Gwalior: जैन तीर्थंकर प्रतिमाओं का अपमान, बवाल के बाद प्रीति और लखन के खिलाफ FIR, जैन समाज में गुस्से की लहर
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक सोशल मीडिया रील ने धार्मिक समुदायों में गहरी नाराजगी फैला दी है। इस रील में प्रीति कुशवाह नाम की महिला और उसके साथी लखन कुशवाह ग्वालियर किले के नीचे स्थित ऐतिहासिक जैन तीर्थंकर प्रतिमाओं के सामने अभद्र भाषा का प्रयोग करते और जूते-चप्पल पहनकर उन पर बैठते नजर आए।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विवाद का रूप ले लिया, और अब इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग हो रही है।

क्या है पूरा मामला?
शिवपुरी जिले की रहने वाली प्रीति कुशवाह और लखन कुशवाह अपने दोस्तों के साथ ग्वालियर किले के ऐतिहासिक स्थल पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने एक रील बनाई। इस रील में न सिर्फ वे जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाओं के सामने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए नजर आए, बल्कि जूते-चप्पल पहनकर उन प्रतिमाओं की गोद में भी बैठ गए। इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर अपलोड किए जाने के बाद यह तेजी से वायरल हो गया और पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई।
जैन समाज का आक्रोश
ग्वालियर किले की जैन तीर्थंकर प्रतिमाएं धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन प्रतिमाओं का संरक्षण जैन समाज के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक है। इन प्रतिमाओं पर मुगलों के शासनकाल में औरंगजेब द्वारा हमले किए गए थे, और जैन समाज ने इनकी रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे में जब यह रील वायरल हुई, तो जैन समाज के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। जैन समाज के प्रतिनिधियों ने एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह से मुलाकात की और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
माफी के बावजूद मामला दर्ज
विवाद बढ़ने के बाद, प्रीति और लखन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डालकर अपनी गलती के लिए माफी मांगी। हालांकि, जैन समाज ने इसे केवल दिखावा मानते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। इस पर पुलिस ने देर रात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। जैन समाज के संगठनों और आम नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि दोनों आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई यूजर्स ने इसे धार्मिक आस्थाओं का अपमान बताया और कठोर सजा की मांग की। एक यूजर ने लिखा, "यह सिर्फ एक रील नहीं, हमारी आस्था का अपमान है।" वहीं, अन्य यूजर्स ने प्रशासन से उम्मीद जताई कि वे इस मामले में सख्त कार्रवाई करेंगे और सामाजिक असहिष्णुता के ऐसे कृत्यों पर रोक लगाएंगे।

ग्वालियर किले की ऐतिहासिक महत्वता
ग्वालियर किले में स्थित जैन तीर्थंकर प्रतिमाएं 14वीं-15वीं सदी में तोमर वंश के शासकों द्वारा बनवाई गई थीं। इनमें सबसे बड़ी ऋषभनाथ की प्रतिमा 58 फीट ऊंची है। यह स्थान जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है। इन प्रतिमाओं पर बाबर और औरंगजेब के शासनकाल में हमले हुए थे, लेकिन जैन समाज ने इनका संरक्षण किया। ऐसे में यह घटना जैन समाज के लिए एक बड़ा आघात मानी जा रही है।
आगे क्या होगा?
पुलिस ने अब मामले की जांच शुरू कर दी है। जैन समाज की मांग है कि दोनों आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी सजा दी जाए, ताकि इस तरह के कृत्य भविष्य में न दोहराए जाएं। यह घटना न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला है, बल्कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग और ऐतिहासिक धरोहरों के सम्मान पर भी सवाल उठाती है। अब यह देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी सख्ती बरतती है और क्या आरोपी जल्दी गिरफ्तार होते हैं।












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