Haryana Political Crisis: कांग्रेस से सेट कर रहे थे दुष्यंत चौटाला, पार्टी में ही आ गई टूट की नौबत!
Haryana News: हरियाणा में भाजपा सरकार से अलग हुए जननायक जनता पार्टी (जेजेपू) के नेता दुष्यंत चौटाला नायब सैनी सरकार से फ्लोर टेस्ट की मांग कर रहे हैं। लेकिन, अब उनके सामने अपने ही विधायकों को अपने पाले में बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से जानकारी दी गई है कि दुष्यंत चौटाला की पार्टी के कुछ विधायकों ने गुरुवार को पानीपत में एक मंत्री की मौजूदगी में पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की है।

जेजेपी के 4 एमएलए ने की खट्टर से मुलाकात- रिपोर्ट
बता दें कि मार्च में नायब सिंह सैनी सरकार के विश्वास मत के दौरान भी उस प्रक्रिया से दूर रहने के लिए व्हिप जारी होने के बावजूद भी जेजेपी के 10 विधायकों में से 4 विधानसभा में पहुंच गए थे। हालांकि, उनके मतदान में हिस्सा लेने की जरूरत नहीं पड़ी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक खट्टर और जेजेपी के 4 विधायकों की यह मुलाकात पानीपत में राज्यमंत्री महिपाल ढांडा के घर पर हुई है। यह मुलाकात दोपहर 2 बजे के बाद करीब आधे घंटे तक चलने की बातें सामने आ रही हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में हरियाणा में जारी मौजूदा राजनीतिक संकट पर ही चर्चा की गई है।
तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापसी आया बीजेपी सरकार पर संकट
हालांकि, ढांडा ने इस बैठक के बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया। हरियाणा की नई-नवेली नायब सिंह सैनी सरकार पर उसे समर्थन दे रहे तीन निर्दलीय विधायकों रणधीर गोलन (पुंडरी),धर्मपाल गोंदर (नीलोखेड़ी) और सोमवीर सांगवान (चरखी दादरी) की समर्थन वापसी की वजह से संकट पैदा हुई है।
कांग्रेस को बाहर से समर्थन का ऐलान कर चुके हैं चौटाला
इस समर्थन के बाद दुष्यंत चौटाला ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में एक प्रेस कांफ्रेंस किया और मौजूदा बीजेपी सरकार के अल्पमत में होने का दावा करते हुए ऐलान किया कि अगर कांग्रेस सरकार बनाने की पहल करती है तो वह उसे बाहर से समर्थन देंगे।
गवर्नर को लिख चुके हैं फ्लोर टेस्ट करवाने के लिए चिट्ठी
जेजेपी के विधायकों के पूर्व सीएम खट्टर से मुलाकात की खबरों से पहले उन्होंने गवर्नर को एक खत भी लिखा है, जिसमें विधानसभा में नायब सैनी सरकार से बहुमत परीक्षण कराने की मांग की गई है। लेकिन, इसमें एक तकनीकी अड़चन है, जो उनकी मांग के खिलाफ है।
किसी सरकार के खिलाफ 6 महीने में एक बार ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। जबकि, मुख्य विपक्षी कांग्रेस फरवरी में ही यह प्रस्ताव ला चुकी है और बीजेपी सरकार ने इसी मार्च में सदन में अपना बहुमत साबित किया है। इसलिए, जानकारों की राय में विपक्ष के पास विकल्प का अभाव है।
हरियाणा विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल इसी साल नवंबर महीने तक है और उससे पहले ही वहां चुनाव करवाए जाने हैं। बीजेपी सरकार तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापसी वाले दिन से ही दावा कर रही है कि उसके पास 90 सदस्यीय सदन में 47 एमएलए का समर्थन है। जबकि, दो सीटें अभी खाली हैं।












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