क्या संवेदनशीलता अच्छे राजनेताओं की निशानी नहीं? विजय रूपाणी के इस्तीफे के बाद बेटी राधिका का सवाल
गांधीनगर, 14 सितंबर। गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में मुख्यमंत्री का चेहरा बदल गया है। गुजरात के पूर्व सीएम विजय रूपाणी के इस्तीफा देने के बाद भूपेंद्र पटेल को नया मुख्यमंत्री बनाया गया है। इस बीच लंदन में रह रहीं विजय रूपाणी की बेटी राधिका रूपाणी ने पिता के इस्तीफे के बाद फेसबुक पर भावुक पोस्ट शेयर किया जो अब चर्चा का विषय बन गया है। राधिका ने अपने पोस्ट में पूछा है कि क्या सिर्फ कठोर छवि ही नेता की पहचान होती है?

लंदन में रह रहीं राधिका भाजपा आलाकमान के फैसले से बेहद नाराज हैं, उन्होंने पिता के इस्तीफे को लेकर पार्टी पर सवला उठाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सितंबर 2002 में गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर पर हुए आतंकी हमले के दौरान पीएम मोदी के परिसर में आने से पहले ही मेरे पिता पहले दर्शन करने गए थे। पोस्ट का शीर्षक 'बेटी की आंखों से विजय रूपाणी' में राधिका ने लिखा, बहुत कम लोग जानते हैं कि तौकता (चक्रवात) और कोरोना के बड़े खतरों के दौरान, मेरे पिता रात 2.30 बजे तक काम करते थे वह सीएम डैशबोर्ड और फोन कॉल्स के जरिए बंदोबस्त में जुटे रहते थे।
उन्होंने आगे लिखा, 'मेरे विचार से मेरे पिता का कार्यकाल 1979 मोरबी बाढ़, अमरेली बादल फटना, कच्छ भूकंप, स्वामीनारायण मंदिर आतंकवादी हमले से शुरू हुआ था। गोधरा की घटना, बनासकांठा की बाढ़, तौकते और यहां तक कि कोविड के दौरान भी मेरे पिता ने कड़ी मेहनत से काम किया।' राधिका ने आगे कहा कि क्या राजनेताओं को संवेदनशील और कृपालु नहीं होना चाहिए? क्य यह जरूरी गण नहीं जो हमारे नेताओं में होना चाहिए? राधिका ने अपने पोस्ट में पिता विजय रूपाणी के द्वारा सीएम के तौर पर लिए गए फैसलों पर कहा, उन्होंने कड़े कदम उठाए हैं और जमीन हथियाने वाला कानून, "लव जिहाद", गुजरात आतंकवाद नियंत्रण और संगठित अपराध कानून (गुजसीटीओसी), सीएम डैशबोर्ड जैसे फैसले इस बात के सबूत हैं। क्या कठोर चेहरे का भाव ओढ़े रहना...एक नेता की निशानी है?
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