Sat Fera Samuh Lagna Yojana:बेटी की शादी में यूं मदद कर रही है गुजरात सरकार

गांधीनगर: भारतीय सामाजिक व्यवस्था में विवाह समारोहों पर पानी की तरह पैसे बहाए जाते हैं। इस तामझाम की वजह से मध्यमवर्गीय परिवारों तक की आर्थिक कमर टूट जाती है। समाज की इसी परंपरा से आम लोगों को निजात दिलाने के लिए गुजरात सरकार सामूहिक विवाह कार्यक्रम को बढ़ावा दे रही है। गुजरात सरकार इसके लिए 'माई रमाबाई सात फेरा समूह लगन योजना' चला रही है। 2012 से चल रही इस योजना के तहत राज्य सरकार नव दंपति को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। साथ ही सामूहिक विवाह का आयोजन करने वाले संगठन को भी वित्तीय मदद प्रदान करती है। अब तक हजारों नव दंपति को इस योजना का लाभ मिल चुका है।

So far more than 6 thousand families have got the benefit of Mai Ramabai Sat Fera Samuh Lagna Yojana of Gujarat Government

'माई रमाबाई सात फेरा समूह लगन योजना'
'माई रमाबाई सात फेरा समूह लगन योजना' का मूल उद्देश्य शादी में होने वाले गैरजरूरी खर्चों पर लगाम लगाना है। इस योजना के लाभार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वह गरीबी रेखा के नीचे हों। उनकी उम्र शादी के लायक हो चुकी हो। इस योजाना के तहत नव दंपति को सरकार की ओर से 12,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है। साथ ही आयोजकों के लिए प्रति जोड़े 3,000 रुपये की राशि निर्धारित की गई है।

6 हजार जोड़ों से अधिक को मिल चुका है लाभ
'सात फेरा समूह लगन योजना' के तहत अबतक गुजरात सरकार लगभग 6 हजार जोड़ों को सहायता राशि का भुगतान कर चुकी है। जिसमें 6 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि दी चुकी है। जबकि, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सरकार की ओर से वित्त वर्ष 2021-22 में 1,770 और वित्त वर्ष 2022-23 में 1,000 जोड़ों को यह सहायता प्रदान करने का लक्ष्य तय किया गया है।

माई रमाबाई सात फेरा सामूहिक विवाह योजना के नाम से जानी जाने वाली यह योजना गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए वरदान साबित हुई है। मसलन, ठाकोरभाई परमार ने कहा कि,

हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी। महंगाई में एक विवाह समारोह के लिए एक-दो लाख का इंतजाम करना मुश्किल था। लेकिन, हमने अपनी बेटी की शादी सोसाइटी की शादी में करवा कर महंगे खर्चों से छुटकारा पा लिया। इसके अलावा हमारे परिवार के विवाह के भारी बोझ और गलत व्यवसायिक खर्चों से बचाने से खुशी-खुशी राहत मिली है।

सात फेरा समूह विवाह के लिए वित्तीय सहायता सीधे दुल्हन के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। इस योजना में भावनगर, पंचमहल और वलसाड जिलों के लोगों को सबसे ज्यादा लाभ मिला है। भावनगर की सिद्धिबेन ने कहा कि

हमारी शादी परिवार की रजामंदी से एक सामूहिक विवाह में हुई थी। हमारा परिवार अनुचित आर्थिक बोझ से मुक्त हो गया, क्योंकि यह विवाह मात्र 5 हजार की लागत से संपन्न हुआ था।

यह योजना समाज में दिखावे वाले खर्च की व्यवस्था को दूर करने और वर-वधू के परिवार वालों को कर्ज में डूबने से बचाने के लिए जिम्मेदारी निभाने की योजना है। इसके अलावा सरकार की कुवरबैनु मामेरु योजना का अतिरिक्त लाभ भी नव दंपति को मिलता है। (तस्वीर-सांकेतिक)

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