इस सीट में तो गजब हो गया! 13 उम्मीदवार NOTA से हारे, 17 प्रत्याशियों की जमानत जब्त

Gwalior Lok Sabha seat: लोकसभा चुनाव के नतीजों ने देश की सियासी तस्वीर तो साफ कर दी है लेकिन ग्वालियर लोकसभा सीट में जब नतीजों को विश्लेषण होने लगा तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। यहां लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे 13 प्रत्याशी नोटा (नन ऑफ द एबव) से हार गए हैं। वहीं 17 उम्मीदवार अपनी जमानत बचाने में नाकाम रहे।

ग्वालियर लोकसभा के भाजपा प्रत्याशी भारत सिंह कुशवाह ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रवीण पाठक पर 70210 वोट से जीत दर्ज की है। ग्वालियर लोकसभा में 19 प्रत्याशी मैदान में थे।

13 candidates lost to NOTA in Gwalior

भाजपा-कांग्रेस को छोड़ दिया जाए तो 17 प्रत्याशी अपनी जमानत ही नहीं बचा पाए हैं, जबकि 13 उम्मीदवार तो नोटा से ही नहीं जीत पाए। नोटा को 3341 वोट मिले थे। 13 उम्मीदवार इसी आंकड़े को पार नहीं कर पाए हैं। सीधे शब्दों में कहें तो ग्वालियर में भाजपा-कांग्रेस में ही सीधा मुकाबला था। भारतीय जनता पार्टी ने लगातार पांचवीं बार ग्वालियर लोकसभा पर अपना दबदबा बनाए रखा है।

ग्वालियर लोकसभा सीट से भाजपा और कांग्रेस में कड़ा मुकाबला चला और शुरुआती बढ़त के साथ भाजपा प्रत्याशी भारत सिंह कुशवाह मुकाबले में आगे बढ़ते ही चले गए और फिर कभी प्रवीण पाठक टक्कर नहीं दे पाए। यहां बता दें कि प्रवीण पाठक, भाजपा प्रत्याशी से अपनी पोलिंग पर तो जीत गए, लेकिन अपने गढ़ दक्षिण विधानसभा में हार गए हैं। यह विधानसभा कुशवाह बाहुल्य मानी जाती है। वर्तमान में यहां से भाजपा विधायक नारायण सिंह कुशवाह हैं।

ग्वालियर लोकसभा में 19 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। जिनमें कांग्रेस और भाजपा को छोड़ दिया जाए, तो शेष 17 प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए हैं। जमानत से मतलब जब कोई भी प्रत्याशी नामांकन दाखिल कर चुनाव लड़ता है तो उसे चुनाव आयोग की गाइड लाइन के अनुसार एक जमानत राशि भरनी पड़ती है। यह समान्य, पिछड़ा वर्ग व एससी-एसटी के लिए अलग-अलग होती है। जब परिणाम आते हैं तो डाले गए कुल वैद मतों का 1/6 से कम वोट हासिल करने वालों की जमानत राशि जब्त हो जाती है। ग्वालियर लोक सभा में वैद मतों की संख्या 1339888 है। ऐसे में 1/6 मत 223315 होंगे। 19 में से 17 प्रत्याशी इस आंकड़े के आसपास भी नहीं आ पाए हैं।

ग्वालियर में चुनावी रिजल्ट आने के बाद एक और रोचक आंकड़ा सामने आया है। परिणाम में कुल 3341 वोट नोटा को मिले है। मतलब चुनावी मैदान में खड़े हुए उम्मीदवारों में से कोई पसंद नहीं। 19 उम्मीदवार मैदान में थे और इनमें से 13 प्रत्याशी ऐसे रहे जो नोटा की बाउंड्री ही क्रॉस नहीं कर पाए। मतलब यह प्रत्याशी नोटा को मिलने वाले वोट से ज्यादा नहीं मिल पाए। जिनमें 8 निर्दलीय हैं और 5 छोटे दल से हैं।

नामाकंन पत्र दाखिल होने के आखिरी समय में कांग्रेस से इस्तीफा देकर बसपा (बहुजन समाज पार्टी) में आए कल्याण सिंह कंसाना ने कांग्रेस का काफी हद तक खेल बिगाड़ा। उनको 33465 वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस से भाजपा प्रत्याशी 70210 वोट से जीता है। ऐसे में यह पूरे वोट भी कांग्रेस पर चले जाते तो भी भारतीय जनता पार्टी की जीत पक्की थी।

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