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BRD Medical College: टीबी मरीजों को निशुल्क मिल रही ये सुविधाएं, जीन एक्सपर्ट की मदद से ऐसे होता है इलाज

Gorakhpur News: केंद्र व राज्य सरकार लगातार टीबी उन्मूलन के लिए प्रयासरत हैं। इसी क्रम में बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज भी सराहनीय प्रयास कर रहा है। इसका माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। टीबी मरीजों की जांच व दवाओं की शोध पर माइक्रोबायोलॉजी विभाग के हेड डॉक्टर अमरेश कुमार सिंह ने वन इंडिया हिंदी से खास बातचीत की।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज कर रहा कार्य आप सब जानते हैं कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो खांसने छींकने से फैलती है। इसके लिए भारत सरकार और पीएम मोदी पूरी सजग हैं। इसके उन्मूलन के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज तेजी से कार्य कर रहा है। इसके लिए कल्चर डीएसटी लैब की स्थापना 2 018 में हुई थी जो 2 021 से क्रियाशील हुई है। इसमें विभिन्न स्टेपो में हम मरीजों की जांच करते हैं।

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जीन एक्सपर्ट या ट्रू नॉट मेथड से तीन घंटे में देते हैं रिपोर्ट इसके अंतर्गत हम फ्लूसेंट माइक्रोस्कोपी करते हैं। इससे हम एक दिन में यह देख पाते हैं कि मरीज में टीबी का वैक्टिरिया है या नहीं। उसी सैंपल का हम लोग रैपिड पीसीआर करते हैं जो जीन एक्सपर्ट या ट्रू नॉट मेथड से तीन घंटे में यह रिपोर्ट दे देते हैं कि वह मरीज पीसीआर द्वारा पॉजिटिव है यहां नहीं। यह एक प्रमाणिक जांच है। साथ में रेजिस्टेंस है या नहीं यह भी पता कर लेते हैं।

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    टीबी मरीजों को निशुल्क मिल रही ये सुविधाएं, जीन एक्सपर्ट की मदद से ऐसे होता है इलाज

    एमडीआर टीबी

    रिफैम्पिसिन प्रतिरोध से मतलब यह है कि टीबी में ऐसे मरीज अन्य दवाओं से भी रेजिस्टेंट हो सकते हैं। जिसको एमडीआर टीबी का नाम दिया जाता है। इसके अतिरिक्त एलपीए लैब है जिसके माध्यम से हम दो से तीन दिन में प्रथव व द्वीतीय पंक्ति की जितनी भी दवाएं है उसके बारे में यह जान पाते हैं कि यह मरीज पर काम करेंगी या नहीं। इसके बाद से मरीज को वो दवाएं दी जाती हैं जो उसको फायदा करेंगी।

    जब मरीज का इलाज शुुरु हो जाता है तो हम ये देखते हैं ये टेस्ट की हुई दवाएं उस पर काम कर रही हैं या नहीं। इसके लिए लिक्विड कल्चर कराते हैं। इसमें अगर जिंदा वैक्टिरिया मिलते हैं। तो नमूनों की दोबारा जांच कर दवाओं पर शोध करते हैं।

    भारत सरकार द्वारा टीबी मरीजों को कई निशुल्क सेवाएं दी जाती है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डीआर टीबी वार्ड में मरीजों का इलाज और जांच निशुल्क की जाती है। जो रोगी यहां नहीं आ सकते है दूर है, उनके घर जाकर टीम द्वारा उनके नमूने लिए जाते हैं।

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