Haryana News: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने राजीब गोयल पुरस्कार की घोषणा की, जानिए किसे मिलेगा पुरस्कार

Haryana News: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की गोयल अवार्ड कमेटी ने राजीब गोयल पुरस्कार की घोषणा की है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति और गोयल अवार्ड आयोजन समिति के चैयरमेन प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने इन पुरस्कारों की सोमवार को घोषणा करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हर वर्ष देश के श्रेष्ठ वैज्ञानिकों को सम्मानित कर विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में योगदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि इन वैज्ञानिकों ने विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए उत्कृष्ट योगदान दिया है। प्रत्येक राजीब गोयल पुरस्कार के लिए एक पदक, प्रशस्ति पत्र और 1 लाख रुपए नकद दिया जाएगा। गोयल पुरस्कारों के लिए चुने गए चार वरिष्ठ वैज्ञानिकों के नामों की घोषणा विश्वविद्यालय ने पिछले सप्ताह ही कर दी थी।

kurukshetra university

देश के चार वैज्ञानिकों, जिनकी उम्र 45 वर्ष से कम है। उनको कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा युवा वैज्ञानिकों के लिए राजीब गोयल पुरस्कार के लिए चुना गया है। जिन वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार मिलेगा। उनमें डॉ. सप्तर्षि बसु, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, बेंगलुरु, डॉ. सेबेस्टियन सी. पीटर, जेएनसीएएसआर बेंगलुरु, डॉ. बुशरा अतीक, जैविक विज्ञान और बायोइंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी कानपुर और डॉ. संजीव कुमार अग्रवाल, भौतिकी संस्थान, भुवनेश्वर शामिल हैं।

इन युवा वैज्ञानिकों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए डोनर के नामित और आयोजन समिति के सह-अध्यक्ष प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि डॉ. सप्तर्षि बसु ने द्रव गतिकी के क्षेत्र में अपार संभावनाओं के साथ बहुत बड़ा योगदान दिया है। डॉ. सेबेस्टियन पीटर ने कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़ने और इसे कई मूल्य वर्धित रसायनों में परिवर्तित करने के लिए उत्प्रेरक तैयार किए हैं। जीव विज्ञान के लिए युवा पुरस्कार विजेता डॉ. बुशरा अतीक ने कैंसर जीव विज्ञान में अत्याधुनिक शोध किया है। जिसने प्रोस्टेट कैंसर आणविक उपप्रकार की नींव रखी। प्रोफेसर एसपी सिंह ने कहा कि भौतिक विज्ञान में युवा वैज्ञानिक के लिए पुरस्कार विजेता डॉ. एसके अग्रवाल ने मुख्य रूप से न्यूट्रिनो भौतिकी और डिटेक्टर सिमुलेशन अध्ययन में अभिनव योगदान दिया है।

गोयल पुरस्कार आयोजन समिति के संयोजक प्रो. संजीव अरोड़ा ने कहा कि गोयल पुरस्कारों की स्थापना स्व. राम एस गोयल, 1990 में अमेरिका में बसे एनआरआई द्वारा की गई थी। प्रो. संजीव अरोड़ा ने बताया कि पुरस्कार समारोह जल्द ही केयू में आयोजित किया जाएगा। जब सभी 8 वैज्ञानिक व्यक्तिगत रूप से पुरस्कार प्राप्त करेंगे।

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