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Gorakhpur News: महायोगी गोरखनाथ विवि में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन, इन बिन्दुओं पर हुआ मंथन

Gorakhpur News: महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एवं महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के प्रति कुलाधिपति प्रो. उदय प्रताप सिंह (प्रो. यूपी सिंह) ने कहा है कि प्राकृतिक संसाधनों से चिकित्सा की भारतीय पद्धति सदैव प्रासंगिक बनी रहेगी। कोरोना काल मे जब पूरी दुनिया त्रस्त थी, तब प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद ने मानव जीवन को बचाया।

प्रो. यूपी सिंह रविवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय व फार्मेसी संकाय के संयुक्त तत्वावधान एवं ट्रांसलेशन बायोमेडिकल रिसर्च सोसायटी के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समारोप (समाप सत्र की अध्यक्षता कर रहे थे। एडवांसेज एंड ऑपर्चुनिटीज इन ड्रग डिस्कवरी फ्रॉम नेचुरल प्रोडक्ट्स 'बायोनेचर कॉन-2023' विषयक संगोष्ठी के समारोप अवसर पर उन्होंने कहा कि निरोग बने रहने को दुनिया एक बार फिर प्राकृतिक संसाधनों से बन रही औषधियों को अपनाने पर जोर दे रही है। ऐसे में जरूरत है कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को समयानुकूल जरूरतों के अनुसार अनुसंधान पूर्वक आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे ही प्रयासों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी वास्तव में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान समान है।

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प्रो यूपी सिंह ने कहा कि विजन, एक्शन और मिशन के एकसाथ मिलने पर ही क्रिएशन होता है। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय इसके कुलाधिपति, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन, यहां की फैकल्टी व अन्य कार्मिकों के एक्शन और समाज को अनुसंधानपरक ज्ञान उपलब्ध कराने के मिशन का मूर्त रूप है। दो साल के भीतर की इस विश्वविद्यालय की उपलब्धियां बेहद शानदार हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए ज्ञान, कौशल, दृष्टि, पहचान और संतुलन को शिक्षा के पांच महत्वपूर्ण उद्देश्य के रूप में समझाया।

राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह के मुख्य अतिथि महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह ने कहा कि आयुर्वेद समेत प्राकृतिक संसाधनों से चिकित्सा की उपादेयता को विस्तार देने के लिए महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के सतत प्रयास सराहनीय हैं। राष्ट्रीय संगोष्ठी विश्वविद्यालय के इन प्रयासों को नया आयाम देगी। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी के निष्कर्ष आने वाले समय में प्राकृतिक संसाधनों से चिकित्सा को नई दृष्टि देकर आगे बढ़ाएंगे।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसधानो में असीम संभावनाएं हैं जो हम सभी को स्वस्थ और ठीक करने में सक्षम हैं। हमे इस दिशा में अपने योगदान को प्रमाणित करने कि जरूरत है। प्रो. सिंह ने कहा कि हमारे आसपास की समस्त वनस्पतियां औषधी गुणों से युक्त हैं। हमे उनके बारे में जानने का प्रयास करना चाहिए। प्रो. सिंह ने कहा कि इस विश्वविद्यालय में आयुर्वेद के साथ ही नर्सिंग, पैरामेडिकल, फार्मेसी, बायोमेडिकल जैसी सभी विधाएं और सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को नसीहत दी कि वे अपने विषय के अलावा मिलते जुलते विषयों में भी अभिरुचि बढ़ाएं।

इस अवसर पर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल डॉ. अतुल वाजपेयी ने कहा कि तीन दिन तक विशद मंथन से यह संगोष्ठी प्राकृतिक संसाधनों के ज्ञान और अनुसंधान का संगम बन गई। उन्होंने प्रतिभागियों और विद्यार्थियों से यहां वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के द्वारा बताए गए अनुभव को अपने व्यावहारिक अध्ययन का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया।

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