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'7-8 माह की गर्भवती महिला को आंखों के सामने मरते हुए देखा', मोरबी पुल पर चाय बेचने वाले ने बताई आंखोंदेखी

मोरबी पुल हादसे को लेकर कुछ प्रत्यक्षदर्शी भी सामने आए हैं, जिन्होंने बताया है कि पुल गिरने के बाद का मंजर कितना भयावह था।
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मोरबी में पुल हादसा (morbi bridge collapse latest news): गुजरात के मोरबी में रविवार को एक बेहद दुखद हादसा हो गया। यहां मच्छु नदी पर बना सस्पेंशन पुल अचानक गिर गया और इस हादसे में अभी तक 130 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है। हादसे के बाद से ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना के जवान, वायु सेना, फायर विभाग और प्रशासन की टीमें लोगों को बचाने में जुटी हैं, जिसमें अब तक करीब 177 लोगों को बचाया गया है। बताया जा रहा है कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ने की आशंका है। वहीं, हादसे को लेकर कुछ प्रत्यक्षदर्शी भी सामने आए हैं, जिन्होंने बताया है कि पुल गिरने के बाद का मंजर कितना भयावह था।

'मैं पूरी रात नहीं सोया, लोगों को बचाने में लगा रहा'

'मैं पूरी रात नहीं सोया, लोगों को बचाने में लगा रहा'

पुल के पास चाय बेचने वाले एक शख्स ने हादसे को लेकर बताया, 'मैं हर रविवार को यहां चाय बेचने आता हूं। हादसे के बाद लोग पुल के केबल से लटके हुए थे और फिर फिसलकर नीचे गिरने लगे। मैं पूरी रात नहीं सोया और रातभर लोगों को बचाने में मदद की। जब मैंने 7-8 महीने की एक गर्भवती महिला को अपनी आंखों के सामने मरते हुए देखा तो मेरा दिल दहल गया। अपने पूरे जीवन में मैंने इतना भयानक हादसा नहीं देखा।'

'मैंने अपनी गाड़ी भी बचाव टीम को दे दी'

'मैंने अपनी गाड़ी भी बचाव टीम को दे दी'

वहीं, एक और प्रत्यक्षदर्शी हसीना नाम की महिला ने बताया, 'हादसा कितना भयावह था, मैं शब्दों में बता भी नहीं सकती। मरने वालों में बहुत सारे बच्चे भी थे। मैंने लोगों की मदद इस तरह की, जैसे वो मेरे अपने परिवार के लोग हों। लोगों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सके, इसके लिए मैंने अपनी गाड़ी भी बचाव टीम को दे दी। प्रशासन की टीमें तुरंत लोगों को बचाने में जुट गईं थी। ऐसा हादसा कभी सोचा भी नहीं था।'

'20 नाव रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटीं'

'20 नाव रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटीं'

हादसे को लेकर राजकोट के चीफ फायर ऑफिसर इलेश खेर ने बताया, 'राजकोट फायर ब्रिगेड की तरफ से बचाव अभियान में 6 नाव, 6 एंबुलेंस, 2 रेस्क्यू वैन और करीब 60 जवानों को लगाया गया है। बड़ौदा, अहमदाबाद, गोंडल, जामनगर और कच्छ से लाईं गई कुल 20 नाव रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। साथ ही 15 एंबुलेंस भी लोगों की मदद के लिए यहां लगी हैं।'

ये भी पढ़ें- 'मोरबी ब्रिज पर 20-25 लोग जाते थे, इस बार 400 भेजे गए', अधिकारी का दावा- बिन सर्टिफिकेट के ही खोला गया पुलये भी पढ़ें- 'मोरबी ब्रिज पर 20-25 लोग जाते थे, इस बार 400 भेजे गए', अधिकारी का दावा- बिन सर्टिफिकेट के ही खोला गया पुल

'गोताखोरों को गहराई में साफ दिखने में समस्या'

'गोताखोरों को गहराई में साफ दिखने में समस्या'

बचाव अभियान में एनडीआरएफ की टीमें भी जुटी हुई हैं। एनडीआरएफ के कमांडेंट वीवीएन प्रसन्ना कुमार ने बताया, 'हम लोगों ने स्थानीय प्रशासन, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, सेना, नौसेना, वायुसेना और एनडीआरएफ के बीच पूरे इलाके को तीन भागों में बांट दिया है। हमें अंदेशा है कि कुछ लोग ढहे पुल के नीचे भी फंसे हो सकते हैं, जिसके लिए हम ऐसे गोताखोरों की मदद ले रहे हैं, जो गहरे पानी में उतर सकें। हमारे सामने केवल एक चुनौती ये है कि यहां पानी गंदा है, जिसकी वजह से हमारे गोताखोरों को गहराई में साफ दिखने में समस्या आ रही है।'

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English summary
Morbi Bridge Collapse: Eyewitness Tea seller Told About incident
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