मनीष गुप्ता के साथ उस रात क्या हुआ था, दोस्तों ने बयां की पूरी कहानी
मनीष गुप्ता के साथ उस रात क्या हुआ था, दोस्तों ने बयां की पूरी कहानी
गोरखपुर, 01 अक्टूबर: 36 वर्षीय कानपुर के प्रॉपर्टी डीलर मनीष कुमार गुप्ता की गोरखपुर जिले में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनकी मौत उस वक्त हुई जब गोरखपुर पुलिस एक होटल में की दबिश देने पहुंची थी। हालांकि, मनीष की मौत ने कई तहर के सवाल खड़े कर दिए हैं। मसलन, घटना वाली आखिर क्या हुआ था? इस पूरे मामले पर अब तक पुलिस का स्टैंड क्या रहा है? यही सब हम आपको बताने जा रहे हैं। उससे पहले आप यह जान लीजिए की आखिर मनीष कुमार गुप्ता कौन थे...
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कौन थे मनीष कुमार गुप्ता
36 वर्षीय मनीष कुमार गुप्ता मूल रूप से कानपुर जिले के रहने वाले थे, वो कानपुर में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते थे। मनीष के परिजनों की मानें तो कॉलेज खत्म करने के बाद एमबीए किया था और एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर के पद पर काम किया था। पांच साल पहले मनीष की शादी मीनाक्षी के साथ हुई थी। शादी के बाद दोनों के एक चाल साल का बेटा भी है अविराज। मनीष शादी के बाद नोएडा आ गए थे और यही रहकर काम करने लगे थे। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान मनीष अपनी पत्नी के साथ वापस कानपुर आ गए और यहां प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनीष का रुझान राजनीति की तरफ हुआ तो चार महीने पहले ही उन्होंने बीजेपी में कदम रखा था।

दोस्तों के साथ गोरखपुर गए थे मनीष
मनीष गुप्ता के दो दोस्त प्रदीप सिंह और हरवीर सिंह उर्फ अरविंद ग्रुरुग्राम से अपने दोस्त गोरखपुर के बढ़यापार निवासी चंदन सैनी और राणा प्रताप चंद से मिलने के लिए आए थे। मनीष भी अपने दोनों दोस्तों से मिलने और काम के सिलसिले में पहली बार गोरखपुर गए थे। बता दें, एक इंवेंट के दौरान मनीष की प्रदीप से दोस्त हुई थी। प्रदीप के जरिए ही मनीष की दोस्त हरवीर सिंह उर्फ अरविंद के साथ हुई थी। प्रदीप ने बताया कि चंदन और राणा ने करीब 10 दिन पहले गोरखपुर की तारीफ की थी तो उन्होंने गोरखपुर जाने की योजना बनाई थी। मनीष को वहां काम भी तो मनीष भी जाने के लिए तैयार हो गया।

मनीष के दोस्त ने बताया, क्या हुआ था आखिर घटना वाली रात
मनीष गुप्ता के दोस्त प्रदीप ने मीडिया से बात करते हुए घटना वाली रात की पूरी कहानी बताई। प्रदीप ने बताया कि तीनों दोस्त देवरिया बाईपास स्थित कृष्णा पैलेस होटल के कमरा नंबर 512 में ठहरे हुए थे। प्रदीप ने बताया कि 27 सितंबर की रात खाना खाकर कमरे में सोने के लिए लेट गए थे। रात करीब 12 बजे के आसपास का वक्त था, जब हमारे कमरे का दवाजा पुलिसकर्मियों ने खटखटाया। पुलिस ने कहा कि ये एक रूटीन चेकअप है। तो अरविंद ने कमरे का दरवाजा खोल दिया तो रामगढ़ताल थाने के प्रभारी जेएन सिंह, सब्जी मंडी चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा समेत छह पुलिसकर्मी उनके कमरे में घुए आए और उनसे कागज दिखाने के लिए कहा।

'हम कोई आतंकी नहीं है' कहने पर शुरू की थी पिटाई
पुलिस के कहने पर हमने अपने दस्तावेज दिखा दिए थे। लेकिन मनीष तब तक सो गया था, इसलिए उसके पर्स से आईडी निकालकर पुलिसकर्मियों को दिखा दिया। फिर भी पुलिसकर्मियों ने मनीष को उठाने के लिए कहा। मनीष ने जगाया, तो उन्होंने पुलिस से कहा कि ये समय नहीं है किसी को जगाने का। हमारे दस्तावेज होटल के रिशेप्शन पर जमा हैं और वहां से भी देख सकते थे। हालांकि, पुलिसवालों का व्यवहार देखकर मनीष ने कहा कि वे तीनों कोई आतंकी नहीं हैं। तो पुलिस वालों ने बोला कि तुम सिखाओगे क्या कि हमे कैसे काम करना है। इसके बाद पुलिसवालों ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया। दो पुलिसवाले अरविंद और प्रदीप को लेकर नीचे चले आए। प्रदीप ने बताया कि कुछ देर बाद जब पुलिसवाले लिफ्ट से मीष को नीचे घसीटते हुए लेकर आए तो उनकी नाक और मुंह से खून बह रहा था। मनीष को देखकर साफ पता लगा रहा था कि उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई है।
हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने मनीष को किया मृत घोषित
गंभीर हालत में मनीष को पुलिस एक प्राइवेट हॉस्पिटल में लेकर पहुंचे और फिर बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले गए। जहां डॉक्टरों ने मनीष को मृत घोषित कर दिया। वहीं, घटना के बाद गोरखपुर एसएसपी विपिन टाडा ने बताया था कि अपराधियों की चेकिंग के दौरान रामगढ़ताल थाने की पुलिस एक होटल में गई। वहां पर एक कमरे में तीन युवक संदिग्ध अलग-अलग शहरों से आए थे, जो ठहरे हुए थे। इस सूचना पर पुलिस ने होटल मैनेजर को साथ लेकर कमरे में गई, जहां पर हड़बड़ाहट में एक युवक की कमरे में गिरने से चोट लग गई। दुर्घटनावश हुई इस घटना के बाद पुलिस ने तत्कार होटल मैनेजर को साथ लेकर युवक को अस्पताल में भर्ती करावाया, जहां उसका इलाज हुआ। बीआरडी अस्पताल में इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। एसएसपी ने कहा कि युवक की मौत के बाद तत्कार पुलिस परिजनों को सूचित किया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। बताया कि फिलहाल ये युवक किस काम से यहां आए थे, इसकी जांच की जा रही है। किसके साथ ये यहां रहे थे और कितने दिन रहे थे। इस संबंध में जानकारी जुटा कर कार्रवाई की जाएगी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उठाए कई सवाल
पुलिस की पिटाई से हुई कानपुर के प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की मौत के मामले में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी कई सवाल खड़े कर दिए है। हालांकि, पुलिस एक तरफ मामले की लीपापोती में लगी है, तो वहीं, मनीष गुप्ता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस की झूठी कहानी की पोल खोलकर रख दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, मनीष के सिर, चेहरे और शरीर पर गंभीर चोट के निशान हैं। मनीष के सिर के अगले हिस्से पर तेज प्रहार किया गया, जिससे उनके नाक के पास से खून बह रहा था। रिपोर्ट में पता चला है कि मनीष गुप्ता के दाहिने हाथ की कलाई पर डंडे से गंभीर चोट लगी थी। इसके अलावा दाहिने हाथ की बांह पर डंडे की पिटाई के निशान भी मिले हैं और बाएं आंख की ऊपरी परत पर भी चोट लगी है। मनीष गुप्ता की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट दिखाती है कि किस तरह उनके साथ बर्बरता की गई और यही पिटाई मौत का कारण बनी।

तीन पुलिसकर्मियों समेत छह लोगों पर हुआ केस दर्ज
मनीष गुप्ता मामले में अब पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 के तहत केस दर्ज किया गया है। प्रॉपर्टी डीलर की हत्या के मामले में 3 पुलिसकर्मियों समेत कुल 6 लोगों पर गोरखपुर के थाना रामगढ़ताल में आईपीसी की धारा 302 के तहत केस दर्ज किया गया। इसमें रामगढ़ताल एसओ जेएन सिंह, अक्षय मिश्रा उपनिरीक्षक, उपनिरीक्षक विजय यादव और 3 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। बता दें कि यह केस मीनाक्षी गुप्ता की तहरीर पर दर्ज हुआ है।












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