DDU University News: किसान मान लें प्रोफेसर की ये बातें, होंगे ये फायदे
DDU University News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तूलिका मिश्रा ने शिलांग के नॉर्थ इंडियन हिल यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में प्रतिभाग किया। यह कॉन्फ्रेंस इंडियन बॉटेनिकल सोसाइटी (आईबीएस) की ओर से आयोजित थी।
डॉ. तूलिका मिश्रा ने एक विशेष सत्र की अध्यक्षता भी की। उन्होंने (बम्बू एंड फाइटोरेमेडिएशन) बांस के माध्यम से प्रदूषण और क्षरण के समाधान पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि बांस की विभिन्न प्रजातियों द्वारा मृदा प्रदूषण को कम किया जा सकता है। यह कार्बन अवशोषण में भी मदद कर सकता है। भारी धातु मरकरी, लेड कॉपर जैसे भारी धातु मिट्टी में मिल जाने पर खतरनाक होते हैं। सब्जियों, चावल, गेहूं की जड़ों से वे पहुंचते हैं। यह हमारे लिए हानिकारक होते हैं। बांस की विभिन्न प्रजातियों का प्रयोग करके उन धातुओं को मिट्टी से निकालकर मिट्टी को साफ किया जा सकता है।

डॉक्टर तूलिका मिश्रा ने कहा कि आज कृषि कार्यों में तेजी आई है। उत्पादन भी बढ़ा है। लेकिन किसान ज्यादा उत्पादन के चक्कर में दवाओं का प्रयोग कर रहा है जो शरीर के लिए नुकसानदायक है। दवाएं फसलों के जड़ों में पहुंचती हैं और अनाज में पूरी तरह मिल जाती हैं। जिसका सेवन करने पर यह इंसानों के शरीर में सीधे प्रवेश करता है। दवाओं के प्रयोग से किसानों को बचाना होगा। देशी खाद का ज्यादा प्रयोग करना होगा।
इस कॉन्फ्रेंस में डीडीयू के पूर्व कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी, पद्मश्री प्रो. प्रमोद टंडन और प्रो. एसके बरीक जैसे भारत के वैज्ञानिकों ने भी इसमें प्रतिभाग किया। जापान, चीन, ऑस्ट्रेलिया और इस्राइल आदि देशों से भी वैज्ञानिक पहुंचे थे।












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