ग्वालियर में बढ़ा कुत्तों का आतंक, रोजाना आ रहे 100 मामले, डॉक्टर से जानिए कैसे करें बचाव
Gwalior News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में आवारा कुत्तों का आतंक देखने को मिला है। जहां अलग-अलग जगहों से कुत्तों के काटने की कई घटनाएं सामने आई हैं। शहर में हर दिन एक सैंकड़ा से अधिक लोग डाग बाइट के शिकार बन रहे हैं।
अस्पतालों में डॉग बाइट का शिकार मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या बच्चों की भी है। ग्वालियर जया रोग अस्पताल प्रशासन ने भी स्थिति को बेकाबू होना बताया है। जबकि निगम प्रशासन मीठी नींद सो रहा है।

बंद पड़ा एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर
निगम का एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोजेक्ट (एबीसी) सेंटर पिछले छह महीने से बंद पड़ा है। इसके कारण शहर में श्वान की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन निगम को इसकी चिंता नहीं है। यही कारण है कि छह महीने में नगर निगम एबीसी सेंटर चालू नहीं करा सका।
हालांकि अब निगम का कहना है कि श्चान की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए उनकी धर पकड़ शुरू की जाएगी और उन्हें उसी स्थान पर रखा जाएगा जहां पर एबीसी सेंटर संचालित होता था। एबीसी सेंटर बंद होने से श्वान की धर पकड़ बंद हो चुकी है। जिसके कारण शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालात यह है कि लोग सीएम हेल्पलाइन तक लगा रहे हैं। लेकिन इन शिकायतों का निराकरण नहीं हो रहा है इस कारण से लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
दो मरीजों की हो चुकी है मौत
ग्वालियर जे एच अधीक्षक आरकेएस धाकड़ का कहना है कि जिले में डॉग बाइट के मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। रोजाना करीबन 100 लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं। पिछले दिन तो यह संख्या और अधिक बढ़ गई। जे एच सहित शहर के अन्य अस्पतालों को मिलाकर 400 के करीब डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं।
इसके साथ ही देहात इलाकों में भी डेड सैकड़ा के करीब लोग डॉग बाइट का शिकार हुए हैं। यह काफी बड़ी संख्या है और इससे दो तरफ का नुकसान है एक तो मरीज को शारीरिक नुकसान होता है तो वहीं दूसरी ओर अस्पताल पर भी फाइनेंशियल दबाव बढ़ता है। क्योंकि डॉग बाइट के मरीज के इलाज पूरी तरह निशुल्क है और इसका इलाज काफी महंगा भी है। जिस कारण अन्य मरीजों के इलाज के लिए दवाओं के कोटे में कमी होती है।
जे अधीक्षक आरकेएस धाकड़ ने कहा कि अभी तक दो मरीज रेबीज का शिकार होकर मृत्यु पा चुके हैं। रेबीज बीमारी का आज भी सही तरीके से इलाज नहीं है और जिसमें रेबीज के लक्षण आ जाते हैं उसे बचा पाना मुश्किल होता है।
बच्चों को बचाकर रखें पेरेंट्स
जे एच अधीक्षक आरकेएस धाकड़ का कहना है कि डॉग बाइट से बचने का सबसे बड़ा उपाय सावधानी है। पेरेंट्स खासकर बच्चों को बचाकर रखें क्योंकि डॉग बाइट के मामलों में बच्चों की संख्या काफी ज्यादा हैं।
घाव पर कभी पट्टी नहीं बांधे और साबुन से तुरंत साफ करें घाव
डॉ आरकेएस धाकड़ का कहना है कि डॉग बाइट के बाद घाव के स्थान को कभी भी पट्टी से नहीं बांधना चाहिए और सबसे पहले घाव को साबुन से अच्छी तरीके से साफ करना चाहिए हमारे यहां जो भी मरीज पहुंचते हैं। सबसे पहले उनके घाव साफ किए जाते हैं। उसके बाद उन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन दी जाती है। इसमें तीन इंजेक्शन लगने के बाद रेबीज की संभावना पूरी तरह काम हो जाती है। लेकिन इलाज में देरी प्राण घातक हो सकती है।
संवाद सूत्र: पंकज श्रीमाली, ग्वालियर/मध्य प्रदेश
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