कटे हाथ को लेकर 130 किलोमीटर दूर आया व्यापारी, डॉक्टरों ने सात घंटे में जोड़ दिया हाथ
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां बिहार के पश्चिमी चंपारण के बगहा थाना क्षेत्र के निवासी व्यापारी का हाथ बीते 22 अप्रैल को कट गया था। इसके बाद वह अपने कटे हाथ को लेकर 130 किलोमीटर दूर गोरखपुर के एक अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने 7 घंटे के ऑपरेशन के बाद कटे हाथ को जोड़ दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित व्यापारी का नाम विजय कुमार अग्रवाल है।

सरसों की पेराई करते हुए कट गया था हाथ
22 मार्च को वह सरसों की पेराई कर रहा था। जैसे ही उसने मशीन में खली साफ करने के लिए दायां हाथ डाला तो कोहनी के पास से उसका हाथ कट कर अलग हो गया। इसके बाद उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया । स्थानीय डॉक्टरों ने पीड़ित और उसके परिजनों को पटना या गोरखपुर जाने का सुझाव दिया तो परिजनों ने गोरखपुर ले जाने का फैसला किया, क्योंकि वह काफी नजदीक है।

कटे हुए हाथ को बर्फ से ढक कर ले आए थे
परिजनों ने घायल विजय को गोरखपुर के सावित्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां प्लास्टिक सर्जन डॉ. नीरज नाथानी के नेतृत्व में उसका ऑपरेशन किया गया और फिर से जुट गया। खास बात यह है कि परिजन कटे हुए हाथ को बर्फ से ढक कर ले आए थे। इसके चलेत अस्पताल पहुंचने के चार घंटे बाद भी हाथ खराब नहीं हुआ। वहीं डॉ. नीरज ने बताया कि ऑपरेशन क्रिटिकल था।

7 घंटे तक चला ऑपरेशन
कटे हुए हाथ को धुला नहीं गया था। खून की धमनियों में धूल के कण चिपके थे। ऑपरेशन थिएटर में पहले कटे हाथ को धुला गया। उन्होंने बताया कि कुछ धमनियों में सड़ने की प्रक्रिया की शुरुआत के संकेत दिखने लगे थे। जहां से हाथ उखड़ा था वहां से 9 सेंटीमीटर दूर हड्डी टूट गई थी. ऐसे में हाथ को 10 सेंटीमीटर काट कर दूसरे हिस्से से जोड़ा गया। ऑपरेशन में 7 से 8 घंटे लगे।

परिजनों ने दिखाई सतर्कता
डॉ. नीरज ने बताया कि ऐसे मामलों में गोल्डन आवर 4 से 5 घंटे होते हैं। उन्होंने बताया कि यदि चार घंटे के अंदर मरीज अस्पताल नहीं पहुंचताा तो मामला बिगड़ भी सकता था। राहत की बात यह थी कि परिजन हाथ को पॉलीथिन में लपेट कर उसे बर्फ के बीच रखकर लाए थे। अगर वह यह सावधानी न बरतने तो हाथ की धमनियां सड़ने लगती। ऐसे में ऑपरेशन करना संभव न होता।












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