Gujarat: जिस सीट पर लगातार 7 बार जीते पिता, वहां से अब उनका बेटा लड़ेगा चुनाव

Chhotu vasava BTP Gujarat elections: गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले पिता-पुत्र उम्‍मीदवारों की कई चौंकाने वाली खबरें आई हैं। यहां छोटा उदयपुर में वरिष्ठ नेता राठवा ने अपने राजनीतिक रंग बदलकर आदिवासी क्षेत्र को झटका दिया, वहीं, एक अन्य वरिष्ठ आदिवासी नेता छोटू वसावा ने भी अपने बेटे महेश को अपनी सीट पर चुनाव लड़ाने का फैसला किया है। भरूच जिले की अपनी पारंपरिक विधानसभा सीट झगड़िया से वह लगातार सात बार जीते थे।

झगड़िया सीट से बेटे ने ली पिता छोटू वसावा की जगह

झगड़िया सीट से बेटे ने ली पिता छोटू वसावा की जगह

75 वर्षीय छोटू वसावा ने भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) की स्‍थापना की थी, जिसे आदिवासी इलाकों में बड़ा समर्थन मिला। यहां तक कि, छोटू वसावा को हराना असंभव हो गया। महेश, जो डेडियापाड़ा सीट से आते हैं और भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, अब झागड़िया के उम्मीदवार होंगे, यह ऐलान बुधवार को उम्मीदवारों की एक सूची में किया गया। सियासत के जानकार भलीभांति यह जानते हैं कि भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) का गुजरात, जो कि भाजपा शासित राज्य है, के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बड़ा प्रभाव है, यहीं बीटीपी ने 2017 में दो विधानसभा सीटें जीती थीं, जब उसने कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था।

पहले जदयू के साथ थे छोटू वसावा

पहले जदयू के साथ थे छोटू वसावा

छोटू वसावा पहले जनता दल (यूनाइटेड) के साथ थे, उनकी पार्टी ने बाद में मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस से नाता तोड़ लिया और इस साल की शुरुआत में आम आदमी पार्टी के साथ एक अल्पकालिक गठबंधन किया। हालांकि, फिर आम आदमी पार्टी के साथ आने से इनकार भी किया गया। अब डेडियापाड़ा सीट से महेश की जगह बहादुरसिंह वसावा का नाम भी घोषित किया गया है। वहीं, पार्टी के 12 उम्मीदवारों की पहली सूची रविवार को घोषित की गई, जिनमें से पार्टी नौ एसटी-आरक्षित सीटों से मैदान में थीं।

हालाँकि, कई प्रयासों के बावजूद, महेश से मीडिया बात नहीं कर पाई। उनके एक सहयोगी ने बताया कि, "महेश बाहर गए हुए हैं और उनसे भेंट नहीं हो सकती। वहीं, फोन पर एक बातचीत में पिता वसावा ने यह दावा करते हुए कि वह इस चुनाव में झगड़िया से नहीं लड़ रहे हैं, कहा, "मैं झगड़िया से विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहा हूं। मैं अब यहां से संसदीय चुनाव लड़ूंगा। मैंने महेश का नाम झागड़िया के लिए प्रस्तावित किया है।'

बोले- बेटे को वहां से चुनाव लड़ाने में मेरी ही सहमति

बोले- बेटे को वहां से चुनाव लड़ाने में मेरी ही सहमति

पार्टी सूत्रों ने कहा कि वसावा के खराब स्वास्थ्य के कारण इस बार उनके चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है। वहीं, स्वास्थ्य के दावों का खंडन करते हुए वसावा ने कहा, "मेरा स्वास्थ्य अच्छा है और मैं चुनाव लड़ने के लिए फिट हूं। लेकिन सभी मौजूदा व्यवस्था मेरी मंजूरी से की जा रही है।" बीटीपी ने हाल ही में जदयू के साथ जुड़ने की घोषणा की थी, लेकिन बुधवार के घटनाक्रम के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि महेश चुनावी साझेदारी के लिए भाजपा के साथ बातचीत कर रहे हैं।

पिता-पुत्र की जोड़ी में हो सकते हैं मतभेद?
भरूच में एक बात यह भी चल निकली है कि महेश को देडियापाड़ा में भाजपा से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण उन्होंने अपने पिता के साथ सीट बदल ली। यह भी कहा जा रहा है कि सत्तारूढ़ भाजपा के साथ संबंध को लेकर पिता-पुत्र की जोड़ी में मतभेद हो सकते हैं।

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