MP News: ग्वालियर हाई कोर्ट में भीमराव अंबेडकर प्रतिमा विवाद, भीम आर्मी की महापंचायत, पुलिस की रोकटोक
MP News: ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बुधवार को इस मुद्दे पर भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने फूलबाग मैदान में महापंचायत का आयोजन बुलाया था, लेकिन ग्वालियर पुलिस ने संगठन के कार्यकर्ताओं को ग्वालियर-मुरैना बॉर्डर के निरावली पॉइंट पर रोक लिया।
इसके बावजूद, दोपहर 2:30 बजे तक 3,000 से अधिक कार्यकर्ता निरावली पॉइंट पर जुट गए और वहां महापंचायत का आयोजन किया। मंच से भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह और अन्य नेताओं ने ऐलान किया कि "चाहे कुछ भी हो, डॉ. अंबेडकर की मूर्ति हाई कोर्ट परिसर में ही स्थापित होगी।" यह विवाद अब सामाजिक, राजनीतिक, और कानूनी स्तर पर तनाव का रूप ले चुका है, जिसने ग्वालियर में जातिगत संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है।

निरावली पॉइंट पर महापंचायत: भारी भीड़ और पुलिस की सख्ती
भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने डॉ अंबेडकर की 10 फीट ऊंची प्रतिमा को ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर में स्थापित करने की मांग को लेकर फूलबाग मैदान में बुधवार को महापंचायत बुलाई थी। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था के मद्देनजर इसकी अनुमति नहीं दी और ग्वालियर-मुरैना बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। निरावली पॉइंट पर पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर कार्यकर्ताओं को शहर में प्रवेश करने से रोक लिया।
पुलसी की सख्ती के बावजद, सुहब 11 बजे से शुरू हुई महापंचयत में दोपह 2:30 बजे तक 3,000 से अधिक लोग जुट गए। मंच से विनय रतन सिंह ने कहा, "बाबा साहब का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा। संविधान निर्माता की मूर्ति हाई कोर्ट में लगाना सामाजिक न्याय का प्रतीक है। हम शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन अगर प्रशासन ने इसे दबाया, तो आंदोलन और तेज होगा।" अन्य वक्ताओं ने भी चेतावनी दी कि "प्रतिमा स्थापना के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी।"
पुलिस की कार्रवाई: आगरा-धौलपुर से आने वालों को रोका
प्रशासन ने किसी भी बड़े जनसमूह को ग्वालियर शहर में प्रवेश करने से रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए। आगरा और दिल्ली से आने वाले कार्यकर्ताओं को धौलपुर बॉर्डर पर, जबकि मुरैना की ओर से आने वालों को निरावली पॉइंट पर रोक लिया गया। ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह ने कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं। बिना अनुमति के किसी भी प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जाएगी। स्थिति नियंत्रण में है।"
सुरक्षा व्यवस्था: 1,400 पुलिसकर्मी, एम्बुलेंस और ड्रोन
ग्वालियर प्रशासन ने इस घटनाक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाए रखा। ग्वालियर शहर से मुरैना बॉर्डर तक 1,400 पुलिसकर्मियों, जिसमें रिजर्व फोर्स और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, को तैनात किया गया। संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी की गई, और आपातकालीन स्थिति के लिए एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, और मेडिकल टीमें तैनात की गईं। जिला कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा, "हम किसी भी अशांति को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सोशल मीडिया पर अफवाहों और भड़काऊ बयानबाजी पर सख्त नजर है।"
विवाद की जड़ हाई कोर्ट में प्रतिमा स्थापना
यह विवाद फरवरी 2021 में शुरू हुआ, जब ग्वालियर हाई कोर्ट के कुछ अधिवक्ताओं ने तत्कालीन चीफ जस्टिस को डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना के लिए ज्ञापन सौंपा। समर्थकों का दावा है कि चीफ जस्टिस ने मौखिक सहमति दी थी, जिसके बाद पीडब्ल्यूडी ने मूर्ति के लिए चबूतरे का निर्माण शुरू किया। लेकिन बार एसोसिएशन को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया, जिससे असंतोष फैला।
26 मार्च 2021 को जबलपुर के प्रधान रजिस्ट्रार ने मूर्ति स्थापना के लिए आदेश जारी किए, और अप्रैल में पीडब्ल्यूडी को चबूतरे के निर्माण के निर्देश मिले। हालांकि, 10 मई 2021 को विरोधी वकीलों ने प्रस्तावित स्थल पर तिरंगा फहराया, जिसके बाद पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई। 17 मई को भीम आर्मी के एक कार्यकर्ता पर हाई कोर्ट परिसर में हमला हुआ, जिसने विवाद को और भड़का दिया।
वर्तमान में 10 फीट ऊंची प्रतिमा मूर्तिकार प्रभात राय के स्टूडियो में रखी है, जहां 10 पुलिसकर्मी और 15 सीसीटीवी कैमरे 24 घंटे सुरक्षा में तैनात हैं।। मूर्ति का चबूतरा तैयार है, लेकिन स्थापना का मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है।
वकीलों के दो गुट और बार एसोसिएशन का रुख
ग्वाल हाई कोर्ट में वकील दो गुटों में बंट गए हैं। समर्थक वकील, मुख्य रूप से दलित और पिछड़े वर्ग से, मानते हैं कि डॉ. अंबेडकर की मूर्ति संविधान निर्माता के सम्मान और सामाजिक न्याय का प्रतीक होगी। अधिवक्ता धर्मेंद्र कुशवाह ने कहा, "बाबा साहब ने संविधान बनाकर देश को एकजुट किया। उनकी प्रतिमा से न्यायपालिका की गरिमा बढ़ेगी।"
विरोधी गुट और बार एसोसिएशन इसे सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन मानते हैं, जो कहती हैं कि न्याय परिसर को निष्पक्ष और व्यक्ति-मुक्त रखना चाहिए। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनि












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