Bengal New CM: कौन बनेगा बंगाल का नया CM? सुवेंदु के साथ 6 नेता भी मुख्यमंत्री की रेस में? शाह ने दे दिया हिंट
Bengal New CM: पश्चिम बंगाल की सियासत में दशकों बाद एक नया सूरज उगा है। ममता बनर्जी के 15 साल पुराने अभेद्य किले को ध्वस्त कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 207 सीटों के साथ ऐतिहासिक 'महाविजय' हासिल की है। अब राज्य की गलियों से लेकर दिल्ली के पावर कॉरिडोर तक बस एक ही सवाल गूंज रहा है- "बंगाल का नया मुख्यमंत्री कौन होगा?"
बीजेपी ने चुनाव से पहले किसी भी चेहरे को सीएम पद के लिए प्रोजेक्ट नहीं किया था। लेकिन अब जब पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिल चुका है, तो नामों की चर्चा तेज हो गई है। गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही संकेत दे दिया था कि मुख्यमंत्री कोई 'बाहरी' नहीं, बल्कि बंगाल की माटी का ही लाल होगा। सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराकर दो सीटों पर जीते हैं, तो सीएम उम्मीदवार की रेस में उनका नाम सबसे पहले आर रहा है। लेकिन सुवेंदु अधिकारी से लेकर 'बंगाल के योगी' तक, आइए समझते हैं उन 7 चेहरों के बारे में जो इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।

1. सुवेंदु अधिकारी: 'जायंट किलर' और स्वाभाविक दावेदार (Suvendu Adhikari)
मुख्यमंत्री की रेस में सबसे पहला और सबसे भारी नाम सुवेंदु अधिकारी का है। सुवेंदु ने इस चुनाव में वो कर दिखाया जो नामुमकिन माना जा रहा था। उन्होंने न केवल नंदीग्राम की अपनी सीट बचाई, बल्कि ममता बनर्जी के घर भवानीपुर में घुसकर उन्हें 15,000 से ज्यादा वोटों से हरा दिया।
पार्टी सूत्रों की मानें तो सुवेंदु केवल नंदीग्राम से लड़ना चाहते थे, लेकिन अमित शाह के निर्देश पर उन्होंने दोहरी चुनौती स्वीकार की। आज सुवेंदु बंगाल में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा हैं। उनकी जमीनी पकड़ और ममता को सीधे चुनौती देने की क्षमता उन्हें इस पद का सबसे स्वाभाविक हकदार बनाती है।
2. समिक भट्टाचार्य: संगठन के माहिर खिलाड़ी (Samik Bhattacharya)
सुवेंदु के बाद दूसरा सबसे मजबूत नाम प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य का है। समिक की सबसे बड़ी ताकत उनकी 'कोऑर्डिनेशन' क्षमता है। उन्होंने बंगाल के शिक्षित मध्यम वर्ग और पुराने-नए कार्यकर्ताओं के बीच एक पुल का काम किया। शाह के भरोसेमंद सुनील बंसल के मार्गदर्शन में समिक ने पार्टी के अंदरूनी कलह को शांत किया और सभी को एक छत के नीचे लाए। बंगाली संस्कृति और भाषा पर उनकी गहरी पकड़ है और उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का भी मजबूत समर्थन हासिल है।
3. उत्पल महाराज: 'बंगाल के योगी' की एंट्री (Utpal Maharaj)
इस रेस में सबसे चौंकाने वाला और चर्चा में रहने वाला नाम उत्पल महाराज का है। इन्हें 'बंगाल का योगी' कहा जाता है। उत्पल महाराज एक धार्मिक संस्था से जुड़े थे, जहाँ से इस्तीफा देकर उन्होंने कालियागंज सीट से चुनाव लड़ा और 76,000 से ज्यादा वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की।
हालांकि वो सामान्य बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच उतने चर्चित नहीं थे, लेकिन RSS और भगवा इकोसिस्टम के शीर्ष नेतृत्व में उनकी लोकप्रियता बहुत ज्यादा है। हिंदू मतों के ध्रुवीकरण में उनकी भूमिका को देखते हुए बीजेपी उन्हें 'सरप्राइज सीएम' के तौर पर पेश कर सकती है।
4. शंकर घोष: उत्तर बंगाल का युवा चेहरा (Shankar Ghosh)
सिलीगुड़ी से रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल करने वाले शंकर घोष को भी मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। शंकर घोष कभी सीपीएम के कट्टर कम्युनिस्ट नेता रहे हैं, लेकिन 2021 में बीजेपी में आने के बाद उन्होंने उत्तर बंगाल में पार्टी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
एक कॉलेज प्रोफेसर के तौर पर उनकी छवि काफी साफ-सुथरी और बौद्धिक है। उत्तर बंगाल की 54 सीटों में से बीजेपी ने दो-तिहाई से ज्यादा सीटें जीती हैं, ऐसे में शंकर घोष को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।
5. दिलीप घोष: संघर्षों का प्रतीक (Dilip Ghosh)
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को बंगाल में पार्टी का आधार बनाने वाला नेता माना जाता है। उनके कार्यकाल में ही बीजेपी 2019 में एक बड़ी ताकत बनकर उभरी थी। खड़गपुर के इलाके में ओबीसी और अनुसूचित जातियों के बीच उनकी पकड़ बेजोड़ है। दिलीप घोष का बैकग्राउंड पूरी तरह से RSS का है। हालांकि वो वर्तमान में प्रदेश अध्यक्ष नहीं हैं, लेकिन संगठन में उनकी हैसियत आज भी एक वरिष्ठ मार्गदर्शक की है।
6. अग्निमित्रा पॉल: महिला नेतृत्व का उभरता चेहरा (Agnimitra Paul)
बीजेपी अगर 'महिला मुख्यमंत्री' के कार्ड पर विचार करती है, तो अग्निमित्रा पॉल का नाम सबसे ऊपर होगा। जानी-मानी फैशन डिजाइनर रहीं अग्निमित्रा ने आसनसोल दक्षिण से अपनी जीत के साथ साबित किया है कि वो केवल ग्लैमरस चेहरा नहीं, बल्कि एक जुझारू नेता भी हैं। नेशनल मीडिया में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने वाली अग्निमित्रा को ममता बनर्जी के विकल्प के रूप में एक महिला सशक्तिकरण के चेहरे के तौर पर पेश किया जा सकता है।
7. स्वपन दासगुप्ता: बंगाल का बौद्धिक चेहरा (Swapan Dasgupta)
पूर्व पत्रकार और पद्म भूषण से सम्मानित स्वपन दासगुप्ता का नाम भी चर्चाओं में बना हुआ है। स्वपन दासगुप्ता को प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह का बेहद करीबी माना जाता है। दिल्ली की राजनीति में दशकों तक सक्रिय रहने के बावजूद वे अपनी बंगाली जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहे हैं। उनकी छवि एक पढ़े-लिखे और सभ्य बंगाली (Bhadralok) की है। बीजेपी उन्हें बंगाल के 'बौद्धिक समाज' के प्रतिनिधि के रूप में मुख्यमंत्री बना सकती है।
अमित शाह का वो बड़ा 'हिंट' और शपथ ग्रहण
बीजेपी का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि वह मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तरह यहां भी किसी 'नए और अप्रत्याशित' चेहरे को लाकर सबको चौंका सकती है। लेकिन अमित शाह ने 24 अप्रैल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक बड़ी बात कही थी। उन्होंने साफ किया था कि "जो बंगाल की धरती का बेटा है, यहीं पढ़ा-लिखा है, बंगाली बोलता है और बीजेपी का कार्यकर्ता है, वही मुख्यमंत्री बनेगा।"
अमित शाह का यह बयान उन दावों को खारिज करने के लिए था जिनमें कहा जा रहा था कि दिल्ली से किसी नेता को बंगाल पर थोपा जाएगा। अब जब 9 मई को शपथ ग्रहण की संभावना जताई जा रही है, तो सस्पेंस अपने चरम पर है। क्या बीजेपी सुवेंदु अधिकारी के 'अनुभव' को चुनेगी या उत्पल महाराज के 'भगवा अवतार' को? बंगाल की जनता को अब बस उस एक नाम का इंतजार है।















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