'500 फीट नीचे गए तो नहीं बच सकते', Jaguar Crash में शहीद लोकेंद्र के भाई ने बताई चूक की जड़, 9 नंबर बना अनलकी
Jaguar Fighter Jet Crash: राजस्थान के चूरू जिले में रतनगढ़ तहसील के भानुदा गांव के पास भारतीय वायुसेना (IAF) का जगुआर फाइटर जेट क्रैश होने से दो वीर पायलट-स्क्वाड्रन लीडर लोकेन्द्र सिंह सिंधु (32) और फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऋषिराज सिंह देवड़ा (23)-शहीद हो गए। यह हादसा 9 जुलाई 2025 को दोपहर करीब 1:30 बजे नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान हुआ।
इस घटना ने एक बार फिर वायुसेना के पुराने जगुआर जेट्स की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। शहीद लोकेन्द्र ने आबादी वाले इलाके से जेट को दूर ले जाकर कई जिंदगियां बचाईं, लेकिन खुद इजेक्ट न कर पाने के कारण शहादत दे दी। आइए जानते हैं हादसे की वजह, लोकेन्द्र के परिवार और उनकी आखिरी बातचीत के बारे में...

हादसे में शहीद हुए दो वीर सपूत
हरियाणा के रोहतक जिले के खेरी साध गांव निवासी स्क्वाड्रन लीडर लोकेन्द्र सिंह सिंधु और राजस्थान के पाली जिले के खिवांडी, सुमेरपुर के फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऋषिराज सिंह देवड़ा इस हादसे में शहीद हुए। लोकेन्द्र 30 जून को ही ड्यूटी जॉइन किए थे और प्रशिक्षण उड़ान के दौरान ट्रेनी पायलट ऋषिराज को प्रशिक्षण दे रहे थे। हादसे की खबर जैसे ही परिवारों तक पहुंची, माहौल गमगीन हो गया। लोकेन्द्र का अंतिम संस्कार आज शाम राजकीय सम्मान के साथ होगा।
परिवार को गर्व, लेकिन पुराने जेट्स पर सवाल
लोकेन्द्र के भाई ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि हादसे की सूचना टीवी के जरिए मिली। उन्होंने नासिक में तैनात वायुसेना के विंग कमांडर जीजा से संपर्क किया। ज्ञानेंद्र के मुताबिक, जगुआर जेट पुराना होने के कारण इसकी एक बड़ी खामी है कि 500 फीट से नीचे आने पर पायलट इजेक्ट नहीं कर सकता।
हादसे के दौरान लोकेन्द्र ने जेट को आबादी से दूर ले जाने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण जेट की ऊंचाई कम हो गई और वे इजेक्ट नहीं कर सके। ज्ञानेंद्र ने पुराने जेट्स को बदलने की जरूरत पर जोर दिया।

लोकेन्द्र ने बचाई कई जिंदगियां, दो मकसद को प्रीऑरिटी दी
ज्ञानेंद्र ने बताया कि लोकेन्द्र ने हमेशा दो मकसदों को प्रीऑरिटी दी: जेट को सिविलियन इलाके से दूर ले जाना, जेट को सुरक्षित रखना और आखिर में अपनी जान की चिंता करना। इस हादसे में लोकेन्द्र ने गांव वालों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की और जेट को आबादी से दूर ले गए। लेकिन कम ऊंचाई के कारण वे और ऋषिराज इजेक्ट नहीं कर पाए, जिससे जेट क्रैश हो गया।

आखिरी बातचीत: भतीजी के जन्मदिन पर हंसी-खुशी
ज्ञानेंद्र ने बताया कि लोकेन्द्र से आखिरी बार 9 जुलाई को सुबह 10:30 बजे बात हुई थी। एक रात पहले वीडियो कॉल पर हंसी-खुशी बात हुई, क्योंकि परिवार में भतीजी का जन्मदिन था। लोकेन्द्र रात को फ्लाइंग के बाद भी उत्साह से भरे थे।
लकी 9 नंबर, बन गया अनलकी
लोकेन्द्र का जन्म 9 नवंबर 1992 को हुआ था और हादसा 9 जुलाई 2025 को हुआ। संयोग से 9 नंबर उनके लिए अनलकी साबित हुआ। चार महीने बाद उनका 33वां जन्मदिन था।
कौन थे लोकेन्द्र सिंह सिंधु?
- जन्म: 9 नवंबर 1992, रोहतक, हरियाणा
- परिवार: पत्नी, एक महीने का बेटा, माता-पिता और भाई ज्ञानेंद्र
- शिक्षा और करियर: बचपन से पढ़ाई में होशियार, NDA में तीन साल की ट्रेनिंग, बेंगलुरु और हैदराबाद में एक-एक साल की ट्रेनिंग। 2015 में कमीशंड, 10 साल की सेवा।
- स्वभाव: मिलनसार, बदला लेने की आदत नहीं, परिवार और दोस्तों में लोकप्रिय।
- दादा की बात: बलवान सिंह ने बताया कि लोकेन्द्र बचपन से ही नेकदिल और होशियार था।
ऋषिराज के भाई का दर्द: 5-6 महीने पहले मिले थे
पाली के खिवांडी निवासी फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऋषिराज सिंह देवड़ा (23) के छोटे भाई हर्षराज सिंह ने कहा, "भाई ने देश के लिए जान कुर्बान की, मुझे उन पर गर्व है। मैं उनसे आखिरी बार 5-6 महीने पहले मिला था।"
जगुआर जेट्स पर क्यों उठ रहे सवाल?
यह हादसा पुराने जगुआर जेट्स की तकनीकी खामियों को फिर से उजागर करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, 500 फीट से कम ऊंचाई पर इजेक्ट न कर पाने की सीमा और पुरानी तकनीक इन जेट्स को जोखिम भरा बनाती है। वायुसेना के बेड़े में आधुनिकीकरण की मांग अब और तेज हो गई है।
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