ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां की हालत गंभीर, जानिए क्यों माधवी राजे को पसंद नहीं आई राजनीति?
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya M Scindia) की मां माधवी राजे सिंधिया (Madhavi Raje Scindia) की तबीयत काफी खराब हो गई है।
बताया जा रहा है कि राजमाता सिंधिया की तबीयत बिगड़ने पर उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया चुनाव प्रचार छोड़ अचानक दिल्ली रवाना हो गई है। बताया जा रहा है कि माधवीराजे की तबीयत ज्यादा खराब है।

जानकारी मुताबिक दो मई को के सभी कार्यक्रम निरस्त रहेंगे। ज्ञात हो कि राजमाता के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार बनाए गए हैं।
एम्स में चल रहा इलाज
गुना-शिवपुरी संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे सिंधिया का दिल्ली एम्स में फरवरी माह से ही इलाज चल रहा है। 15 फरवरी को भी वे वेंटिलेटर पर थीं। 70 वर्षीय माधवीराजे सिंधिया के लंग्स में इंफेक्शन है। स्थिति ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें वंटिलेटर पर रखा गया है।
15 फरवरी को माधवी राजे बीयत बिगड़ी थी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उसके बाद से ही उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। वे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कुछ समय पहले यह जानकारी शेयर की थी।
माधवी राजे नेपाल राजघराने से हैं।
नेपाल राजघराने से माधवीराजे सिंधिया का संबंध है। उनके दादा शमशेर जंग बहादुर राणा नेपाल के प्रधानमंत्री थे। कांग्रेस के दिग्गज नेता माधवराव सिंधिया के साथ माधवीराजे से शादी से पहले प्रिंसेस किरण राज्यलक्ष्मी देवी उनका नाम था। साल 1966 में माधवराव सिंधिया के साथ उनका विवाह हुआ था। मराठी परंपरा के मुताबिक शादी के बाद उनका नाम बदलकर माधवीराजे सिंधिया रखा।
पहले वे महारानी थीं, लेकिन 30 सितंबर 2001 को उनके पति और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवरा निधन के बाद से उन्हें ये संबोधित किया जाने लगा। नाम बदलकर माधवीराजे सिंधिया रखा गया था। पहले वे महारानी थीं, लेकिन 30 सितंबर 2001 को उनके पति और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया के निधन के बाद से उन्हें राजमाता के नाम से संबोधित किया जाने लगा।
क्यों माधवी राजे को राजनीति नहीं आई रस?
सिंधिया राजपरिवार में माधवी राजे की सास विजयाराजे सिंधिया ने 1957 में राजनीति में कदम बढ़ा दिये थे। पहली बार कांग्रेस से सांसद बनी थी हांलाकि फिर 10 साल बाद ही वे कांग्रेस छोड़कर जनसंघ में शामिल हुई और संस्थापक सदस्यों में रहीं. सास के दिए सिंधिया परिवार के संस्कार, रीति रिवाज माधवी राजे सिंधिया ने सब सिर माथे रखे लेकिन राजनीति की तरफ उनके कदम नहीं बढ़े। जबकि परिवार में ही उनकी ननद वसुंधरा राजे राजनीति में आने के बाद राजस्थान की मुख्यमंत्री रहीं। आखिर ऐसी क्या वजह रही कि माधवी राजे को राजनीति रास नहीं आई।
वरिष्ठ पत्रकार पंकज श्रीमाली कहते हैं कि "हर व्यक्ति का अपना टेम्परामेंट होता है। फिर माधवराव सिंधिया नहीं रहे उसके बाद जिस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया राजनीति में आए और उन्होंने सब अच्छी तरह संभाला, तो फिर परिवार से एक ही सदस्य को आगे आना था। ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया आए भी और उन्होंने बखूबी सब संभाला भी।
जनता ने केवल उन्हें प्रचार में देखा
माधवी राजे माधवराव सिंधिया से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया तक परिवार का संबल बनी रहीं। यहां तक की वैसे भले उनकी राजनीति में कोई सक्रियता ना रही हो। वैसे भले उन्होंने सियासत में कदम ना बढ़ाए हों लेकिन माधवराव सिंधिया से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया तक जनता के बीच जब जाने की जरुरत प़ड़ी माधवी राजे पीछे नहीं हटीं।
संवाद सूत्र: पंकज श्रीमाली, ग्वालियर मध्य प्रदेश












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