जमीनी हकीकत से मेल नहीं: सूरत में कोरोना से जान गंवाने वालों की संख्या सरकारी आंकड़ों से बहुत ज्यादा

सूरत। भारत की डायमंड कैपिटल कहे जाने वाले सूरत में कोरोना से मरने वालों की संख्या आए रोज बढ़ती जा रही है। यहां जितने लोगों की जानें जा रही हैं, वो संख्या सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खा रही। मसलन, सरकार ने कहा कि, सूरत में पिछले 24 घंटों में केवल 16 मौतें दर्ज की गई हैं। मगर, जब रियलिटी चेक किया गया तो यह कहानी अलग थी। रोज 16 से ज्यादा लाशें तो सूरत के एक बड़े श्मशान पर ही पहुंचाई जा रही हैं...जबकि इस जिले में अब 8-9 श्मशान और कब्रिस्तान सक्रिय हैं।

Indias diamond capital Surat, Govts Covid 19 victims Numbers Dont Match Ground Reality

कोरोना से मौत के जो आंकड़े अस्पतालों के हवाले से सरकारी विभाग बता रहा है.. उसकी संख्या असल में मरने वालों की लाशों से मेल नहीं खाती। सूरत स्थित सबसे बड़े श्मशान के एक कर्मी ने कहा कि, अकेले इसी श्मशान पर रोज 30 से ज्यादा शव फूंके जा रहे हैं। उसने कहा, "यह आंकड़ा पिछले महीने में कम था, इस बार ज्यादा हो रहा है। लगभग 4 गुना ज्यादा। चौबीसों घंटे लाशें श्मशान पर पहुंचाई जा रही हैं। श्मशान की भट्टी रात को काफी देर तक स​क्रिय ही रहती है।"

अश्विनी कुमार क्रेमेटोरियम ट्रस्ट, जहां सूरत का सबसे बड़ा स्टाफ है...उसका हिसाब-किताब भी सरकारी आंकड़ों की पोल खोलता है। कई स्थानीय लोगों ने कहा कि, सरकारी आंकड़े, श्मशान घाट और कब्रिस्तानों पर ठिकाने लगाई जा रही लाशों से अलग हैं। दोनों की संख्या में काफी अंतर है। इसी तरह तुलसी शॉप के मालिक रमेश कचाडिया कहते हैं कि, मौतों की संख्या काफी ज्यादा है। मैंने 30-35 एंबुलेंस देखीं, जिनमें लाशें श्मशान लाई गईं और जलाई गईं।"

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उन्होंने कहा कि, "श्मशान घाट के अंदर जो भी एंबुलेंस जा रही हैं, वे सब कोरोना से मरने वालों की लाशों से भरी हुई होती हैं। वहीं, एक श्मशान-कर्मी ने कहा कि, "लगभग 50 लाशें यहां जलाई गईं।"

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18 अप्रैल को गुजरात में, हेल्‍थ बुलेटिन द्वारा 110 मौतों का उल्लेख किया गया था, लेकिन अहमदाबाद, राजकोट, सूरत और वडोदरा में अधिकारियों ने कहा कि वास्तविक संख्या 500 से ऊपर हो सकती है। अकेले राजकोट में, स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 18 अप्रैल को 24 घंटों में 69 मौतें हुईं।

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एक अधिकारी ने कहा, "हम यथासंभव लोगों को बचाने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। लेकिन हमें उन लोगों के बीच अंतर करना होगा जिन्हें बचाया जा सकता है तथा जो नहीं बच सकते हैं, हमें उसी के अनुसार काम करना होगा।

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