कोरोना का कहर: अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल के बाहर लगी एंबुलेंस की लंबी कतारें, श्मशान भी शवों से अटे
अहमदाबाद। गुजरात के सूरत और अहमदाबाद शहरों में कोरोना महामारी की वजह से कोहराम मचा हुआ है। इन शहरों में कोरोना के इतने मरीज मिल रहे हैं कि व्यवस्था खाक चाट रही हैं। लोगों की जानें भी ज्यादा जा रही हैं, ऐसे में श्मशान भी अंतिम संस्कारों के लिए कम पड़ रहे हैं।
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आज अहमदाबाद सिविल अस्पताल स्थित सबसे बड़े कोविड हॉस्पिटल के बाहर एंबुलेंस लंबी कतारों में देखी गईं। अस्पताल हों या श्मशान.. दोनों जगह वेटिंग टाइम बढ़ गया है। जिन लोगों की कोरोना के कारण जान जा रही है, उनके परिजनों को अंतिम क्रिया करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। एक अधिकारी ने कहा कि, पिछले 10 दिनों से इमरजेंसी जैसे हालत हैं।हर दिन राज्य में 4500 से अधिक कोरोना मरीज मिल रहे हैं। श्मशान पर जो लाशें पहुंचाई जा रही हैं, उनमें से अधिकांश कोरोना रोगियों की हैं।

अहमदाबाद 108 आपातकालीन सेवाएं के हेड-ऑप्स के मुताबिक, 60 और एम्बुलेंस जोड़े गए हैं।' कई जगहों पर तो शव निजी वाहनों पर यहां तक कि ढेले पर ले जाते भी देखे गए हैं।
वहीं, सूरत शहर की बात करें तो यहां भी रोज कोरोना के संक्रमण और लोगों की मौतों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। हालत यह हैं कि, एक श्मशान पर तो रोज करीब 80 लाशें पहुंचाई जा रही हैं। वहीं, अन्य श्मशान-घाटों पर भी काफी संख्या में शवदाह किए जा रहे हैं। यहां चौबीसों घंटे अंतिम संस्कार हो रहे हैं। अभी सूरत में अधिकारियों ने 15 वर्षों से बंद पड़े श्मशान को फिर से खोलने का फैसला लिया है। इसके अलावा तीन और श्मशान घाट आॅपरेशनल हुए हैं।

एक श्मशान घाट के संचालक ने बताया कि, सूरत में रोजाना 100 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। इन दिनों तो 8-10 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। यही वजह है कि प्रशासन ने पिछले 15 वर्षों से बंद पड़े श्मशान को फिर से खोलने का फैसला किया है। इससे पहले शहर के तीन प्रमुख श्मशानों की सीमाओं का विस्तार करने और अंतिम संस्कार को सुविधाजनक बनाने के लिए नई संरचनाएं स्थापित करने का फैसला लिया गया था।












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