UP: गोरखनाथ मंदिर में देव मंदिरों में विग्रहों की होगी प्राण प्रतिष्ठा, कथा का होगा आयोजन
गोरखनाथ मंदिर में देव मंदिरों में विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर कथा का आयोजन किया जाएगा।

Gorakhpur News: गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में देव मंदिरों में विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होगा। इसके उपलक्ष्य में मंदिर में 8 मई से 21 मई, 2023 तक दो चरणों में कथाओं का आयोजन होगा।
जानकारी के मुताबिक, गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर प्राचीन काल से ही धर्म, संस्कृति, अध्यात्म का केंद्र रहा है। मई माह की गर्मी में गोरखपुरवासियों को आध्यात्मिक फुहार का विशेष आनंद भी मिलेगा। गोरखनाथ मंदिर परिसर में बने नव देव-मंदिरों में विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में 8 मई से 21 मई, 2023 तक दो चरणों में अलग अलग कथाएं होने जा रही हैं। 8 मई से शिव महापुराण की कथा होगी तो 15 मई से श्रीमद्भागवत कथा।
21 मई, 2023 को कथा एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णता के साथ मुख्यमंत्री एवं पूज्य गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जी सभी देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे।
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गोरक्षपीठ में नव देव विग्रहों वाला नवीन मंदिर बनकर तैयार हो चुका है। प्राण प्रतिष्ठा के संदर्भ में धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ आठ मई से होगा। दो सप्ताह के दौरान लक्ष्मीनारायण महायज्ञ, शिव महापुराण कथा व श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन होगा। कथारस के अभिसिंचन के लिए सुपरिचित कथावाचक बालकदास जी महाराज और डॉ. श्याम सुंदर पराशर जी मंदिर परिसर पधारेंगे। पहले चरण में शिव महापुराण की कथा वाचन 8 से 14 मई तक बालकदास जी करेंगे । जबकि दूसरे चरण में 15 से 21 मई तक विद्वतप्रवर श्रीधाम वृंदावन,मथुरा के डॉ श्याम सुंदर पराशर श्रीमद्भागवत कथा सुनाएंगे। शिव महापुराण की कथा का श्रवण अपराह्न 3.00 बजे से 6.00 बजे तक तथा श्रीमद्भागवत कथामृत का पान अपराह्न 3.00 बजे से 6.00 बजे तक किया जा सकेगा। अलग अलग तिथियों में कथाएं गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में होंगी।
गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने बताया कि देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा के आनुष्ठानिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में 15 मई से 21 मई तक श्री श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का आयोजन गोरखनाथ मंदिर की यज्ञशाला में होगा। इसमें प्रतिदिन अलग अलग धार्मिक अनुष्ठान होंगे। यज्ञाचार्य की भूमिका का निर्वहन मंदिर के मुख्य पुरोहित पंडित रामानुज त्रिपाठी वैदिक जी करेंगे।
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