Rajkot Spice Factory Raid: 1.11 करोड़ का मिलावटी सामान जब्त, क्या आपकी थाली में भी है जहर? कैसे करें पहचान?
Rajkot Spice Factory Raid: गुजरात के राजकोट जिले में खाद्य सुरक्षा की एक बड़ी कार्रवाई में FDCA अधिकारियों ने गोंडल के भीमवाड़ी इलाके की एक मसाला फैक्ट्री पर छापा मारकर 1.11 करोड़ रुपये से ज्यादा का संदिग्ध मिलावटी सामान जब्त किया है। यह घटना सिर्फ एक स्थानीय छापा नहीं, बल्कि राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा है जो आम उपभोक्ताओं के थाली में पहुंचने वाले मसालों की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करती है।
17 जून को FDCA की राजकोट इकाई ने फैक्ट्री पर दबिश दी। निरीक्षण के दौरान बिना पैकेट वाले धनिया पाउडर, मक्का पाउडर, मिर्च पाउडर और हल्दी पाउडर के नमूने लिए गए। कुल 35,527 किलोग्राम सामान जब्त हुआ, जिसमें 6,766 किलो धनिया-मक्का पाउडर (8.22 लाख रुपये) और 28,671 किलो मिर्च-हल्दी पाउडर (1.02 करोड़ रुपये) शामिल है। नमूनों को लैब में जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई होगी।

मिलावट क्यों होती है? मुनाफे का लालच या सस्ता उत्पादन?
मसाला उद्योग भारत की पहचान है। हम दुनिया के सबसे बड़े मसाला निर्यातक देशों में शामिल हैं, लेकिन घरेलू बाजार में मिलावट की समस्या पुरानी है। फैक्टरियां अक्सर सस्ते विकल्पों का सहारा लेती हैं, जैसे रंग बढ़ाने के लिए केमिकल डाईज, वजन बढ़ाने के लिए स्टार्च, चावल के कण, ईंट का पाउडर या अन्य अनाज। हल्दी में लेड क्रोमेट, मिर्च में सडन रेड जैसे रंग मिलाए जाते हैं।
आम मिलावट के तरीके क्या हैं?
- हल्दी पाउडर: मेटानिल येलो, चॉक पाउडर या सिंथेटिक कलर।
- मिर्च पाउडर: ईंट पाउडर, स्टार्च या केप्सिकम स्टेम्स।
- धनिया पाउडर: अन्य पत्तियों या अनाज का मिश्रण।
- कुल मिलाकर: वजन बढ़ाने और रंग चमकाने के लिए गैर-खाद्य पदार्थ।
ये मिलावटें उत्पादन लागत कम करती हैं और मुनाफा बढ़ाती हैं, लेकिन उपभोक्ता स्वास्थ्य को चुपचाप नुकसान पहुंचाती हैं।
स्वास्थ्य पर क्या असर? छोटी-छोटी मात्रा भी खतरनाक
नियमित रूप से मिलावटी मसाले खाने से तत्काल तो पेट दर्द, उल्टी, डायरिया हो सकता है, लेकिन लंबे समय में खतरा ज्यादा गंभीर है। लेड क्रोमेट जैसे पदार्थ लेड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं, खासकर बच्चों में IQ प्रभावित होता है। सिंथेटिक डाईज कैंसर, लीवर-किडनी डैमेज और एलर्जी ट्रिगर कर सकते हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि मिलावटी मसालों में हेवी मेटल्स और कार्सिनोजेनिक कंपाउंड्स पाए जाते हैं।
हाल के सालों में MDH और Everest जैसे ब्रांड्स पर एथिलीन ऑक्साइड (कैंसरकारी पेस्टिसाइड) को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैन और चेतावनियां आई हैं। दिल्ली, गुजरात और अन्य जगहों पर भी ऐसी छापों की खबरें आती रहती हैं। 2024 में दिल्ली में 15 टन फेक मसाले जब्त हुए थे जिनमें वुड डस्ट और रॉटन राइस मिले थे। गुजरात में भी नडियाद, मेहसाणा जैसी जगहों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई है।
गुजरात सरकार की मुहिम: जीरो टॉलरेंस
गुजरात FDCA लगातार राज्यव्यापी अभियान चला रहा है। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने साफ कहा है कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
अभियान के प्रमुख पहलू:
- नियमित निरीक्षण और सैंपलिंग।
- लैब टेस्टिंग को तेज करना।
- FSSAI लाइसेंस की अनिवार्यता और अनुपालन।
- जागरूकता अभियान।
यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को याद दिलाती है कि ब्रांडेड या लोकल, दोनों पर नजर रखनी जरूरी है।
उपभोक्ता क्या करें? घरेलू टेस्ट और सावधानियां
- 1. पैकेट चेक करें: FSSAI लाइसेंस नंबर, expiry date, ingredients देखें।
- 2. रंग टेस्ट: हल्दी में पानी डालकर देखें, अगर रंग तेजी से फैले तो संदिग्ध।
- 3. घुलनशीलता: मिर्च पाउडर पानी में डालें, अगर रंग अलग निकले तो मिलावट।
- 4. खरीदारी: विश्वसनीय ब्रांड्स या प्रमाणित विक्रेताओं से लें। ढीले मसाले से बचें।
- 5. शिकायत: संदेह हो तो FSSAI हेल्पलाइन या ऐप पर रिपोर्ट करें।
बड़े सवाल: मिलावट पर पूर्ण विराम कैसे?
- कड़े कानून: FSSAI नियमों का सख्त अमल और भारी जुर्माना।
- टेक्नोलॉजी: NIR स्पेक्ट्रोस्कोपी जैसी तेज जांच विधियां।
- जागरूकता: स्कूलों और मीडिया के जरिए शिक्षा।
राजकोट की यह घटना चेतावनी है। मसाले हमारी रसोई की जान हैं, लेकिन अगर वे जहर बन जाएं तो समस्या गंभीर हो जाती है। FDCA जैसे संगठनों की मुहिम सराहनीय है, लेकिन उपभोक्ता के रूप में हमारी सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी। तब तक, अपनी थाली को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी हर एक की है। मिलावट मुक्त भारत की दिशा में यह छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।
(PTI इनपुट)













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