Gujrat UCC Bill: गुजरात में शादी-तलाक से लिव-इन तक, जानिए कौन-कौन से नियम बदलें?

Gujarat UCC Bill 2026: गुजरात विधानसभा ने 'गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026' को बहुमत से पारित कर दिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात ऐसा दूसरा राज्य बन गया है, जिसने यूसीसी लागू करने की दिशा में अहम कदम उठाया है।

182 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी के पास 161 सीटों का प्रचंड बहुमत होने के कारण यह विधेयक आसानी से पारित हो गया। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कानून के प्रावधान राज्य की अनुसूचित जनजातियों (ST) पर लागू नहीं होंगे।

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UCC Bill 2026 के क्या हैं प्रमुख प्रावधान?

यह विधेयक राज्य में शादी-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लागू करने का प्रस्ताव करता है। हालांकि, इसके प्रावधान अनुसूचित जनजातियों (ST) पर लागू नहीं होंगे।

1. शादी का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन

विधेयक में विवाह और उत्तराधिकार से जुड़े कई कड़े नियम प्रस्तावित किए गए हैं। राज्य में अब एक से अधिक शादी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। किसी भी व्यक्ति को शादी के लिए मजबूर करने या दबाव डालने पर 7 साल की कैद की सजा का प्रावधान है।

2. लिव-इन रिलेशनशिप भी कानून के दायरे में

इस बिल के सबसे चर्चित प्रावधानों में से एक लिव-इन संबंधों को लेकर है। अब लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी मान्यता के साथ रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। यदि रिश्ता खत्म होता है, तो इसकी जानकारी भी देनी होगी। इतना ही नहीं लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध संतान का दर्जा दिया जाएगा। नए कानून के तहत अब गुजरात में किसी भी लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।

यदि कोई कपल लिव-इन खत्म करता है, तो इसकी जानकारी भी संबंधित अधिकारियों को देनी होगी। लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा होने वाले बच्चे को उस कपल का वैध बच्चा माना जाएगा और उसे उत्तराधिकार के सभी अधिकार प्राप्त होंगे। यदि कोई पुरुष अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़ देता है, तो वह महिला अदालत के माध्यम से गुजारा भत्ता (Maintenance) मांगने की हकदार होगी।

3. तलाक के लिए बने कड़े नियम

अदालत के आदेश के बिना किया गया कोई भी तलाक अवैध और दंडनीय होगा। इसके लिए 3 साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही तलाक के बाद बिना किसी शर्त के दोबारा शादी करने की अनुमति दी गई है। विधेयक के अनुसार, सभी विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।

ऐसा नहीं करने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अदालत की प्रक्रिया के बाहर दिया गया कोई भी तलाक अवैध और दंडनीय होगा। इसके लिए 3 साल तक की जेल हो सकती है।

4. 'हलाला' जैसी कुप्रथाओं पर रोक

इस विधेयक में 'हलाला' जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने का भी प्रावधान किया गया है। यह बिल 'हलाला' जैसी प्रथाओं पर भी रोक लगाता है और तलाक के बाद बिना किसी शर्त के दोबारा शादी करने को कानूनी मान्यता देता है।

UCC Bill पर सरकार का क्या कहना है? क्या होगा इसका असर?

सदन में बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यूसीसी देश के महत्वपूर्ण सुधारों में से एक है, जिसे लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है। सीएम ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी समय-समय पर यूसीसी की जरूरत पर जोर दिया है, खासकर महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के संदर्भ में।

इस कानून के लागू होने के बाद गुजरात में अलग-अलग समुदायों के पर्सनल लॉ की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी। इससे शादी, तलाक, विरासत और लिव-इन जैसे मामलों में एकरूपता आएगी और कानूनी प्रक्रियाएं अधिक स्पष्ट होंगी। गुजरात में यूसीसी बिल के पारित होने के बाद अब इसकी लागू करने की प्रक्रिया और इसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों पर देशभर की नजरें टिकी हैं।

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