गोरखपुर विश्वविद्यालय में होगा संवेदना और आलोचना से साक्षात्कार, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल करेंगे उद्घाटन

Gorakhpur News: 'हिन्दी भाषा और साहित्य : आलोचना का मूल्य और डॉ. रामचन्द्र तिवारी' विषय पर हिन्दी विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में केंद्रीय हिंदी निदेशालय, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित आचार्य रामचंद्र तिवारी के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का कल दिनांक 4,5 एवं 6अक्टूबर, 2024 को संवाद भवन में आयोजन सुनिश्चित है.

गोरखपुर विश्वविद्यालय के हीरक जयंती वर्ष पर आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी हेतु *कुलपति प्रो. पूनम टंडन* ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित किया. उन्होंने बताया कि यह संगोष्ठी आचार्य रामचंद्र तिवारी की स्मृति में उनके जन्म शताब्दी वर्ष पर आयोजित है. उन्होंने कहा कि हिन्दी विभाग की पूरे देश में प्रतिष्ठा रही है. आचार्य रामचंद्र तिवारी हिन्दी साहित्य जगत के बेहद प्रतिष्ठित लेखक-आलोचक रहे हैं. उनकी पुस्तकें पूरे देश के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं.

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उन्होंने कहा कि वह हमारे हिन्दी विभाग के संस्थापक आचार्य रहे हैं. उनके महत्व को इस बात से भी समझा जा सकता है कि उनके पहले शोध छात्र आचार्य विश्वनाथ प्रसाद तिवारी पद्मश्री से सम्मानित हुए और साहित्य अकादेमी के हिन्दी भाषा से पहले अध्यक्ष चुने गए.
उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी का अभिष्ट है कि शोधर्थियों को अध्ययन व शोध की नई दिशा प्राप्त हो. इस संगोष्ठी के संयोजक प्रो. विमलेश कुमार मिश्र हैं.

संगोष्ठी का उद्‌घाटन कल सुबह 10:30 बजे हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल माननीय शिवप्रताप शुक्ल जी करेंगे। पद्मश्री प्रो.विश्वनाथ प्रसाद तिवारी एवं केंद्रीय हिन्दी निदेशालय के निदेशक प्रो०सुनील बाबूराव कुलकर्णी भी उद्‌घाटन सत्र को सम्बोधित करेंगे। इस सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन करेंगी.

कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजवंत राव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों का जवाब देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल अपनी ऊंची इमारत से नहीं बल्कि महान परंपराओं से ऊंचा होता है.
विगत 45 वर्षों में विश्वविद्यालय में काफी संख्या में नए शिक्षक आए हैं, जिन्हें आचार्य रामचंद्र तिवारी पर 3 दिन चलने वाली संगोष्ठी से विश्वविद्यालय की महान विरासत से अवगत होने का अवसर मिलेगा. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय लोकतांत्रिक तार्किक और सामाजिक उत्तरदायित्व को लेकर चलने वाली संस्था है. यह संगोष्ठी भी कुलपति मैडम द्वारा टाउन और गाउन को एक करने की कोशिश में एक बड़ा सदप्रयास है. उनकी निरंतर कोशिश रहती है कि समाज की आकांक्षाओं के अनुरूप शोध व शिक्षा को दिशा दी जा सके.

संगोष्ठी के संयोजक प्रो. विमलेश कुमार मिश्र ने बताया कि इसमें देशभर के विद्वान साहित्यकार वक्ता के रूप में शामिल होंगे. विशेष बात यह है कि इसमें पांच विद्वान हिन्दी भाषी राज्यों से तो पांच हिंदीतर राज्यों से होंगे. हिंदीतर राज्यों से जनजातीय केंद्रीय विश्वविद्यालय, हैदराबाद के कुलपति प्रो. टी. वी. कट्टीमनी, प्रो.आर.एस. सर्राजू, त्रिपुरा से प्रो.मिलनरानी जमातिया, महाराष्ट्र से प्रो. जोगेंद्र सिंह विशेन, प्रो. विजय प्रसाद अवस्थी, कलकत्ता से प्रो.अमरनाथ शर्मा, खंडवा से प्रो. श्रीराम परिहार आदि सम्बोधित करेंगे.

*संगोष्ठी के दौरान लगेगी पुस्तक प्रदर्शनी*
हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. कमलेश कुमार गुप्त ने एक सवाल के जवाब में बताया कि की हिंदी के मूर्धन्य आलोचक प्रोफेसर नाम और सिंह सार्वजनिक रूप से आचार्य रामचंद्र तिवारी को अपना बड़ा भाई मानते थे. नामर जी यह स्वीकार करते थे कि आचार्य रामचंद्र तिवारी द्वारा लिखी गई प्रत्येक पंक्ति को वह ध्यान से पढ़ते हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल आचार्य विष्णुकांत शास्त्री जी भी आचार्य रामचंद्र तिवारी की लेखनी की प्रशंसा करते थे. संगोष्ठी के दौरान संवाद भवन के समीप चार प्रकाशकों के द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी लगायी जाएगी. विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए यह प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र साबित होगी. पुस्तकें देखने व खरीदने का यह सुनहरा अवसर होगा. उन्होंने बताया कि अबतक 200 से अधिक प्रतिभागियों ने संगोष्ठी हेतु ऑनलाइन पंजीकरण करा लिया है. संगोष्ठी के दौरान भी ऑफलाइन पंजीकरण प्रक्रिया चलेगी.

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