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#WorldLionDay : गुजरात है एशियाई शेरों का एकमात्र बसेरा, 8 किलोमीटर तक सुनाई देती है इनकी दहाड़

अमरेली। जब भी कहीं शेरों का जिक्र होता है, तो दुनियावाले ​​एशियाई या अफ्रीकी शेर का ही नाम लेते हैं। दुनिया में शेरों की यही दो प्रमुख प्रजातियां हैं। जिनमें से एशियाई शेरों का एकमात्र बसेरा गुजरात के गिर जंगल माने जाते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि देश-दुनिया में यहीं सबसे ज्यादा एशियाई शेर रहते हैं। यहां से अलग जो भी जंगल या जू हैं, वहां शेर लगातार कम हो रहे हैं। मगर, गुजरात में शेरों की तादाद बढ़ रही है। आज के दिन दुनियाभर में विश्व सिंह दिवस (World Lion Day) मनता है। शेरों की लुप्त हो रही प्रजाति के लिए जनजागृति के उद्देश्य से 10 अगस्त को गुजरात में भी लायंस-डे सेलिब्रेट किया गया। यह ऐसा जानवर है, जिसका नाम तो सभी लेते हैं, लेकिन इसकी जिंदगी के बारे में कम ही लोग जानते हैं। आज हम इस मौके पर आपको बताएंगे शेरों से जुड़ी सभी जरूरी बातें।

यहां रहते हैं सबसे ज्यादा एशियाई शेर

यहां रहते हैं सबसे ज्यादा एशियाई शेर

भारत में शेरों की सैंक्चुअरी तो कई स्थानों पर हैं, लेकिन गिर के ही जंगल एकमात्र स्थाई निवास माने जाते हैं। पश्चिमी देशों के लोग गुजरात के शेरों को 'एशियाटिक लायंस' कहते हैं। ये आकार में अफ्रीकी शेरों से छोटे होते हैं, लेकिन ये काफी फुर्तीले होते हैं। यहां इनकी संख्या 10-20 नहीं, बल्कि 675 है। और इसलिए यह भी सच है कि, पूरे एशिया महाद्वीप में सबसे ज्यादा शेर यहीं पर हैं। हर साल दुनिया भर से हजारों की संख्या में सैलानी यहां आते हैं। यह अलग बात है कि, इस बार कोरोना के कारण सभी तरह की मूवमेंट पर रोक है।

670 पार हुई गिर में शेरों की संख्या

670 पार हुई गिर में शेरों की संख्या

पिछली बार गुजरात में वर्ष 2015 में शेरों की गिनती की गई थी, तब इनकी संख्या 523 थी। उसके पांच वर्ष बाद वन विभाग ने 2020 के जून में ताजा रिपोर्ट पेश की। जिसमें बताया गया कि, विगत पांच सालों में यहां 152 शेर बढ़ गए हैं और कुल संख्या 675 पार हो गई है। जिनमें 137 शावक भी शामिल हैं। कुल मिलाकर 5 साल बाद शेरों की संख्या में 29 फीसदी का इजाफा हुआ है।

कितना है शेरों का इलाका, जानिए

कितना है शेरों का इलाका, जानिए

गुजरात में सरकार द्वारा लगातार पौधारोपण कराया जा रहा है। साथ ही वनविभाग ने गिर अभ्यारण्य संरक्षित क्षेत्र का ख्याल रखा है। जिसके चलते यह अब महज 1,400 वर्ग किलोमीटर तक ही सीमित नहीं रह गया, बल्कि यहां शेर अब 21,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में घूमते देख जा सकते हैं।
वन विभाग की हालिया रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया कि, गिर के वन एवं उसके आसपास शेरों के विचरण वाले क्षेत्र में 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। 9 जिलों में यह बढ़कर 30,000 वर्ग किमी हो गया है। इससे पहले 2015 में शेरों के पदचिह्न पाए जाने का कुल क्षेत्र पांच जिलों में 22000 वर्ग किमी ही था।

सक्करबाग जू दुनिया का सबसे बड़ा ब्रीडिंग सेंटर

सक्करबाग जू दुनिया का सबसे बड़ा ब्रीडिंग सेंटर

गुजरात में जूनागढ़ स्थित साकारबाग प्राणी उद्यान, जिसे सक्करबाग चिड़ियाघर या जूनागढ़ चिड़ियाघर के नाम से भी जाना जाता है, एक 84 हेक्टेयर (210 एकड़) का चिड़ियाघर है, जो 1863 में खोला गया था। अब यह शेरों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा ब्रीडिंग सेंटर माना जाता है। यहां हफ्तेभर में शेर के जन्म की खबर आ जाती है।

इस जंगल में शेरों से ज्यादा शेरनियां

इस जंगल में शेरों से ज्यादा शेरनियां

वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 30 साल में शेरों की संख्या ढाई तक गुना बढ़ गई है। मगर, इससे भी ज्यादा खुशी की खबर यह है कि, शेरों के मुकाबले शेरनियां ज्यादा पैदा हुईं। अब कुल 674 सिंहों में 161 नर हैं, जबकि मादा 260 हैं। अल्प व्यस्क शेरों की संख्या 94 है, जिनमें 45 नर और 49 मादा हैं। वहीं, शावकों की संख्या 137 है और अचिन्हित लिंग वाले 22 शेर हैं।

इस साल 87 शेरों की मौत भी हुई

इस साल 87 शेरों की मौत भी हुई

नागपंचमी से पहले एक रिपोर्ट में बताया गया था कि, गुजरात में इस वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में ही 85 एशियाई शेरों की मौत हो गई। जिनमें से 59 की मौत गिर ईस्ट डिवीजन में हुई। इसी इलाके में वर्ष 2018 के दौरान करीब 27 शेरों की मौत हुई थी। इस साल यानी 2020 में काफी शेरों की मौत हो जाने के बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली से एक जांच दल गुजरात भेजा। यह दल शेरों की मौत की वजहें जानने के लिए आया था।

2019 में मरे थे 134 शेर, 2018 में 112

2019 में मरे थे 134 शेर, 2018 में 112

पिछले वर्ष गुजरात में 134 शेरों की लाशें मिली थीं। उससे पहले वर्ष 2018 में 112 मौतें दर्ज की गई थीं। इन मौतों को लेकर संभावना जताई गई कि कुछ शेरों की मौत सीडीवी की वजह से ही हुई। इसलिए राज्य सरकार एहतियातन एक हजार वैक्सीन आयात कर रही है।

8 सालों में गई 500 से ज्यादा शेरों की जान

8 सालों में गई 500 से ज्यादा शेरों की जान

फरवरी 2019 में वनइंडिया ने एक खबर में बताया था कि, गुजरात में 8 सालों के अंदर 529 शेरों की मौत हो चुकी है। अकेले वर्ष 2016 में ही 114 शेरों की जान गई। यह भी तब, जबकि यहां सासन गिर के जंगल एशियाई शेरों के लिए दुनिया में सबसे सेफ प्रश्रय स्थल माने जाते हैं, फिर भी कई शेर यहां भी बेमौत मरते हैं।

शेर से जुड़ी दिलचस्प बातें

शेर से जुड़ी दिलचस्प बातें

गुजरात में ​पाए जाने वाले शेर हालांकि, अफ्रीकी शेरों की तुलना में ज्यादा हट्टे-कट्टे नहीं होते। अफ्रीका के देशों में जंगल ज्यादा हैं और वहां शिकार भी बहुूत मिल जाता है, इसलिए वहां के शेर ज्यादा तंदरुस्त होते हैं। जबकि, एशियाई शेरों का रंग अफ्रीकी व ब्राजीलियन शेरों की तुलना में ज्यादा गहरा होता है।

कितना होता है शेर में वजन?

कितना होता है शेर में वजन?

एक शेर (Lion) का वजन 190 किलोग्राम तक होता है और शेरनी का वजन 130 किलोग्राम तक होता है। हालांकि, गुजरात में कुछ शेरों का वजन 200 किलो तक भी पाया गया है। गुजरात में शेर की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घण्टा तक मानी गई है।

कितने तरह के होते हैं शेर?

कितने तरह के होते हैं शेर?

दुनिया में खासकर दो तरह के शेर देखे जा सकते हैं- एक एशियाटिक और दूसरे अफ्रीकन। इनके अलावा कुछ मटमैले या सफेद रंग के शेर भी मिलते हैं। मगर, ज्यादातर शेर की दो प्रजाति होती हैं- एशियाई और अफ्रीकन।

हाथी का शिकार अकेले नहीं कर पाते

हाथी का शिकार अकेले नहीं कर पाते

कहा जाता है कि शेर जंगल के राजा होते हैं। शेर अक्सर अकेले ही शिकार करते हैं। मगर, हाथी जैसे बड़े जानवर का शिकार शेर अकेले नहीं करता है। वो उनका शिकार झुंड में करता है। एक फैक्ट यह भी है कि, शिकार शेरनी करती है और शेर का कार्य परिवार की रक्षा करना होता है।

कितनी दूर तक सुना सकते हैं दहाड़?

कितनी दूर तक सुना सकते हैं दहाड़?

हट्टा-कट्टा शेर जंगल में सुबह-सुबह दहाड़े तो उसकी आवाज 7 किलोमीटर दूर तक आराम से सुनी जा सकती है। शेर की सुनने की क्षमता भी बहुत होती है। ऐसा कहते हैं कि वो एक मील दूर से भी अपने शिकार की आवाज़ सुन लेते हैं।

कई देशों के राष्ट्रीय पशु हैं शेर

कई देशों के राष्ट्रीय पशु हैं शेर

भारत में बाघ राष्ट्रीय पशु है। लेकिन शेर भी कई देशों का राष्ट्रीय पशु है। जिनमें- अल्बानिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, इथोपिया, नीदरलैंड इत्यादि शामिल हैं। ऐसा कहा जाता है कि, 1972 से पहले शेर भारत का राष्ट्रीय पशु था, लेकिन बाद में बाघ को राष्ट्रीय पशु बना दिया गया।

अशोक के स्तम्भ में भी हैं शेर

अशोक के स्तम्भ में भी हैं शेर

भारत का राष्ट्रीय चिन्ह जो कि अशोक स्तम्भ है, उसमें शेर का चित्र अंकित है। शेरों के बारे में यह भी अच्छी बात है कि, ज्योतिष शास्त्र में सिंह नामक राशि होती है। इस राशि के नाम वाले लोगों को काफी भाग्यशाली माना जाता है।

शेर और शेरनी की बड़ी पहचान यह है

शेर और शेरनी की बड़ी पहचान यह है

नर शेर की गर्दन पर बाल होते हैं, लेकिन मादा की गर्दन पर बाल नहीं होते हैं। गुजरात में शेरनियां नदी पार भी कर लेती हैं और आपको शायद पता ना हो, तो बता दें शेर तैर भी सकता है। सामान्यत: इन्हें पानी में जाने से डर ही लगता है।

क्या होता है शेर का पसंदीदा शिकार

क्या होता है शेर का पसंदीदा शिकार

शेर के पसंदीदा शिकारों में हिरण, नीलगाय जैसे पशु आते हैं। शेर बारहसिंगा, गाय और अपने से छोटे मांसाहारी पशु को भी चाव से खाते हैं। वैसे तो शेर को जंगल का राजा कहते हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि शेर घास के मैदानों में रहते हैं।

बिल्ली की प्रजाति में आते हैं शेर

बिल्ली की प्रजाति में आते हैं शेर

शेर बिल्ली की प्रजाति में आता है। इन्हें बिग कैट कहा जाता है। शेर का वैज्ञानिक नाम पैंथेरा लियो (Panthera Leo) है। बड़ी रोचक बात यह भी है कि दुनिया मे शेरों से ज्यादा उनकी मूर्तिया हैं।

एक दिन में कितने समय तक सोता है?

एक दिन में कितने समय तक सोता है?

शेर दिन में ज्यादातर समय सोकर गुजारता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शेर पूरे 20 घण्टे सोता है। ऐसा भी कहा जाता है कि, शेर एक बार में 50 से अधिक बार शेरनी से संभोग करते हैं।

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    कितने साल जी सकता है शेर?

    कितने साल जी सकता है शेर?

    शेर सामान्यत: डेढ़ दशक तक जीते हैं। स्वस्थ शेर की उम्र 16 से 20 वर्ष होती है। दुख की बात यह है कि, गुजरात में शेरों की मृत्यु काफी पहले हो जाती है।

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