गुजरात में मंगल ग्रह जैसे बैक्टीरिया, भारतीय और अमेरिकी वैज्ञानिक खोज करने कच्छ के रण आएंगे, क्या मिला अब तक?

कच्छ। पृथ्वी पर मंगल ग्रह जैसे बैक्टीरिया मौजूद हैं। ये बैक्टीरिया अभी कहीं दूर नहीं बल्कि, भारतीय राज्य गुजरात के कच्छ डेजर्ट में पाए गए हैं। वैज्ञानिक इन तक पहुंचने के लिए उत्सुक हैं। इसी महीने के मध्य से रणोत्सव के लिए विख्यात सफेद रण में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के साथ भारतीय शोधकर्ताओं का शोध शुरू होने जा रहा है। इस शोध का उद्देश्य मंगल ग्रह पर मिले हाईपर सेलाइन वॉटर में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और सफेद रण (कच्छ) के नमक में मौजूद बैक्टीरिया के बीच समानता की पड़ताल करना है।

अमेरिकी वैज्ञानिकों के साथ होगा इंटरनेशनल रिसर्च

अमेरिकी वैज्ञानिकों के साथ होगा इंटरनेशनल रिसर्च

गुजरात की कच्छ यूनिवर्सिटी के भू-शास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. महेश ठक्कर सफेद रण में हो रहे शोधकार्यों का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि, हमारी टीम कच्छ के 'माता के मढ' में मिले मंगल ग्रह पर पाए जाने वाले जेरोसाइट खनिज को लेकर शोध करेगी। उन्होंने कहा कि, यह धरती अपनी सतह और भू-गर्भ में कई रहस्य समेटे हुए है। 2020 में यहां शोधकर्ता जेरोसाइट की पहचान कर चुके हैं। जेरोसाइट खनिज अब तक मंगल ग्रह पर ही देखा गया है।

कई रहस्य समेटे है गुजरात के कच्छ की भूमि

कई रहस्य समेटे है गुजरात के कच्छ की भूमि

मंगल ग्रह पर पाया जाने वाला खनिज गुजरात के कच्छ की भूमि में मौजूद बैक्टीरिया से कितना मिलता-जुलता है, नया शोध ऐसी कई बातों की जांच करेगा। डीएनए टेस्ट-मिलान आदि तकनीक से इस गुत्थी को जानने-समझने का प्रयास किया जाएगा, यही वजह है कि, अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के साइंटिस्ट्स कच्छ पहुंच रहे हैं। कच्छ यूनिवर्सिटी के भू-शास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. महेश ठक्कर ने कहा कि, हम आगे जो करने वाले हैं..वह कच्छ यूनिवर्सिटी, एमिटी यूनिवर्सिटी और नासा की संयुक्त परियोजना है।

यहां मिल चुकीं हजारों बरस पुरानी चीजें

यहां मिल चुकीं हजारों बरस पुरानी चीजें

ठक्कर के मुताबिक, इस शोध को कच्छ में लूणा के क्रेटर लेक, धोलावीरा, माता के मढ सहित 8 साइट्स पर किया जाएगा। धोलावीरा वही जगह है, जहां हजारों साल पहले के ऐतिहासिक अवशेष मिल चुके हैं। वहां भारतीय शोधकर्ता अब तक कई चीजें खोज चुके हैं। और, ताजा रिसर्च जो होने जा रहा है वो इस बात को लेकर है कि, मंगल ग्रह पर सॉल्ट क्रिस्टल मिले हैं, जो सेलाइन वॉटर से बनते हैं..वैसे कच्छ में हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि, मंगल ग्रह में कुछ बैक्टीरिया कभी न खत्म होने वाले हो सकते हैं। वहीं, कच्छ के रण में भी कुछ वैसे ही सॉल्ट क्रिस्टल नजर आते हैं। इसलिए, नासा के वैज्ञानिकों की टीम कच्छ आ रही है। वह टीम भारतीयों के साथ मिलकर 'माता के मढ' में मिले मंगल ग्रह पर पाए जाने वाले तत्व को लेकर शोध करेगी।

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