Haryana Election 2024: हरियाणा में भाजपा ने OBC पर खेला बड़ा दांव, पहली सूची में जाटों से भी ज्यादा दिए टिकट
Haryana election bjp list: हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने बुधवार शाम 67 सीटों पर कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट जारी कर दी। 40 सीटों पर उम्मीदवार बदल दिए हैं। बीजेपी ने तीन मंत्री सहित 9 विधायकों के टिकट काट दिए हैं। हालांकि इस बार बीजेपी ने कैंडिडेट के चयन में जातीय समीकरण को साधने की पूरी कोशिश की है।
भाजपा ने उम्मीदवारों की पहली सूची में सोशल इंजीनियरिंग का दांव खेला है। हरियाणा में जिन जातियों का मतदाता सूची में ज्यादा प्रतिनिधित्व है, उनको इस बार अधिक टिकटें दी गई हैं। इस सूची गुर्जर, यादव, कश्यप, कुम्हार, कंबोज, राजपूत और सैनी को जमकर टिकटें दी गई हैं। हरियाणा में सबसे बड़ी आबादी वाले ओबीसी समुदाय से 17 नेताओं को टिकट दिए हैं।

ओबीसी और दलित कैंडिडेट्स की भरमार-
बीजेपी ने 67 कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट में 8 पंजाबी, 9 ब्राह्मण, 5 बनिया, 12 जाट, 5 गुर्जर, 5 यादव, 2 बिश्नोई और दलित समुदाय के 13 नेताओं को उम्मीदवार बनाया है। जबकि इसके साथ ही राजपूत, सैनी, कुम्माहर, रोड, बाजीगर को भी पहली लिस्ट में जगह दी गई है। बीजेपी ने जिन 13 दलित नेताओं के टिकट दी है, उन सभी आरक्षित सीटों पर ही उतारा है।
बीजेपी ने नांगल चौधरी, कोसली, बादशाहपुर, जगाधरी, लाडवा, सोहाना, तिगांव , कैथल, इंद्री, समालखा, रानिया, अटेली और रेवाड़ी विधानसभा सीटों पर ओबीसी उम्मीदवारों को टिकटें दी हैं। बीजेपी ने राज्य में जाटों को भी साधने की पूरी कोशिश की है। पार्टी ने जाट बिरादरी से 13 प्रत्याशियों को टिकट दिया है।
ओबीसी चेहरे के साथ बीजेपी मैदान में-
बीजेपी इस बार हरियाणा में ओबीसी चेहरे के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है। लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने मनोहर लाल खट्टर की जगह मुख्यमंत्री की कुर्सी नायब सिंह सैनी को सौंपी थी। तभी से मान लिया गया था कि, विधानसबा चुनावों में बीजेपी ओबीसी वोटों को अधिक तबज्जो देने वाली है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को आगे करके बीजेपी तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है।
यादव-गुर्जर वोट पर बीजेपी की नजर
बीजेपी ने अपनी पहली सूची में गुर्जर और यादव समुदायों पर विशेष ध्यान दिया है। पार्टी ने पांच गुर्जर उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इनमें मनमोहन भड़ाना, कंवर पाल गुर्जर, लील राम गुर्जर, तेजपाल तंवर और राजेश नागर शामिल हैं। गुर्जर समुदाय के अलावा, बीजेपी ने यादव समुदाय से भी पांच नेताओं को टिकट दिया है। इन नेताओं में आरती राव, अभय सिंह यादव, अनिल ढहीना, लक्ष्मण सिंह यादव और राव नरबीर सिंह शामिल हैं।
बीजेपी की इस सूची से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी ने जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है। इससे पार्टी को विभिन्न क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है। गुर्जर और यादव दोनों ही समुदाय हरियाणा की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन समुदायों के नेताओं को टिकट देकर बीजेपी ने अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की है।
जाट को भी रिझाने की कोशिश
हरियाणा में जाट समुदाय की राजनीतिक ताकत को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने इस बार जाट समुदाय से 13 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। बता दें कि, राज्य में जाटों की आबादी लगभग 28 से 30 प्रतिशत है। बीजेपी ने 2019 के विधानसभा चुनाव में हारे ओम प्रकाश धनखड़ और कैप्टन अभिमन्यु जैसे जाट नेताओं को फिर से मौका दिया है। नारनौंद से कैप्टन अभिमन्यु को टिकट मिला है, जबकि बादली से ओमप्रकाश धनखड़ को प्रत्याशी बनाया गया है।
इसके अलावा, पार्टी ने कलायत विधानसभा सीट से कमलेश ढांडा, पानीपत ग्रामीण सीट से महिपाल ढांडा, टोहाना सीट से देवेंद्र सिंह बबली, नलवा सीट से रणधीर पनिहार, लोहारू सीट से जेपी दलाल, बाढड़ा सीट से उमेद पातुवास, दादरी सीट से सुनील सांगवान, तोशाम सीट से श्रुति चौधरी, महम सीट से दीपक हुड्डा, गढ़ी सांपला किलोई सीट से मंजू हुड्डा को भी टिकट दिया है। बीजेपी ने जेजेपी विधायक रामकुमार गौतम (ब्राह्मण) को अपने साथ मिलाया है लेकिन उन्हें नारनौंद के बजाय सफीदों से टिकट दिया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बीजेपी हरियाणा में जाट वोटों को साधने की कोशिश कर रही है।
स बार के चुनाव में बीजेपी की यह रणनीति कितनी सफल होती है, यह देखना दिलचस्प होगा। पार्टी ने अपने पुराने नेताओं पर भरोसा जताते हुए उन्हें फिर से मैदान में उतारा है और नए चेहरों को भी मौका दिया है। राज्य की राजनीति में जाट समुदाय का प्रभाव महत्वपूर्ण रहा है और बीजेपी इसे भुनाने की पूरी कोशिश कर रही है।
इस बार दलित वोट होगा एक्स फैक्टर?
इस बार हरियाणा के चुनाव में दलित वोट एक्स फैक्टर साबित हो सकते हैं। जिसको ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने अपनी पहली सूची में 13 दलितों को टिकट दिए हैं। हालांकि ये टिकट आरक्षित सीटों पर दिए गए हैं। अनुसूचित जाति के नेताओं में खरखौदा से पवन कुमार, रतिया से सुनीता दुग्गल, कालावाली से राजिंदर देसुजोधा, बवानी खेड़ा से कपूर वाल्मीकि, कलानौर से रेणु डाबला, झज्जर से कैप्टन बिरधाना और शाहाबाद से सुभाष कलसाना शामिल हैं।
भाजपा का पंजाबी समुदाय पर फोकस
पार्टी ने पंजाबी समुदाय से आठ उम्मीदवार उतारकर अपने मूल वोट बैंक पर भी ध्यान केंद्रित किया है। राज्य में पंजाबी मतदाताओं का भाजपा के साथ गहरा जुड़ाव है, जिसके चलते पार्टी उनकी आबादी के हिसाब से टिकट देने को प्रेरित हुई है। इस कदम का उद्देश्य पंजाबी मतदाताओं के बीच समर्थन को मजबूत करना है।
इन प्रयासों के अलावा भाजपा ने वैश्य समुदाय से पांच उम्मीदवारों को टिकट दिया है। वैश्य उम्मीदवारों में ज्ञानचंद गुप्ता, कमल गुप्ता, विपुल गोयल, घनश्याम सर्राफ और असीम गोयल शामिल हैं। विपुल गोयल को छोड़कर बाकी सभी मौजूदा विधायक हैं।
अन्य समुदायों का प्रतिनिधित्व
भाजपा की उम्मीदवार सूची में बिश्नोई और राजपूत समुदाय से दो-दो व्यक्ति शामिल हैं। इसके अलावा, सिख समुदाय से एक उम्मीदवार चुना गया है। यह विविधतापूर्ण प्रतिनिधित्व भाजपा की अपने उम्मीदवार चयन के माध्यम से एक मजबूत सामाजिक इंजीनियरिंग ढांचा बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
दूसरे दलों के आए नेताओं की रखा ख्याल-
भाजपा ने अपनी पहली सूची में दल-बदलुओं को भी प्रमुखता दी है। कालका से शक्ति रानी शर्मा को टिकट मिला है, जबकि भाजपा की लतिका शर्मा भी टिकट की दावेदार थीं। खरखौदा से पवन खरखौदा को उम्मीदवार बनाया गया है, जो हाल ही में जजपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। सोनीपत से पूर्व कांग्रेस नेता निखिल मदान को टिकट दिया गया है। सफीदों से पूर्व जजपा विधायक रामकुमार गौतम, टोहाना से पूर्व जजपा विधायक देवेंद्र सिंह बबली, उकलाना से पूर्व जजपा विधायक अनूप धानक को भी मौका मिला है। तोशाम से कांग्रेस से आईं पूर्व सांसद श्रुति चौधरी, बेरी से पूर्व जजपा नेता संजय कबलाना और रादौर से पूर्व इनेलो नेता श्याम सिंह राणा को भी उम्मीदवार बनाया गया है।
पूर्व CM के पोता-पोतियों को भी टिकटें
भाजपा ने राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के पोता-पोतियों को भी मौका दिया है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री राव बिरेंद्र सिंह की पोती आरती राव, चौधरी भजनलाल के पोते भव्य बिश्नोई और चौधरी बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी शामिल हैं।












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