हरियाणा: कोरोना से मौतें सरकारी आंकड़ों में कम, असलियल तो श्मशान घाट बयां कर रहे हैं
चंडीगढ़। भाजपा शासित प्रदेश गुजरात की तरह ही हरियाणा में भी कोरोना से हो रही मौतों की संख्या सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खा रही। श्मशान घाटों पर यहां जिन लोगों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया रहा है... वह संख्या सरकारी आंकड़ों की तुलना में काफी ज्यादा है। यानी रोज जितनी मौतों की जानकारी कोविड बुलेटिन द्वारा दी जाती है, वो संख्या संख्या असल में श्मशान घाटों पर रोज फूंके जा रहे शवों की तुलना में काफी कम है। जमीनी हकीकत और सरकार के आंकड़े बेमेल हैं। ऐसा अमूमन हर जिले में हो रहा है।
उदाहरण के लिए, पंचकूला में पिछले पांच दिनों में कोरोना से 20 मरीजों की ही मौत होने की जानकारी दी गई, लेकिन श्मशान घाट से मिली रिपोर्ट बताती है कि कोविड प्रोटोकॉल के साथ 50 से अधिक शव जलाए गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने काउंटिंग में मौतों की संख्या में अंतर की बात तो मानी, लेकिन कहा कि ऐसा "तकनीकी आधार" के कारण हो सकता है।

पंचकूला नगर पालिका द्वारा पंचकूला के बाहरी इलाके में एक और श्मशान घाट चाहिए था, क्योंकि यहां मौजूद सभी 28 शवदाह स्थलों पर लाशें काफी ज्यादा हो गई थीं और अन्य लाशों को जलाने की जगह नहीं रह गई थी। श्मशान घाट के परिचालक ने कहा, "बुधवार को भी, हमें श्मशान को बंद करना पड़ा और 7 लाशें वेटिंग में थी... जिनका अंतिम संस्कार होना बाकी था।"
रोहतक में भी कुछ ऐसा ही हुआ। जहां दो श्मशान घाट कोरोना से मरने वालों के अंतिम संस्कार के लिए ही हैं और पिछले कई दिनों से क्षमता से अधिक सक्रिय हैं। चार दिनों में 26 से 29 अप्रैल तक, वहां कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार 151 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि, दूसरी ओर जिला प्रशासन द्वारा द्वारा कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा बहुत कम बताया गया।
सूत्रों ने कहा कि, 26 मई को कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार 34 शवों का अंतिम संस्कार किया गया था, उसके बाद 27 मई को 51 का, 28 मई को 42 और फिर 29 मई को भी 42 और लोगों का अंतिम संस्कार किया गया।

कोरोना से मरने वालों की लाशों के दाह संस्कार के लिए जलाऊ लकड़ी की कमी पड़ने पर रोहतक के डिप्टी कमिश्नर कैप्टन मनोज कुमार ने नगर निगम को आदेश दिया कि वे पर्याप्त लकड़ी की खरीद करें और कोविड प्रोटोकॉल के साथ श्मशान को सक्रिय रखें।
बता दें कि, रोहतक में कोरोना से मर रहे लोगों की अंत्येष्टि के लिए दो श्मशान हैं- एक जींद बाईपास पर और दूसरा वैश्य कॉलेज के पास।
हिसार में भी, स्वास्थ्य विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त कोविड प्रोटोकॉल और कोरोना से मरने वालों के दाह संस्कार में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। बुधवार को, हिसार प्रशासन ने कहा कि, 10 कोरोना रोगियों की मृत्यु हो गई थी, लेकिन स्थानीय ऋषि नगर श्मशान में कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार 17 शवों का अंतिम संस्कार किया गया था। हिसार के सेक्टर 16-17 में स्थित श्मशान भूमि में कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार एक संदिग्ध कोविड रोगी के शरीर का भी अंतिम संस्कार किया गया।

हिसार जिला प्रशासन के कोविड-बुलेटिन ने शुक्रवार को 13 लोगों की मौत की पुष्टि की, जबकि गुरुवार रात 10.30 बजे तक 29 शवों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत ही अंतिम संस्कार किया गया था। करनाल नगर निगम की टीम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोविड प्रोटोकॉल के तहत गुरुवार को हुए 29 शवों के अंतिम संस्कार में से 21 हिसार के थे, 6 दिल्ली के, और 1-5 बहादुरगढ़ तथा सिरसा से थे।
करनाल नगर निगम की टीम ने बताया कि छह लोग जो दिल्ली के थे, दो का इलाज हिसार के चूरमनी अस्पताल में, दो का जिंदल अस्पताल में और दो का हिसार के अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा था।
इसी प्रकार, हरियाणा के करनाल में, कोरोना से मरने वाले 15-20 लोगों की लाशों का अंतिम संस्कार रोजाना बलरी बाईपास स्थित श्मशान घाट में किया जाता है। करनाल नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले 14 दिनों में 108 रोगियों का अंतिम संस्कार किया गया था।
हाल के मामलों में वृद्धि को देखते हुए, जिला प्रशासन ने कंबोपुरा के पास और झांझरी घांघरी गाँव में दो और श्मशान घाट स्थापित किए हैं।
करनाल नगर निगम के संयुक्त आयुक्त गगनदीप ने कहा कि, उनके पास एक दिन में लगभग 140 शवों का अंतिम संस्कार करने की क्षमता है।
सरकार ने मौत के आंकड़ो पर दी यह सफाई
वहीं, कोरोना से खत्म हो रहीं जिंदगियों पर हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) राजीव अरोड़ा का कहना है कि, सरकारी आंकड़ों में हर लाश का हिसाब है। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रत्येक मौत की पड़ताल होती है। अरोड़ा ने कहा कि आंकड़ों को रेखांकित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
उन्होंने कहा, "पहले, झज्जर, रोहतक, गुड़गांव, पानीपत, रेवाड़ी और हिसार जैसे जिलों के कई अस्पताल उन रोगियों का भी उपचार कर रहे हैं, जिनका हरियाणा में इलाज नहीं होता। एक जिले से दूसरे जिले में लाशों को ले जाने का कोई नियम नहीं है, इसलिए जिले में ऐसे दाह संस्कार किए जाते हैं..जहां मरीज की मौत हुई हो। जिन लोगों की जान चली जाती है... हरियाणा सरकार की संस्थाओं द्वारा उनकी मृत्यु की गणना शायद न हो पाती हो, लेकिन हम दाह संस्कार करते हैं।"
कहा- आप नाम-पता दें, हम ब्यौरा देंगे
राजीव अरोड़ा बोले, "एक दूसरा पहलू यह है कि स्वास्थ्य विभाग विभिन्न स्रोतों से डेटा की पुष्टि करता है, इसलिए वास्तविक डेटा अपलोड करने में समय लगता है। राज्य में हर एक कैजुएलटी को ध्यान में रखा जाता है। लेकिन बाहर के लोगों की मौत की गिनती उनके गृह राज्यों में ही होती है। यदि आपने हमें किसी ऐसे व्यक्ति की जानकारी दी है जिसे छोड़ दिया गया है, तो हम आपको लिखकर विवरण देंगे।"












Click it and Unblock the Notifications