GUJARAT: 20 सीटों पर विधायकों के बेटे लड़ रहे चुनाव, मैदान में कांग्रेस-भाजपा का 'वंशवाद'
gujarat assembly elections 2022: अगले महीने होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव से जुड़ी कई बातें ऐसी हैं, जिनसे लोगों को ताज्जुब हो रहा है। यहां चुनाव में कहीं एक ही परिवार के लोग दो दलों का हिस्सा हैं, तो कहीं हार-जीत का गणित वंशवाद से जुड़ा है। चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस ने कुल 182 निर्वाचन क्षेत्रों में से कम से कम 20 सीटों पर मौजूदा और पूर्व विधायकों के बेटों को एक साथ मैदान में उतारा है। विपक्षी कांग्रेस ने ऐसे 13 और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 7 उम्मीदवार खड़े किए हैं।

20 सीटों पर उतारे गए मौजूदा और पूर्व विधायकों के बेटे
जिन विधानसभा क्षेत्रों में किसी जमे हुए उम्मीदवार के विकल्प का अभाव है, वहां ये देखने में आ रहा है कि उक्त नेता के बेटे चुनाव लड़ रहे हैं। यहां एक आदिवासी नेता और 10 बार के कांग्रेस विधायक मोहनसिंह राठवा ने अपनी पार्टी के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों को तोड़ दिया और पिछले महीने भाजपा में शामिल हो गए, तो सत्तारूढ़ दल ने उन्हें छोटा उदयपुर सीट से उनके बेटे राजेंद्रसिंह राठवा को मैदान में उतारा। अनुसूचित जनजाति (एसटी) उम्मीदवारों के लिए आरक्षित क्षेत्र में राजेंद्रसिंह और कांग्रेस के संग्रामसिंह राठवा के बीच सीधा मुकाबला होगा, जो पूर्व रेल मंत्री नारन राठवा के पुत्र हैं, वहां दोनों ही चुनाव में पदार्पण कर रहे हैं।
अहमदाबाद जिले की साणंद सीट से मौजूदा विधायक कानू पटेल कांग्रेस के पूर्व विधायक करणसिंह पटेल के बेटे हैं। पटेल वरिष्ठ 2017 में भाजपा में शामिल हो गए, जिससे उनके बेटे के साणंद से फिर से चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया। बीजेपी ने उसी सीट से कानू पटेल को उतारा है। वहीं, थसरा से भाजपा के उम्मीदवार, योगेंद्र परमार, 2 बार के विधायक रामसिंह परमार के पुत्र हैं, जिन्होंने 2017 में पार्टी छोड़ने से पहले 2007 और 2012 में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी, लेकिन भाजपा के एक उम्मीदवार से हार गए थे।

पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला के बेटे चुनाव लड़ रहे
अहमदाबाद की दानिलिमदा सीट से कांग्रेस के 2 बार के विधायक शैलेश परमार पूर्व विधायक मनुभाई परमार के बेटे हैं। आगामी चुनाव के लिए कांग्रेस ने एक बार फिर शैलेश पर भरोसा जताया है। ऐसे ही एक अन्य प्रतियोगी पूर्व दो बार के विधायक महेंद्रसिंह वाघेला हैं, जो गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला के पुत्र हैं। महेंद्रसिंह पिछले महीने कांग्रेस में फिर से शामिल हुए थे और पार्टी ने उन्हें बायड सीट से मैदान में उतारा था। उन्होंने 2012 और 2017 के बीच कांग्रेस विधायक के रूप में निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, 2019 में भाजपा में चले गए, और पिछले महीने अपनी मूल पार्टी-कांग्रेस में लौट आए।

पूर्व मुख्यमंत्री अमरसिंह के बेटे भी चुनाव लड़ रहे
कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री अमरसिंह चौधरी के बेटे तुषार चौधरी को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट बारडोली से उतारा है। उन्होंने 2004-09 के बीच मांडवी और 2009 से 2014 तक बारडोली के सांसद के रूप में कार्य किया। पोरबंदर सीट से भाजपा के पूर्व सांसद (दिवंगत) विठ्ठल रडाडिया के बेटे जयेश रडाडिया ने 2009 में धोराजी विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव जीता था। उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में जेतपुर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की। जयेश और उनके पिता ने 2013 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। 2017 के चुनावों में रडाडिया जूनियर ने जेतपुर से बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की थी। वह विजय रूपानी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट में मंत्री बने। बीजेपी ने उन्हें अगले महीने होने वाले चुनाव के लिए जेतपुर से मैदान में उतारा है।

'दबंग' नेताओं का रहता है प्रभाव
सियासत के जानकारों की मानें तो अमूमन हर राजनीतिक दलों में कई ऐसे परिवार हैं जो राजनीति को अपनी विरासत मानते हैं। ऐसे परिवार अपनी-अपनी सीटों पर भारी प्रभाव डालते हैं और चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। पार्टियों को ऐसे नेताओं का विकल्प नहीं मिल रहा है और इसलिए वे अपने करीबियों को टिकट देने के लिए मजबूर हैं। कुछ मामलों में 'दबंग' नेता होते हैं, जिनके खिलाफ उनके राजनीतिक दलों का कोई अन्य नेता खड़ा होने की हिम्मत नहीं करता। वे लगातार जीतते रहते हैं और उन्हें टिकट इसलिए दिया जाता है क्योंकि पार्टियां विकल्प खोजने में विफल रहती हैं। यहां तक कि जब उन्हें बदला जाता है, तो फिर उनके बेटे, बेटियां या पत्नियां होती हैं।"

गुजरात में कब डाले जाएंगे वोट
गुजरात में 1 और 5 दिसंबर को 2 चरणों में मतदान होगा। उसके बाद वोटों की गिनती 8 दिसंबर को होगी। चुनाव आयोग के मुताबिक, गुजरात में पहले चरण में 89 सीटों मतदान होंगे। वहीं दूसरे चरण में 93 सीटों पर मतदान कराया जाएगा।
गुजरात में कुल 182 विधानसभा सीटें हैं। बहुमत के लिए 92 सीटों की जरूरत होती है। 2017 के विधानसभा चुनाव बीजेपी को 99, कांग्रेस को 77 सीटें मिलीं थी, जबकि छह सीटें निर्दलीय और अन्य के खाते में गई थीं।
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