SAWAN 2022: अनोखा इतिहास है तामेश्वर नाथ मंदिर का,भगवान बुद्ध का हुआ था मुडंन
उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर जिले में स्थित तामेश्वर धाम का अपना अनोखा और ऐतिहासिक महत्व है। शिव भक्तों के लिए यह अपार श्रद्धा का केंद्र हैँ। पूरे सावन माह में यहां दूर-दूर से शिव भक्तों का तांता लगा रहता है।

गोरखपुर,19 जुलाई: उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर जिले में स्थित तामेश्वर धाम का अपना अनोखा और ऐतिहासिक महत्व है। शिव भक्तों के लिए यह अपार श्रद्धा का केंद्र हैँ। पूरे सावन माह में यहां दूर-दूर से शिव भक्तों का तांता लगा रहता है। ऐसी मान्यता है कि 350 साल पूराने इस मंदिर पर भगवान गौतम बुद्ध का मुंडन हुआ था। इसके साथ ही जीवन पर साथ निभाने के रिश्ते यहीं पक्के हुआ करते थे।
राजा रतनसेन ने कराया था गर्भगृह का निर्माण
भारती परिवार के लोगों के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह का निर्माण आज से करीब 350 वर्ष पूर्व बांसी के तत्कालीन राजा ने कराया था। उस समय भारती परिवार के पूर्वज सन्यासी टेकधर भारती के जिम्मे मंदिर का देखरेख सौंपा गया था। उन्होने बताया कि तामेश्वरनाथ में रह रहे भारती परिवार मूल रूप से हरनही तहसील के जैसरनाथ भरोहिया के निवासी हैं। गर्भगृह निर्माण के बाद जैसे-जैसे श्रद्धालु यहं आते गए मंदिर निर्माण का कार्य चलता रहा।
भगवान बुद्ध का हुआ था मुंडन
गांव के बुजुर्ग व जानकार लोग बताते हैं कि भगवान बुद्ध का मुंडन संस्कार इसी मंदिर पर हुआ था। मंदिर परिसर में स्थित एक अर्धनारीश्वर मंदिर की आकृति भी बुद्ध कालीन मंदिर की ही तरह बना हुआ है। इस बात की तस्दीक मंदिर पर पहुंची पुरातत्व विभाग की टीम ने भी किया था।
कुंती ने की थी शिवलिंग की स्थापना
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडव अपनी माता कुंती के साथ तामेश्वरनाथ धाम में पहुंचे थे। जहां शिव की आराधना के लिए कुंती ने शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर से थोड़ी दूर रामपुर में स्थित एक पोखरे का निर्माण भी पांडवों ने कराया था। जो आज द्वापरा के नाम से जाना जाता है।
एक माह तक लगता है मेला
यहां करीब एक माह तक चलने वाले सावन मेले में 45 वर्ष पहले लोगों के शादी के रिश्ते भी पक्के हुआ करते थे। इस मंदिर के देखरेख का जिम्मा यहां रह रहे भारती परिवार संभालते हैं। जो अपनी बारी के हिसाब से मंदिर की देखरेख करने के साथ ही उससे होने वाली आमदनी को खर्च करने के अधिकारी होते हैं।












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