अनिल विज की फिर से हुई अनदेखी, हरियाणा कैबिनेट के विस्तार में निर्दलीय विधायकों को भी नहीं मिली जगह

हरियाणा में नायब सैनी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के आठ दिन बाद मंगलवार को मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया। मंत्रिमंडल विस्तार में आठ विधायकों ने कैबिनेट, राज्य मंत्री पद की शपथ ली। राजभवन में गवर्नर बंडारू दत्तात्रेय ने इन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

कैबिनेट के विस्तार से पहले ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि पूर्व गृह मंत्री अनिल विज और कई निर्दलीय विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इस मंत्रिमंडल विस्तार में किसी निर्दलीय विधायक को जगह मिली है।

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जबकि भाजपा ने जजपा से गठबंधन तोड़कर 6 निर्दलीयों और एक हलोपा विधायक गोपाल कांडा के समर्थन से सरकार बनाई है। ऐसे में माना जा रहा था कि निर्दलीय विधायकों में से किसी को मंत्रीमंडल विस्तार में जगह दी जा सकती है।

हरियाणा की एमएल खट्टर सरकार के सबसे ताकतवर और चर्चित मंत्री अनिल विज को नायब सिंह सैनी की कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाई। पूर्व मंत्री अनिल विज का नाम पिछले सप्ताह शपथ लेने वाले पांच मंत्रियों की पहली सूची में नहीं था, वह इस बार भी सूची में जगह नहीं बना पाए।

पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल विज शपथ समारोह में भी नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा था कि शपथ ग्रहण की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''मैं भाजपा का भक्त हूं, स्थितियां बदल सकती हैं लेकिन मैं पार्टी के लिए काम करना जारी रखूंगा।''

विज अपनी पार्टी से पहले ही नाराज चल रहे हैं। इससे पहले चंडीगढ़ में नए सीएम के चयन को लेकर जब विधायक दल की मीटिंग हो रही थी तो नायब सैनी का नाम आने पर वो मीटिंग छोड़ कर घर चले गए थे।

यह सब पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों- कृषि मंत्री, अर्जुन मुंडा और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, तरुण चुघ के सामने हुआ। मनोहर लाल खट्टर की जगह नायब सैनी को चुने जाने से विज बेहद नाराज हो गए थे।

इस बीच चर्चा चल रही थी कि अनिल विज को नायब सरकार में उप-मुख्यमंत्री नियुक्त किया जा रहा था। यहां तक कि खट्टर ने भी कहा था कि अनिल विज का नाम नये मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने वाले मंत्रियों की सूची में है।

यह पहली बार नहीं है जब अनिल विज की यूं अनदेखी हुई है। 2014 में भी सीएम पद के लिए सबसे आगे चल रहे विज को नजरअंदाज कर दिया गया था और केंद्रीय नेतृत्व ने मनोहर लाल खट्टर को चुना था, जो केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के मुख्य रणनीतिकार अमित शाह (या मोदी) के करीबी माने जाते हैं।

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