UPSC Success Story: लाखों की नौकरी का पैकेज छोड़ शुरु की तैयारी, सीडीओ पिता की बेटी बनी IAS

UPSC Result 2022 Success Story: गोरखपुर की रुपल श्रीवास्तव ने यूपीएसी परीक्षा 2022 में पूरे देश में 113वीं रैंक हासिल की है। रुपल ने असफलता के बाद भी प्रयास जारी रख यह मुकाम हासिल की है।

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UPSC Topper Rupal Shrivastava: संघ लोक सेवा आयोग UPSC ने मंगलवार को सिविल सर्विस एग्‍जाम के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस परीक्षा में सीएम सिटी गोरखपुर की रुपल श्रीवास्तव ने 113वीं रैंक हासिल की हैं। उनकी इस कामयाबी पर पूरे जिले में खुशी का माहौल है। रुपल के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा है। रुपल ने वन इंडिया हिन्दी से खास बातचीत की और किस तरह उन्होंने मंजिल पाई इस पर विस्तार से चर्चा की।

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    UPSC CSE 2022 Result: गोरखपुर की रुपल श्रीवास्तव को मिली 113वीं रैंक

    बचपन से ही था आईएएस बनने का सपना
    रुपल बताती हैं कि पिता एक प्रशासनिक अधिकारी है और वर्तमान समय में सीडीओ के पद पर तैनात हैं। इन्हें देख बचपन से ही प्रशासनिक अधिकारी बनने की इच्छा थी लेकिन जब मैं ग्रेजुएशन में थी तब मैंने यूपीएसी क्लीयर करने के लिए मन बना लिया।

    प्रारंभिक शिक्षा गोरखपुर से
    रुपल की मां अमृता श्रीवास्तव बताती हैं कि वह बचपन से ही मेधावी थी। पढ़ाई में उसकी रुचि इस कदर थी कि उसके अलावां उसे और कुछ समझ नहीं आता। उसने हाईस्कूल व इंटर की पढ़ाई लिटिल फ्लावार धर्मपुर से की। दसवीं में 96.68 फीसदी व इंटर में 97.5 फीसदी अंक मिले थे। इसके बाद एनआईटी, जमशेदपुर से बीटेक में गोल्ड मेडल प्राप्त किया।

    पूणे में कर रही थीं जॉब
    रुपल बताती हैं कि बीटेक करने के बाद उन्हें पूणे की एक मल्टी नेशनल कंपनी से ऑफर मिला। उसके बाद उन्होंने वहां नौकरी शुरु कर दी। लेकिन काम के दौरान भी उनका मन यूपीएससी की तैयारी में लगा रहा और कुछ समय बाद उन्होंने वहां से लाखों की नौकरी छोड़ दी।

    शुरु की तैयारी
    रुपल बताती हैं कि उन्होंने नौकरी छोड़ने के बाद मुखर्जी नगर, दिल्ली का रास्ता चुना और यहां यूपीएससी की तैयारी के लिए वाजीराव कोचिंग सेंटर में दाखिला लिया। इसके बाद शुरु हो गयी आईएएस बनने की तैयारी।

    तीसरे प्रयास में मिली सफलता
    रुपल ने आईएएस बनने के सपने के साथ तैयारी शुरु कर दी। दिन- रात बस एक ही लक्ष्य दिमाग में था। पढ़ाई भी 8 से 10 घंटे तक करने लगी। पहली बार परीक्षा दीं लेकिन निराशा हाथ लगी। फिर खुद को मोटिवेट किया और दूसरे प्रयास के लिए तैयारी शुरु कर दी। असफलता इस बार भी हाथ लगी। इस बार प्री तो क्लीयर हो गया लेकिन मेंस परीक्षा नहीं निकल पाई। रुपल ने हिम्मत नहीं हारी। माता- पिता ने भी हौसला बढ़ाया। फिर क्या रुपल ने दोबारा शुरु की अपनी यूपीएससी की तैयारी। तीसरी बार फिर परीक्षा में शामिल हुई। परीक्षा दी लेकिन इस बार असफलता नहीं सफलता उनके कदमों तले थी। परिणाम आया और रुपल ने यूपीएससी में 113वीं रैंक हासिल की।

    असफलता से जानें क्या हैं कमियां
    रुपल बताती हैं कि इस परीक्षा में असफ होने के बाद निराश न हो बल्कि अपनी कमियां जानने का प्रयास करें। उसमें सुधार कर दोबारा प्रयास करें।

    कठिन परिश्रम और सतत प्रयास से मिलती है सफलता
    रुपल श्रीवास्तव बताती हैं कि जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर कोई भी कठिन परिश्रम के साथ सतत प्रयास करेगा उसे सफलता जरुर मिलेगी। जीवन में प्रयास की निरन्तरता बहुत आवश्यक है।

    माता - पिता को मानती हैं अपना आदर्श
    रुपल इस सफलता का श्रेया अपने गुरुजन व माता- पिता को देती हैं। माता- पिता को वह अपने जीवन का आदर्श मानती हैं।

    माता- पिता ने बेटी के सेलेक्शन पर कही यह बात
    रुपल की इस कामयाबी पर पूरे परिवार में खुशी की लहर है। माता- पिता के खुशी का ठिकाना नहीं है। पिता अभय श्रीस्तव ने कहा कि बेटी की जीत पर बहुत खुश है। इससे और बेटियों को मोटिवेट होकर अपने लक्ष्य पर गंभीरता से लगना चाहिए। बेटियां किसी से कम नहीं हैं। माता अमृता श्रीवास्तव ने कहा कि बेटी आज आईएस बनी है। बहुत खुश हूं। ऐसा लग रहा है मानों घर में अचानक से कितनी खुशी आ गयी हो। बेटी पर नाज है।

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