11 साल बाद जन्मी बेटी को सिपाही पति की गोद में छोड़ कोरोना मरीजों की सेवा कर रही ये मां
झज्जर। हरियाणा में झज्जर के बहादुरगढ़ की रहने वाली एक नर्स कोरोना मरीजों के इलाज में इस कदर व्यस्त है कि, अपनी मासूम बच्ची को समय नहीं दे पाती। उसकी 2 साल की बच्ची को घर पर भी संभालने वाला कोई नहीं है। उसके पति हरियाणा पुलिस में हवलदार के पद पर कार्यरत हैं। जिनकी शेल्टर होम में 24 घंटे की ड्यूटी होती है, फिर भी वह ही बच्ची को अपने साथ रखते हैं।

पति-पत्नी दोनों फर्ज में तल्लीन, नहीं है मिलने की फुरसत
यानी दोनों पति-पत्नी अपने अपने फर्ज निभाते हैं और कम ही मिल पाते हैं। ये नर्स हैं सरोज। जो कि, दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। वह दिल्ली में रहकर ही कोरोना रोगियों की देखभाल करती हैं। सरोज बताती हैं कि, 'हमने 11 साल तक इस संतान के पैदा होने का इंतजार किया। तीन बार आइवीएफ तकनीक फेल होने का दर्द सहा, आज मैं उसी संतान को घर पर छोड़कर यहां कोरोना महामारी का मुकाबला कर रही हूं। पति भी व्यस्त ही रहते हैं, लेकिन बच्ची के लिए उनकी गोद खुली है।'

मां बच्ची से नहीं मिल पाती, पति वीडियो कॉलिंग कराते हैं
''मैं बच्ची के पास नहीं जा पाती, क्योंकि कोरोना मरीजों की देखभाल करती हूं।मेरे पति का नाम सुभाष चंद है। वह मूल रूप से रोहतक के कमला नगर निवासी हैं। थाना शहर में वह हवलदार के पद पर तैनात हैं। शहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए शेल्टर होम की निगरानी में उनकी ड्यूटी लगी है। वह ड्यूटी के दौरान भी बच्ची को साथ रखते हैं। शाम को बच्ची मुझसे मिलने की जिद करती है तो वीडियो कॉलिंग के जरिये बात करवा देते हैं।''

शादी के 11 साल बाद काफी कोशिशों से जन्मी थी संतान
बेटी के बारे में बताते हुए सरोज कहती हैं- 'हमारी शादी के 11 साल बाद 3 आइवीएफ असफल होने के बाद चौथे प्रयास में यह बच्ची जन्मी। मैंने पति से कहा कि आप बच्ची को संभालना, ताकि मैं कोरोना के मरीजों की देखभाल करा सकूं। तब पति ने बच्ची को अकेला नहीं छोड़ने की परेशानी अपने अधिकारियों को बताई, तो अधिकारियों ने पति को निलंबित करने व लाइन हाजिर करने की चेतावनी दे डाली। बाद में डीएसपी अजायब ने कहा कि, इस तरह के कोई आदेश जारी नहीं किए गए हैं।''












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