Haryana BJP Crisis: नायब सैनी सरकार बचेगी या गिरना तय? क्या कहते हैं हरियाणा विधानसभा के आंकड़े
Haryana BJP Crisis in Hindi: हरियाणा में लोकसभा चुनाव (haryana lok sabha election 2024) से पहले ही बीजेपी सरकार संकट में आ गई है। मुख्यमंत्री नायब सैनी सरकार को समर्थन दे रहे 3 निर्दलीय एमएलए ने मंगलवार को समर्थन वापस लेने की घोषणा की है। समर्थन लेने वाले विधायकों ने दावा किया है कि अब सैनी सरकार अल्पमत में है और उसे इस्तीफा दे देना चाहिए।
हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी को समर्थन दे रहे जिन तीन निर्दलीय विधायकों ने अब कांग्रेस का साथ देने का ऐलान किया है, वे हैं पुंडरी से एमएलए रणधीर गोलन, नीलोखेड़ी से विधायक धर्मपाल गोंदर और चरखी दादरी एमएलए सोमवीर सांगवान।

तीन निर्दलीय विधायकों ने नायब सैनी सरकार से समर्थन वापस लिया
कांग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मौजूदगी में रोहतक में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में गोंदर ने कहा, 'हम सरकार से समर्थन वापस ले रहे हैं। हम अपना समर्थन कांग्रेस को दे रहे हैं।'
इनका दावा है कि नायब सिंह की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार अब 'अल्पमत की सरकार' है और सैनी को इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि, 'उन्हें एक मिनट भी रहने का अधिकार नहीं है।' यही नहीं, इनकी मांग है कि 'अब, विधानसभा चुनाव भी तुरंत करवाए जाने चाहिए।'
मार्च में जेजेपी बीजेपी सरकार से अलग हो गई थी
अब सवाल है कि क्या तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापसी से सैनी सरकार वाकई अल्पमत में आ गई है? हरियाणा में पिछले पांच साल से बीजेपी और जननायक जनता पार्टी की गठबंधन सरकार थी। बीजेपी के 41 और उसके 10 विधायकों के साथ 90 सदस्यीय विधानसभा में सरकार के पास पूर्ण बहुमत था।
मार्च में जेएनजेपी से बीजेपी का गठबंधन टूट गया और वह सरकार से बाहर हो गई। अभी बीजेपी सरकार को 6 में से 5 निर्दलीय विधायकों के अलावा हरियणा लोकहित पार्टी के अकेले विधायक गोपाल कांडा का भी समर्थन प्राप्त था।
हरियाणा विधानसभा में दो सीटें हैं खाली
90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा में करनाल सीट पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के इस्तीफे की वजह से खाली है। एक निर्दलीय विधायक भी इस्तीफा दे चुके हैं। इस तरह से बीजेपी के पास अपने 40 एमएलए हैं। ऐसे में बाकी बचे 88 विधायकों के हिसाब से बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा भी 45 ही रहता है। अगर बीजेपी सरकार को समर्थन देने वाले 5 में से 3 विधायक हट गए हैं तो सरकार के पास 43 विधायकों का समर्थन बच जाता है। इससे साफ है कि सरकार संकट में है।
जेजेपी विश्वास मत की प्रक्रिया से दूर रही थी
लेकिन, तथ्य यह है कि मार्च में दुष्यंत चौटाला की जेजेपी के बीजेपी सरकार से हटने के बाद नायब सिंह सैनी ने राज्यपाल को 48 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा था। यही नहीं, नायब सिंह सैनी के विश्वास मत के दौरान भी जेजेपी ने अपने 10 विधायकों से सरकार के विरोध में वोट डालने को नहीं कहा था। उन्होंने फ्लोर टेस्ट के दौरान अपने विधायकों को व्हिप जारी करके इस प्रक्रिया से दूर रहने को कहा था।
सरकार पर कोई संकट नहीं-बीजेपी
इस तरह से वह सरकार से हटकर भी उसके लिए परेशानी का सबब नहीं बनी थी। यही वजह है कि बीजेपी का दावा है कि उसकी सरकार के पास अभी भी बहुमत है और उसपर कोई संकट नहीं है। हरियाणा के सीएम सैनी के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रे के मुताबिक तीन निर्दलीय विधायकों के कांग्रेस के साथ जाने से सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
हमें 47 विधायकों का समर्थन- सीएम के मीडिया सचिव
न्यूज एजेंसी एएनआई से उन्होंने कहा, 'आज भी हरियाणा सरकार के पास बहुमत है और यह सुरक्षित है। अगर आप आंकड़े देखेंगे तो सरकार को 47 विधायकों का समर्थन है और इसके चलते सरकार पूरी तरह से सुरक्षित है।'
बीजेपी दे रही है कानून की भी दलील
उन्होंने आगे कहा, 'अगर हम कानूनी नजरिए से बात करें तो हरियाणा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता, क्योंकि भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुवाई में पहले विधानसभा में हरियाणा सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे खारिज कर दिया गया था, इसलिए अगले 6 महीने तक एक और अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।'












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