India Russia News: बहन की मौत पर फूट- फूट कर रोया भाई, मौत के लिए इन लोगों को ठहराया जिम्मेदार

गोरखपुर की गार्गी राय का शनिवार को दोहरीघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों का रो- रो कर बुरा हाल है। भाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर कई आरोप लगाए हैं।

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Gorakhpur News: गोरखपुर के गगहा क्षेत्र की रहने वाली एमबीबीएस छात्रा गार्गी राय अब इस दुनिया में नहीं हैं। रुस में उस मेडिकल यूनिवर्सिटी में उनकी मौत हो चुकी है जहां से वह एमबीबीएस कर रही थीं। भाई सहित परिजनों का रो- रो कर बुरा हाल है। छात्रा का शव शुक्रवार रात गोरखपुर पहुंचा, आज दोहरीघाट में गार्गी का अंतिम संस्कार किया गया है।

कौन हैं गार्गी
गार्गी राय गोरखपुर के गगहा क्षेत्र के करवल मझगांवा की रहने वाली हैं। बचपन से ही पढ़ाई में अच्छी गार्गी ने डॉक्टर बन गरीबों की सेवा करने का सपना संजोया था। वर्तमान समय में वह Voronezh state medical university Russia से एमबीबीएस कर रही थी। उसका पांचवा साल था। वह 2018 में रुस गयी थी।

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कैसे हुई मौत
गार्गी के भाई सुयश राय ने बताया कि वह रुस में थी। मई के पहले सप्ताह से उसे फीवर आना शुरु हुआ। पसीना इतना हो रहा था कि पूरा कपड़ा भीग जा रहा था। उसने हम सभी से बात की और पूरी दिक्कत बताई। हम लोगों ने तत्काल उसे डॉक्टर से संपर्क कर इलाज करने को कहा। उसे साथियों ने उसे डॉक्टर से दिखाया । हमने उसे छुट्टी लेकर घर आने को कहा। इसी बीच उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया। जहां उसकी मौत हो गयी।

सही ढंग से नहीं हुआ उपचार
सुयश बताते हैं कि बहन गार्गी को 12 मई, दिन शुक्रवार को आईसीयू में भर्ती किया गया। हालत में कोई सुधार नहीं था। उसके आंत में फ्लूड जमा हो गया था। शक्रवार को एडमिट होने के बाद शनिवार रात उसकी मौत हो गयी। मौत का कारण बना बहन का सही ढ़ग से उपचार न होना । रुस में शनिवार और रविवार को कोई डॉक्टर मरीज को अटेंड नहीं करता। ऐसे में शुक्रवार को एडमिट होने के बाद भी शनिवार को बहन का कोई ट्रीटमेंट नहीं हुआ। जिससे उसकी रात में मौत हो गयी।

डीन ने नहीं दी छुट्टी
सुयश बताते हैं कि मेडिकल यूनिवर्सिटी की डीन ने आज बहन को छुट्टी दे दी होती तो वह जिंदा होती। पिछले साल जुलाई में बहन घर आई थी। तब उसकी तबियत थोड़ी ठीक नहीं थी। डॉक्टर को यहां दिखाया गया तो उन्होंने कुछ दिन इलाज कराने की बात कही। तब भी गार्गी ने डीन से छुट्टी के लिए कहा तब डीन ने कहा हमेशा के लिए लीव ले लो और इलाज कराओं। इसके बाद वह चली गयी। इधर उसकी तबियत फिर जब खराब हुई तो उसने डीन से छुट़टी के लिए कहा। इस बार भी वह तैयार नहीं हुई। डीन की जिद मेरी बहन की मौत का कारण बनी।

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