Hardoi: लड़के बैठे हैं कुंवारे, विवाहिता लौट रही अपने मायके, मक्खियों से आतंकित हैं यूपी के यह 10 गाँव
इन 10 गाँव के लोग फ़िलहाल मक्खियों का प्रकोप झेल रहे हैं जबकि शासन प्रशासन लाचार है। प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता व स्वास्थ्य मिशन इन गांवों में पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।

कई लोगों के लिए शादी का मैच झटपट मिल जाता है तो कुछ मनचाहे जीवनसाथी के इंतजार में खासा समय बिता देते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में 10 गांव ऐसे हैं जहां के लोगों की शादियां मक्खियों की वजह से टूट रही है और जो कुंवारे हैं उनकी शादी हो ही नहीं रही है। जी हाँ आपने बिलकुल सही सुना, यहां मक्खियां लोगों के रिश्तों पर तलवार लेकर खड़ी हैं। कई बहुएं मायके लौट गई, कई लड़कों की शादियां नहीं हो रही और कारण सिर्फ एक ही, गांव में इतनी मक्खियां हैं कि बैठना, उठना, खाना-पीना बा- मुश्किल हो पाता है। इन 10 गाँव के लोग फ़िलहाल मक्खियों का प्रकोप झेल रहे हैं जबकि शासन प्रशासन लाचार है। प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता व स्वास्थ्य मिशन इन गांवों में पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।

पोल्ट्री फार्म की गंदगी है वजह
दरअसल, उत्तर प्रदेश के हरदोई में थाना बेनीगंज और ब्लाक अहिरोरी में आने वाले 10 गांव बढईयां पुरवा, कुईया, पट्टी, डही, सलेमपुर, फतेहपुर, झाल पुरवा, नया गांव, देवरिया और एकघरा ऐसे गांव हैं, जहां मक्खियों का आतंक है। सबसे ज्यादा आतंक बढ़ियइन पुरवा में है। बता दें आज से 3 साल पहले प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कर कमलों द्वारा एक पोल्ट्री फार्म मेन रोड पर खुला था। जिसको लेकर लगातार गांव के लोग आवाज उठा रहे हैं कि वहां की गंदगी की वजह से मक्खियों ने आसपास के कई गांवों में जीना हराम कर रखा है। इस मामले को लेकर किसान यूनियन ने भी कई बार धरना प्रदर्शन किया है। कई बार प्रशासन ने उनको सांत्वना तो दी लेकिन हाल वही हैं जैसे पहले थे।

न मेहमान आते हैं न लड़को के लिए रिश्ते
बढ़ईइन पुरवा गांव में मक्खियां लगातार अपना आतंक फैलाये है। इस गांव में काफी सफाई दिखी लेकिन हर घर में मरीज भी दिखे। कुछ बच्चियों ने कहा कि उनकी पढ़ाई लिखाई मुश्किल है, खाना-पीना मुश्किल है, रात में सोना मुश्किल है। कुछ अधेड़ युवकों का कहना है कि जब रिश्ते के लिए कोई यहां आता है तो उसके मक्खियां इतनी चिपक जाती हैं कि वह रिश्ता तो दूर, कुछ खाता पीता भी नहीं है। और तो और मेहमान यह कह कर चला जाता है कि तुम्हारे गांव में कौन रहेगा। गांव की कई महिलाओं ने यह भी कहा कि उनके बेटों की शादी के लिए रिश्ते नहीं आते, लोग आते हैं लेकिन उनका कहना है कि तुम्हारे गांव में इतनी मक्खियां है यहां मेरी लड़की नहीं रह सकती और चले जाते हैं। हमारी टीम द्वारा इस मामले पर छानबीन के दौरान एक बहू भी मिली जो अपना झोला उठाये अपने मायके जा रही थी। उसका कहना था इस गांव में वह नहीं रहेंगी, जब मक्खियां चली जाएंगे तब यहां वापस आ जाएगी।

"जब मक्खियां चली जाएंगी तब वापस आउंगी"
स्थानीय लोगों ने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि हाल ही में "गांव के रहने वाले एक ग्रामीण शारदा की पत्नी मक्खियों से परेशान होकर अपने ससुराल से मायके चली गई। अब वो इन मक्खियों की वजह से ससुराल लौटना नहीं चाहती है, जिससे दोनों का रिश्ता टूटने की कगार पर है। यहीं पर रहने वाले मुंगालाल की पत्नी शिवानी भी मक्खियों से परेशान होकर गांव में रहने को तैयार नहीं है। वो कहती है कि गांव में मक्खियों का प्रकोप इतना है कि जीना मुश्किल है। तीन अन्य निवासी आजाद, शीलू और विजय की पत्नियां भी मायके जाने के बाद से दोबारा आने को तैयार नहीं हैं।

गाँव वाले बैठे धरने पर
इस समस्या से निजात पाने के लिए श्रवण कुमार के नेतृत्व में ही गांव के लोग पिछले एक साल से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. सड़क जाम से लेकर आंदोलन तक किया. इसके चलते कुछ गांव वालों पर पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज किया है. अब वे लोग पिछले 12 दिनों से गांव के अंदर ही टेंट लगाकर अपना विरोध जता रहे हैं. उन्हें स्थानीय किसान यूनियन के दशहरी गुट का भी समर्थन प्राप्त है.
वही पोल्ट्री फार्म के मालिक दलवीर सिंह ने बताया कि फार्म की स्थापना के समय उन्होंने प्रदूषण विभाग से NOC लिया था। दलवीर का कहना है कि फार्म का निर्माण आबादी से दूर ही किया गया था, लेकिन बाद में लोगों ने पोल्ट्री फार्म के पास सड़क पर घर बना लिए। फार्म मालिक का ये भी दावा है कि उन्होंने मक्खियों के कंट्रोल के लिए पूरी व्यवस्था की हुई है, जिसकी कई बार जांच भी की गई है. दलवीर के मुताबिक, जांच में उनके फार्म में कोई कमी नहीं पाई गई और मक्खियों की वजह से रिश्ते टूटने की बात बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
अधिकारी के मुताबिक फार्म के लोगों को समय-समय पर मक्खियों के कंट्रोल के निर्देश दिए जाते है. इसके अलावा पशु पालन विभाग के अधिकारी भी चेकिंग करते रहते हैं। लेकिन अगर प्रदूषण से जुड़ी या मक्खी की कोई समस्या है, तो इसके लिए प्रदूषण विभाग को देखना चाहिए।












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