Haryana Chunav: कुमारी सैलजा नाराज नहीं हैं! फिर अधूरे मन से क्यों कर रही हैं कांग्रेस का प्रचार?

Haryana Chunav 2024: हरियाणा में कांग्रेस की सबसे बड़ी दलित नेता कुमारी सैलजा शुरू में प्रचार अभियान से लंबे समय तक गायब रहीं। फिर राहुल गांधी की मौजदगी में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ एक मंच पर तो दिखीं, लेकिन उसके बाद भी वह जिस तरह की बातें कर रही हैं, उससे लगता है कि हुड्डा के खिलाफ उनके दिल की खटास खत्म नहीं हुई है।

सिरसा से कांग्रेस सांसद ने ईटी को दिए एक इंटरव्यू में जो कुछ कहा है, उससे जाहिर है कि उनके मन में अभी भी काफी कुछ है और लगता है कि वह पार्टी आला कमान के दबाव में सिर्फ चुनाव अभियान में अपनी सक्रियता दिखाने मात्र के लिए आगे आई हैं।

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सैलजा उम्मीदवारों के नाम पर अभी भी उठा रहा हैं सवाल
उन्होंने लोकसभा चुनावों में भी उन्होंने पार्टी को सिर्फ 5 सीटें मिलने के लिए प्रत्याशियों के चयन पर दोष मढ़ा था और विधानसभा चुनाव के लिए भी वह यह कह रही हैं, 'यह और बेहतर हो सकता था।' वह नाम तो किसी का नहीं ले रही हैं, लेकिन उनका इशारा भूपेंद्र हुड्डा ही हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उम्मीदवारों का नाम तय करने में उनकी एकतरफा चली है और इसी से सैलजा नाराज भी बताई जा रही थीं।

सैलजा यह तो कह रही है कि हरियाणा का मूड कांग्रेस के पक्ष में है। लेकिन, उन्होंने यह सब सिरसा में कहा है, जो उनका अपना लोकसभा क्षेत्र भी है। जब उनसे यह पूछा जाता है कि क्या वह उम्मीदवारों के चयन और इसमें दलितों और ओबीसी को दिए गए प्रतिनिधित्व से खुश हैं?

इसके जवाब में दलित नेता कहती हैं, 'टिकट का चयन और बेहतर हो सकता था। पार्टी ने बैलेंस बिठाने की कोशिश की, लेकिन कुछ छूट गए.....जब हमारी सरकार बनेग, सभी समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए लोगों को समायोजित करना होगा...'

अधूरे मन से क्यों कर रही हैं कांग्रेस का प्रचार?
इसके बाद उनसे उनके लिए सबसे चुभता हुआ सवाल पूछ लिया गया कि ज्यादातर टिकट एक ही नेता के कहने पर दिया गया, तब उन्होंने कहा, 'वहां बहुत सारी चीजें हैं। पार्टी उन पर ध्यान दे रही है.......'। उन्होंने माना कि हरियाणा में सभी जातियों के प्रतिनिधित्व के सामूहिक नेतृत्व को लेकर मुद्दा है और 'फैसला लेते वक्त इन चीजों का ध्यान रखना होगा।'

सैलजा जिस दिन राहुल गांधी के साथ असंध की रैली में दिखी थीं, उन्हीं दिनों गुरुवार और शुक्रवार को उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के लिए प्रचार भी किया था, लेकिन उनके आगे के अभियान के लिए कोई कार्यक्रम तय नहीं है।

चुनाव अभियान से गायब रहने पर भी दिया तंज वाला जवाब!
उनके चुनाव अभियान से गायब रहने की वजह से हरियाणा में कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ने वाले असर को लेकर पूछे जाने पर वह हल्के में यह कह देती हैं कि इतनी बड़ी व्यक्ति नहीं हैं, कांग्रेस की एक सामान्य कार्यकर्ता हैं। यह उनका बड़प्पन है या फिर प्रदेश में पार्टी की स्थिति पर तंज यह तो वही समझती हैं। लेकिन, वह इस बात को दोहरा रही हैं कि वह पार्टी के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं।

सैलजा जिस दलित समाज से आती हैं, हरियाणा में जाटों के बाद उसकी सबसे ज्यादा यानी करीब 21% आबादी है। माना जाता है कि लोकसभा चुनावों में हरियाणा में दलितों ने बीजेपी की ओर से आरक्षण खत्म किए जाने के कांग्रेस के दावों की वजह से खुलकर इसका साथ दिया था।

सैलजा की मायूसी से कांग्रेस को दलित वोटों का हो सकता है नुकसान
लेकिन, अब वह हालात बदल चुके हैं और दलित मतदाताओं के बीच कांग्रेस में सैलजा की उपेक्षा का भी एक संदेश गया है। ऊपर से बीएसपी और आजाद समाज पार्टी जैसे दलित आधारित दलों का जाट आधारित क्षेत्रीय पार्टियों (क्रमश: इनेलो और जेजेपी) से गठबंधन की वजह से समीकरण और भी बदल चुका है, जिससे आखिरकार कांग्रेस की ही चुनौती बढ़ने की संभावना है।

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