लेकिन उन्होंने इलाज करने से मना कर दिया। हमने जब हंगामा किया तो अस्पताल ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने भी उल्टे हमें ही वहां से भगा दिया। हम जब अस्पताल से दूसरे अस्पताल जा रहे उसी बात रास्ते में शकुंतला देवी की मौत हो गई।

अस्पताल ने दी ये सफाई
मामला मीडिया के सामने आने के बाद अब अस्पताल प्रशासन लीपापोती में जुट गया है। अस्पताल का कहना है कि गंभीर मरीजों को भर्ती से पहले कई जरूरी कागजी कार्रवाई करनी होती है। हम मरीज के इलाज के लिए तैयार थे लेकिन परिजनों ने इमरजेंसी वार्ड से मरीज को बाहर निकालते हुए कहा कि हमें इलाज नहीं कराना है।












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