गुजरात हाईकोर्ट ने ठुकराई लव जिहाद-रोधी कानून की धारा-5 पर रोक लगाने की मांग, सरकार को झटका
गांधीनगर। "लव जिहाद-रोधी" कानून के मुद्दे पर गुजरात सरकार को हाईकोर्ट से फिर झटका लगा है। हाईकोर्ट ने लव-जिहाद एक्ट-5 पर से रोक हटाने की राज्य सरकार की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। इससे पहले हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते "लव जिहाद-एक्ट" की महत्वपूर्ण धाराओं (3,4,5 और 6) पर रोक लगा दी थी। इसी स्टे को हटाने के लिए हाईकोर्ट में फिर से सुनवाई हुई। जिसमें हाईकोर्ट ने धारा-5 पर लगी रोक को हटाने के लिए सरकारी वकील द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें कहा गया था कि नियमानुसार धर्मांतरण के लिए कलेक्टर की अनुमति की आवश्यकता है। वहीं, सरकार की इस मांग का याचिकाकर्ता ने विरोध किया था।

लव-जिहाद कानून पर हाईकोर्ट में फिर सुनवाई
हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ एवं न्यायाधीश बिरेन वैष्णव की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि कानून में पहले विवाह शब्द का उल्लेख ही नहीं था। इसे बाद में जोड़ा गया। इसलिए कोर्ट ने विवाह से होने वाले धर्मांन्तरण के लिए धारा-5 के तहत अथॉरिटी से पहले मंजूरी लेने के प्रावधान पर रोक लगाई है। यदि कोई अविवाहित हो और वह स्वेच्छा से धर्मान्तरण करने का इच्छुक हो तो इसके लिए आवश्यक पूर्व मंजूरी ली जा सकती है। वहीं, गुजरात सरकार ने इसे तर्कसंगत नहीं बताते हुए इस पर रोक हटाने की मांग की, हालांकि हाईकोर्ट अपने रूख पर कायम रहा और सरकार की मांग ठुकरा दी।

गुजरात सरकार को हाईकोर्ट से लगा झटका
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने दलील दी थी कि हाईकोर्ट के रोक लगाने के परिणामस्वरूप जो व्यक्ति स्वेच्छा से धर्मान्तरण करना चाहता हो तो उसे पूर्व मंजूरी लेने की जरूरत ही नहीं होगी। जो पहले के कानून में जरूरी था। उन्होंने कोर्ट में बताया कि, सरकार ने अंतरधर्मी विवाह पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। विवाह यदि कानूनी तो भी मंजूरी लेने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट में जजों ने सरकारी पक्ष की दलीलें नहीं मानीं। आखिर में सरकार को इस पर झटका लगा।

पिछले हफ्ते हाईकोर्ट ने संशोधनों पर रोक लगा दी थी
इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर पिछले हफ्ते फैसला सुनाया था। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने "गुजरात धर्म स्वतंत्रता अधिनियम (संशोधन) अधिनियम-2021" कानून पर रोक लगाने की मांग की थी। उस याचिका पर फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने इस कानून की धारा-3,4,5 और 6 के संशोधनों को लागू करने पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने कहा कि, पुलिस थाने में एफआईआर तब तक दर्ज नहीं हो सकती जब तक ये साबित नहीं हो जाता कि शादी जोर-जबरदस्ती से और लालच देकर की गई है।












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