BJP-JJP गठबंधन में आई दरार की ये है असली वजह, निशाने पर हरियाणा नहीं दिल्ली की कुर्सी है

हरियाणा में बीजेपी और जननायक जनता पार्टी के बीच दरार की खबरें लगातार मीडिया में सामने आ रही है। अब इस मामले में दुष्यंंत चौटाला ने कहा है कि, गठबंधन में टूट रहा है।

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हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी गठबंधन के बीच चल रही तकरार हर दिन नया मोड़ ले रही है। गठबंधन टूटने की खबरों के बीच शनिवार को डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा कि, बीजेपी और जजपा गठबंधन मजबूत है और इसमें कोई दरार नहीं है।

दोनों पार्टियों के बीच तकरार की वजह हरियाणा बीजेपी के प्रभारी और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लव देब के बयानों को माना जा रहा है। जिसके चलते दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच पिछले दिनों बयानबाजी देखने को मिली थी।

बयानों ने पैदा की गठबंधन में दरार?

बीजेपी के हरियाणा प्रभारी बिप्लब देब ने जींद जिले के कार्यक्रम में कहा था कि उचाना सीट से भाजपा की प्रेमलता अगली विधायक होंगी। बता दें कि मौजूदा समय में यहां से डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला जजपा से विधायक हैं।

बिप्लब देब का यह बयान दुष्यंत चौटाला को नागवार गुजरा। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि, किसी के पेट में दर्द है, दर्द की दवाई तो मैं दे नहीं सकता। न तो मेरे पेट में दर्द है और न ही मैं डॉक्टर हूं। मेरा काम अपनी पार्टी को मजबूत करना है। मैं उचाना से ही चुनाव लड़ूंगा।

जिस पर फिर बिप्लब देब ने कहा कि, जजपा ने हमें समर्थन देकर कोई अहसान नहीं किया, बदले में उन्हें मंत्री पद दिए हैं। अभी गठबंधन सरकार चल रही है लेकिन निर्दलीय विधायक भी हमारे संपर्क में हैं। देब इस बयान के बाद निर्दलीय विधायकों के साथ बैठक भी करते दिखे।

हालांकि शनिवार को दुष्यंत चौटाल का इस पूरे घटनाक्रम पर बयान सामने आया है। चौटाला ने कहा कि, हरियाणा में स्थिर सरकार चलाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में दोनों दलों के बीच गठबंधन किया गया था। गठबंधन करने के पीछे हमारी कोई मजबूरी या निजी स्वार्थ नहीं था। दोनों पार्टियां गठबंधन में अगला विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।

दुष्यंत चौटाला ने अंत कहा कि, अगर किसी ने अपना मन बदल लिया है तो हम कुछ नहीं कर सकते। अगर दोनों पक्षों के बीच कोई कड़वाहट उभरती है, तो हम खुशी-खुशी अलग हो जाएंगे। हालांकि माना ये भी जा रहा कि बिप्लब देब की ओर दिए जा रहे ये बयान लोकसभा सीटों का मोलभाव करने के लिए हैं। पार्टी जेजेपी को कम से कम सीटों पर सीमित करने की कोशिश में लगी हुई है।

लोकसभा सीटों पर भी फंसा पेंच

इसके इतर राजनीति के गलियारों से ऐसी खबरें आ रही है कि, दोनों पार्टियों के बीच आगामी लोकसभा चुनाव की लिए सीटों के बंटवारे पर पेंच फंसा हुआ है। जेजेपी इस चुनाव में तीन सीटें चाह रही है। 2019 में बीजेपी ने हरियाणा की सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी इस बार भी सभी 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारना चाहती है। लेकिन जेजेपी लोकसभा चुनाव में उतर कर अपना जनाधार और मजूबत करने की कोशिशों में जुटी हुई है।

बीजेपी क्यों सीटें नहीं देना चाहती है?

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि, जेजेपी एक क्षेत्रीय दल है। जो इनलो से टूट कर बना है। जबकि राज्य में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है। बीजेपी का मानना है कि, जेजेपी के पास इतना जनाधार नहीं है कि वह लोकसभा सीटें जीत पाए। ऐसे में बीजेपी अपना नुकसान नहीं करना चाह रही है।

गठबंधन टूटा तो किसे फायदा होगा?

हरियाणा की राजनीति के जानकारों का मानना है कि, अगर लोकसभा चुनाव से पहले जेजेपी और बीजेपी अलग होती है तो दोनों पार्टियों को ही फायदा होगा। इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि, जहां जेजेपी हरियाणा में जाटों की राजनीति करती है तो बीजेपी जाट विरोधी राजनीति करती हैं। अगर जेजेपी अलग होती है तो वह जाटों के सबसे बड़े हितैषी भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के वोट बैंक में सेंध लगाएगी।

जिसका बीजेपी को सीधा फायदा होगा। बीजेपी जाट विरोधी छवि का फायदा उठाकर बाकी जातियों को एक करके 2024 के चुनाव में 10 लोकसभा सीटें जीतकर 2019 का इतिहास दोहराना चाहेगी।

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