पत्नी को परीक्षा दिलाने के लिए झारखंड से ग्वालियर 1176 KM दूर स्कूटी से आए, अब फ्लाइट से जाएंगे घर

ग्वालियर। गर्भवती पत्नी को स्कूटी पर बैठाकर 1176 किलोमीटर का सफर करने वाला यह जोड़ा अब फ्लाइट से घर जा सकता है। इसके लिए ग्रुप इनकी मदद को आगे आया है। खबर है कि देश के प्रमुख औद्योगिक घरानों में से एक अडानी ग्रुप ने जब धनंजय मांझी व उनकी पत्नी सोनी हेम्बरम के झारखंड के गोंडा से मध्य प्रदेश के ग्वालियर तक सफर के बारे में सुना तो इन्हें मदद की पेशकश की।

परिचित की मेल आईडी उपलब्ध करवाई

परिचित की मेल आईडी उपलब्ध करवाई

मीडिया से बातचीत में धनंजय ने बताया कि अडानी ग्रुप की उनकी मदद को आगे को आया है और हमारे लिए घर वापसी में फ्लाइट की टिकिट की व्यवस्था करने को कहा है। इस पर अपने एक परिचित की मेल आईडी उन्हें उपलब्ध करवाई है, जिस पर फ्लाइट की टिकिट भेजी जाएगी।

 ग्वालियर जिला प्रशासन भी मदद को आगे आया

ग्वालियर जिला प्रशासन भी मदद को आगे आया

बता दें कि छह माह की गर्भवती पत्नी को परीक्षा दिलाने के लिए झारखंड के गोंडा से स्कूटी पर ग्वालियर आए धनंजय ने 1500 रुपए में एक कमरा 10 दिनों के लिए किराए पर लिया था। लेकिन जैसे ही धनंजय के संघर्ष और जज्बे की जानकारी जिला प्रशासन को लगी तो जिला प्रशासन भी मदद के लिए आगे आया।

 5000 रुपए की आर्थिक मदद

5000 रुपए की आर्थिक मदद

धनंजय ने दिल से प्रशासन का धन्यवाद देते हुए बताया है कि डीएम ने उनकी काफी मदद की है और जिला शिक्षा अधिकारी ने परीक्षा केन्द्र के पास ही रहने की व्यवस्था की है। भोजन आदि मूलभूत आवश्यकताओं की भी पूर्ति की गई है और साथ ही 5000 रुपए आर्थिक मदद के तौर पर मुहैया कराए हैं और परीक्षा समाप्ति के बाद उन्हें ये आश्वासन भी दिया गया है कि परीक्षा खत्म होने के बाद उनके झारखंड तक वापस पहुंचने की व्यवस्था भी प्रशासन करेगा।

इसलिए स्कूटी से आए ग्वालियर

इसलिए स्कूटी से आए ग्वालियर

धनंजय के अनुसार पत्नी सोनी छह माह की गर्भवती है। दिसंम्बर में प्रसव होना है। परीक्षा भी जरूरी है। हमने ग्वालियर आने के लिए ट्रेन का टिकट करवाया था, मगर एक दिन पहले ही ट्रेन कैंसिल हो गई। फिर हमने बस से आने की ठानी तो प्रति सवारी का 15 हजार रुपए किराया बताया गया। पति पत्नी का तीस हजार लगते। ऐसे में हमने अपनी स्कूटी से सफर तय करना उचित समझा। 28 अगस्त को गोंडा से चलते थे। तीस अगस्त को ग्वालियर पहुंचे हैं।

बिहार में करना पड़ा बाढ़ का सामना

बिहार में करना पड़ा बाढ़ का सामना

धनंजय के अनुसार एक हजार किलोमीटर से अधिक लंबे इस सफर के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई बार रास्ते में तेज बारिश में भिगे। एक पेड़ के नीचे दो घंटे तक खड़े रहना पड़ा। बिहार के भागलपुर से गुजरते समय बाढ़ का भी सामना किया। मुजफ्फरपुर में एक रात लॉज में और लखनऊ में एक रात टोल टैक्स बैरियर पर भी रुके।

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