टिकट कटने से नाराज डेढ़ सौ से ज्यादा बागी नेता उतरे चुनाव मैदान में
ग्वालियर में टिकट नहीं मिलने से नाराज बीजेपी और कांग्रेस के 150 से ज्यादा नेताओं ने बगावत करते हुए नामांकन दाखिल कर दिया है, बीजेपी और कांग्रेस दोनो ही दलों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है
ग्वालियर, 19 जून। ग्वालियर में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है लेकिन प्रत्याशियों की घोषणाओं के साथ ही बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए परेशानी भी खड़ी हो गई है। यह परेशानी खड़ी करने वाले विरोधी दल नहीं बल्कि उन्हीं के दल के नेता हैं, जो अब बागी होकर चुनाव मैदान में उतर आए हैं और अपनी ही पार्टी के प्रत्याशियों के खिलाफ नामांकन दाखिल करते हुए चुनाव प्रचार में जुट गए है।

कांग्रेस और बीजेपी के कई नेता इतने सालों से इस बात की उम्मीद लगाए बैठे थे कि वे अपने अपने वार्ड से पार्षद का चुनाव जरूर लड़ेंगे। कई सालों से वे इसकी तैयारियां भी कर रहे थे और लोगों से जनसंपर्क भी कर रखा था, लेकिन ऐन वक्त पर ऐसे जुझारू नेताओं का पार्टी के टिकट काट दिया और किसी और की झोली में टिकट डाल दिया। इस बात से चुनाव लड़ने का सपना सजाए बैठे हुए नेताओं की होश उड़ गए। पहले तो इन नेताओं ने पार्टी स्तर पर टिकट लेने का प्रयास किया, लेकिन जब बात नहीं बनी तो पार्टी के खिलाफ बगावत का सुर बुलंद कर दिया।
बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में दिखे विरोध के सुर
बात चाहे बीजेपी पार्टी की हो या कांग्रेस पार्टी की हो, दोनों ही दलों में टिकट कटने की वजह से विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कल तक जो नेता और कार्यकर्ता पार्टी का झंडा और डंडा लेकर चल रहे थे, आज उन्होंने पार्टी के झंडे को अपने डंडे से निकालकर अलग कर दिया है और चुनाव मैदान में उतर कर पार्टी के के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
डेढ़ सौ से ज्यादा बागी नेता उतरे चुनाव मैदान में
जिला निर्वाचन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को 270 नामांकन दाखिल हुए। जानकारी के अनुसार बीजेपी के 100 से ज्यादा बागी नेताओं ने अपना नामांकन दाखिल किया, तो वहीं कांग्रेस के 50 से ज्यादा बागी नेताओं ने चुनाव लड़ने के लिए अपने अपने नामांकन दाखिल किए। अब ग्वालियर नगर निगम के चुनाव मैदान में 542 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
बागी नेताओं को मनाने में जुटे दोनों ही दल
बीजेपी और कांग्रेस से बगावत करके चुनावी मैदान में उतरने वाले नेताओं को मनाने की कवायद भी शुरू हो गई है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दल अब बागी नेताओं को मनाने का प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि अगर पार्टी के ही नेता पार्टी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगे तो इसका नुकसान पार्टी को ही होगा। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस कोई भी दल अपने नेता और कार्यकर्ता को खुद से अलग नहीं करना चाहता है। यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने बागी नेताओं को मनाने में जुटे हुए हैं।












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