One Nation One Election:डीडीयू विश्विद्यालय के प्रोफेसर ने 'एक देश एक चुनाव' को लेकर छात्रों से कही यह खास बात
Gorakhpur News Uttar Pradesh: एक देश एक चुनाव की व्यवस्था भारत में प्रारंभ से ही रही है। यह व्यवस्था पहले आम चुनाव से 1967 तक बनी रही किन्तु 1970 तक लोक सभा का समय से पहले भंग हो जाने के कारण एवं कुछ विधान सभाओं में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाने के कारण एक साथ चुनाव की प्रक्रिया मे बाधा उत्पन्न हो गई। तभी से अलग अलग समय पर लोक सभा एवं राज्य विधानसभाओं का चुनाव प्रारंभ हो गया, जो आज भी बना हुआ है। जिसका सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह हुआ कि देश के आर्थिक संसाधनों का एक बड़ी धनराशि चुनावी व्यय के रुप में व्यय होने लगी जबकि इनका प्रयोग देश के लोक नीतियों के क्रियान्वयन एवं विकास में होना चाहिए यह एक बड़ी समस्या है।
उक्त बातें दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोरखपुर में राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित अतिथि व्याख्यान में *'एक देश एक चुनाव : उपयोगिता एवं चुनौतियां*' विषय पर मुख्य वक्ता डॉ. महेंद्र कुमार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर , राजनीति विज्ञान विभाग, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा ।

उन्होंने आगे कहा कि आज इस बात पर विचार किया जा रहा है कि पुनः एक देश एक चुनाव की व्यवस्था बहाल की जाए। क्योंकि एक बार चुनाव कराने में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं जिसका उपयोग लोक नीतियों के क्रियान्वयन में किया जा सकता है और यदि यह व्यवस्था लागू की गई तो संघीय व्यवस्था प्रभाव पड़ेगा साथ ही संविधान के कुछ उपबंधों में परिवर्तन की आवश्यकता पड़ेगी जो सरल मार्ग नहीं है। इस कार्य को करने के लिए सभी राजनीतिक दलों एवं लोक मानस को कृत संकल्पित होना होगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि एक देश एक चुनाव आज समृद्ध भारत के निर्माण की अवश्यकता है । यह व्यवस्था स्वतंत्र भारत में प्रारंभ से रही लेकिन केंद्रीय सरकार के मत से भिन्न राज्यों में सरकारों के निर्माण और राज्यों में राष्ट्रपति शासन के कारण यह व्यवस्था विफल हो गई आज उन्हीं कारणों पर विचार करना चाहिए कि यह व्यवस्था क्यों विफल हो गई । वर्तमान में देश की वाह्य एवं आंतरिक परिस्थितियां और बार - बार चुनावी प्रक्रिया से देश संसाधनों पर बढ़ता दबाव के लिए एक देश एक चुनाव सशक्त विकल्प है इसे अपनाना चाहिए,अधिकांश राजनीतिक दलों की भी इस विषय पर सहमति है ।
कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रियंका सिंह ने एवं आभार ज्ञापन श्री इंद्रेश पाण्डेय ने किया।
इस अवसर पर डॉ अखिल कुमार श्रीवास्तव, डॉ आर पी यादव, श्वेता सिंह, विकास पाठक के साथ ही राजनीति विज्ञान विभाग के सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे। यह सूचना मीडिया प्रभारी डॉ शैलेश कुमार सिंह ने दी।












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