कोरोना का प्रकोप: गुजरात में हुआ एपिडेमिक एक्ट लागू, विदेश से आने वालों पर लिया ये फैसला
अहमदाबाद. कोरोनावायरस के प्रकोप से निपटने के लिए गुजरात सरकार ने एपिडेमिक डिसीस एक्ट-1897 लागू कर दिया है। इसके अनुसार, विदेश से राज्य में आने वाले किसी भी व्यक्ति को 14 दिनों तक घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा। यदि कोई ऐसा करता भी है तो शिकायत मिलते ही उसे म्युनिसिपल हेल्थ विभाग पकड़कवार सोला के सिविल अस्पताल में भर्ती करा देगा। बता दें कि, राज्य सरकार के इस फैसले से पहले मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने एक बैठक की थी। जिसमें कोरोनावायरस के बढ़ते खतरे के देखते हुए तैयारियों पर चर्चा की गई। जिसके बाद यह फैसला लिया गया कि गुजरात के सभी शिक्षण संस्थान, सिनेमा हॉल और स्वीमिंग पूल 29 मार्च तक बंद रहेंगे। साथ ही सार्वजनिक जगहों पर थूका तो 500 रु. का जुर्माना लगेगा।

सभी स्कूल, सिनेमा हॉल और स्वीमिंग पूल भी बंद
राज्य में अबतक कोरोनावायरस से जुड़ा एक भी पॉजीटिव केस सामने नहीं आया है। गुजरात मुख्य सचिव अनिल मुकिम ने इस बात की जानकारी दी कि, गुजरात के सभी सिनेमा हॉल और स्वीमिंग पूल भी 16 से 29 मार्च तक बंद रहेंगे। मुकिम ने यह भी कहा कि, राज्य में किसी तरह का शैक्षणिक कार्य नहीं किया जाएगा। हालांकि, टीचिंग स्टाफ और नॉन टीचिंग स्टाफ अपनी सुविधा के अनुसार आ सकते हैं। उन पर किसी भी तरह की रोक नहीं रहेगी।

हाईकोर्ट ने भी दिए ये निर्देश
वहीं, सरकारी आदेश से पहले गुजरात हाईकोर्ट ने भी सावधानी बरतने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बार एसोसिएशन के सदस्योंं, रजिस्ट्री के सदस्यों तथा हाईकोर्ट के स्टाफ सहित अन्य के लिए कहा कि, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। यह भी कहा कि, कोरोना वायरस से बचाव के लिए हाथ न मिलाएं। लोग नमस्ते करें। वकील भी इन दिनों अपने मुवक्किलों को अदालती कार्रवाई में न लाएं, तो बेहतर होगा।

एक हफ्ते में हलफनामा पेश करना होगा
हाईकोर्ट ने संज्ञान याचिका के तहत राज्य सरकार को नोटिस देते हुए कहा कि, कोरोना को लेकर अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी। सरकार से राज्य में कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों के विवरण भी लाने को कहा है। इसके अलावा साथ मरीजों के उपचार को लेकर भी सरकार से ब्यौरा मांगा जाएगा।

प्रतिवादियों में ये पक्ष शामिल
उपर्युक्त प्रतिवादियों में राज्य सरकार, राज्य के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव, विधि विभाग के प्रधान सचिव शामिल हैं। खंडपीठ ने इन सभी प्रतिवादियों से एक सप्ताह के भीतर हलफनामा पेश करने को कहा है।












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