भारत- नेपाल के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी, पर्यटन के साथ आर्थिक विकास को लगेंगे पंख

गोरखपुर- सोनौली फोरलेन के निर्माण के बाद भारत- नेपाल संंबंधों में जहां मजबूती आएगी। वहीं उद्योग व पर्यटन को गति मिेलेगी।

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Gorakhpur News: भारत- नेपाल के बीच विकास को जल्द ही नयी रफ्तार मिलने वाली है। केंद्रीय सड़क एंव परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सोमवार को गोरखपुर दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने दस हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया है। इसमें गोरखपुर से सोनौली तक लगभग 80 किलोमीटर फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही महराजगंज के ठूठीबारी- निचलौल मार्ग को भी फोरलेन किया जाएगा। गोरखपुर- सोनौली व ठूठीबारी- निचलौल मार्ग के फोरलेन होने से भारत- नेपाल सीमा पर विकास को तेज गति मिलेगी। इसके साथ ही पयर्टन का तेजी से विकास होगा। भारत- नेपाल के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

यह है परियोजना
गोरखपुर के जंगल कौड़िया से सोनौली तक 79.54 किलोमीटर लम्बाई का फोरलेन का निर्माण कार्य जल्द हो शुरु हो जाएगा। सोमवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व सीएम योगी के शिलान्यास के बाद इस कार्य में तेजी आएगी। इसके निर्माण के बाद गोरखपुर से नेपाल सीमा तक पहुंचने में सिर्फ सवा घंटे का समय लगेगा। जंगल कौड़िया से सोनौली तक फोरलेन के लिए करीब 2700 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत इस धनराशि में सड़क निर्माण सहित भूमि अधिग्रहण का भी खर्च शामिल है।

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महत्वपूर्ण है यह मार्ग
गोरखपुर से सोनौली मार्ग बहुत महत्वपूर्ण है। एक तो यह मार्ग दो देशों को जोड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर गोरखपुर के खाद कारखाने से होने वाले निर्यात के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह मार्ग प्रदेश के अन्य जिलों से भी गोरखपुर को कनेक्ट करता है। इसलिए इस मार्ग पर ट्रैफिक अच्छी रहती है। इसके साथ ही यह बौद्ध स्थलों को जोड़ता है। इस मार्ग से बौद्ध स्थलों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

19 स्थानों पर अंडरपास
इस फोरलेन निर्माण के लिए 150 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। महराजगंज के फरेंदा व नौतनवां में अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। इस फोरलेन पर 19 स्थानों पर अंडरपास, कैम्पियरगंज में फ्लाईओवर, महराजगंज के मोहनापुर ढ़ाला पर ओवरब्रिज का निर्माण किया जाएगा।

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सीमावर्ती जिलों से बढ़ेगा व्यापार
इस फोरलेन के निर्माण के बाद उत्तर प्रदेश के सात सीमावर्ती जिलों पीलीभीत, श्रावस्ती, महाराजगंज, लखीमपुर, बहराइच, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर में व्यापार बढ़ेगा। इसके साथ ही इन जिलों में यातायात सुलभ होगा।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
पर्यटन के लिहाज से भारी संख्या में लोग नेपाल जाते हैं और नेपाल से यहां आते हैं। ऐसे में यह मार्ग पर्यटकों को सुविधा उपलब्ध कराएगा। कम समय में अधिक से अधिक जगहों को घूमा जा सकेगा। नेपाल से सटे महराजगंज के देवदह में गौतमबुद्ध का ननिहाल है। जहां पर वर्तमान समय में खुदाई का काम चल रहा है। इसके साथ ही सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, श्रावस्ती में भी गौतम बुद्ध से संबंधित स्थान हैं जहां प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में विदेशी पर्यटक भी आते हैं। ऐसे में इस मार्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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    कुल मिलाकर यह मार्ग भारत- नेपाल संबंधों को एक नई दिशा व गति प्रदान करेगा। जो विकास का नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।

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