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Gorakhpur: देखें गोरखपुर के सबसे खूबसूरत जंगल की तस्वीरें जो बनेगा ईको टूरिज्म का केंन्द्र

गोरखपुर के सबसे खूबसूरत जंगल कुसम्ही को जल्द ही ईको टूरिज्म केंद्र के रुप में विकसित किया जाएगा।उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म बोर्ड के बाद ही गोरखपुर वन प्रभाग ने कुसम्ही जंगल को ईको टूरिज्म का केंद्र बनाने के लिए शासन को प्

गोरखपुर,2सितंबर: गोरखपुर के सबसे खूबसूरत जंगल कुसम्ही को जल्द ही ईको टूरिज्म केंद्र के रुप में विकसित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म बोर्ड के बाद ही गोरखपुर वन प्रभाग ने कुसम्ही जंगल को ईको टूरिज्म का केंद्र बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया था। जल्द ही इसे स्वीकृत मिलने की संभावना है।यहां पयर्टकों के मनोरंज के साथ उन्हें एडवेंटर स्पोर्ट्स से भी जोड़ा जाएगा। यहां सुरक्षित परिवेश एवं ट्रेनर की मदद के साथ बर्मा ब्रिज, कॉम्बिंग, रोप-वे क्रॉसिंग समेत कई तरह की एडवेंचर गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। आरोग्य ईको टूरिज्म सेंटर में प्रशिक्षित योग शिक्षक योगा कॉटेज में योगाभ्यास कराएंगे।

मिलेंगी कई सुविधाएं

मिलेंगी कई सुविधाएं

डीएफओ विकास यादव कहते हैं कि कुसम्ही जंगल को ईको टूरिज्म केंद्र बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है।जल्द ही स्वीकृत मिलने की संभावना है।इसके बाद यहां पयर्टकों को नेचर कैम्पिंग, बर्ड वॉचिंग एवं वॉच टॉवर, एडवेंचर एक्टिविटी, आरोग्य ईको टूरिज्म सेंटर, नेचर इंटरपटेशन सेंटर, नेचर ट्रेल एवं हाथी, घोड़ा, ऊंट और खुली जीप से सैर की सुविधा उपलब्ध होंगी।

प्रकृति से जुड़ेंगे पर्यटक

प्रकृति से जुड़ेंगे पर्यटक

ईको टूरिज्म का केंद्र बनने के बाद यहां पर्यटक सीधे प्रकृति से जुड़ेंगे। नेचर कैम्पिंग के अंतर्गत प्लेटफॉर्म एवं टायलेट की सुविधा से युक्त स्विस टेंट पयर्टकों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अंतर्गत ट्री हाउस, सोलर लाइट, किचन और पीने के पानी की सुविधा उपनलब्ध कराई जाएगी। बर्ड वॉचिंग के लिए माता चौरा मंदिर और बुढ़िया माता मंदिर के पास वॉच टॉवर बनाए जाएंगे। बांस के निर्मित टिकट शॉप भी निर्मित किए जाएंगे। जहां से कैमरा, दूरबीन, रेंज फाइंडर और कम्पास की सुविधा भी मिलेगी।

मनोरंजन के साथ रोमांच भी

मनोरंजन के साथ रोमांच भी

यहां पयर्टकों के मनोरंज के साथ उन्हें एडवेंटर स्पोर्ट्स से भी जोड़ा जाएगा। यहां सुरक्षित परिवेश एवं ट्रेनर की मदद के साथ बर्मा ब्रिज, कॉम्बिंग, रोप-वे क्रॉसिंग समेत कई तरह की एडवेंचर गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। आरोग्य ईको टूरिज्म सेंटर में प्रशिक्षित योग शिक्षक योगा कॉटेज में योगाभ्यास कराएंगे।

नेचर इंटरपटेशन सेंटर

नेचर इंटरपटेशन सेंटर

इस केंद्र में नेचर इंटरपटेशन सेंटर का निर्माण होगा जिसमें गोरखपुर के इतिहास, वन आवरण, वन संपदा, ईको टूरिज्म स्पॉट, वन विभाग एवं प्राणी उद्यान की उपलब्धियां, फॉरेस्ट पॉलिसी आदि प्रदर्शित होगी। इसके अतिरिक्त दो रूट पर नेचर ट्रेल की सुविधा भी मिलेगी। जहां साइकिल या पैदल सुरक्षा उपकरणों के साथ पयर्टक तीन किलोमीटर और छह किलोमीटर लंबे रूट पर नेचर ट्रेल कर सकेंगे। इसके अलावा इन रुट पर हाथी, घोड़ा, ऊंट की सवारी कर सैर का आनंद भी उठा सकेंगे। पर्यटकों को खुली जीप में भी इन रुट पर सैर का आनंद उठाने का मौका मिलेगा।

वन्यजीव की भिन्नता

वन्यजीव की भिन्नता

विनोद वन एवं उसके आसपास के जंगल में जैकाल, बैट, भेड़िया, चितल, जंगली सुअर, साही, खरगोश, स्ट्रीप्टड हाइना, लोमड़ी, लैंपर्ड, हनुमान मंकी, रीसस मकॉक, जंगली बिल्ली, जंगली कुत्ते समेत 20 के करीब स्तनधारी वन्यजीव हैं।

वृक्षों की प्रजाति

वृक्षों की प्रजाति

विनोद वन एवं उसके आसपास के क्षेत्र में इमली, कचनार, कटहल, आम, अमरूद, सागौन, साल, अर्जुन, अंजीर, अमलतास, आंवला, कदंब, बरगद, जामुन, मदार, नीम, पलास, पीपल, बबूल, महुआ, शीशम, बेल, चिरौजी, पाकड़, गुलर, गुटेल, बड़हल, पनियाला, चितवन समेत 60 प्रजाति के पेक्ष संरक्षित हैं।

सरीसृप
विनोद वन एवं उसके आसपास गोह, गिरगिट, छिपकली, पायथन, कोबरा, रैन स्नेक, करैत, रसल वाइपर, रैपटाइल बहुतायत में पाए जाते हैं।

पक्षी की प्रजाति
इस हरे भरे वन क्षेत्र में स्टॉक बिल्ड किंगफिशर, कोयल, ग्रीन बी इटर, जंगली उल्लू, जकाना, हुदहुद, तोता, ग्रे हार्नबिल, बटर, सीही, मोर, गिद्ध, कठफोड़वा, बगुला, बसंता, धनेश, सारस, कबूतर, जंगली मुर्गी समेत 47 प्रजाति के पक्षी चिह्नित किए गए हैं।

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