Chauri Chaura Kand: आजादी के अमृत महोत्सव से चमक उठा गौरवशाली अतीत
गोरखपुर का चौरी-चौरा कांड जिसने आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी,आज उसकी वर्षगांठ है। आजादी के अमृत महोत्सव में इस शहीद स्मारक स्थल की सूरत पूरी तरह बदल चुकी है।

Gorakhpur News: आज 'चौरी चौरा घटना' वर्षगांठ है। चौरी-चौरा शहीद स्मारक गोरखपुर में स्थित है। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत उन सभी शहीद स्थलों व स्मारकों का नया रुप दिया गया है जो देश की आजादी के प्रतीक हैं। जिन जगहों पर वीर सपूतों ने देश को आजाद करने के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया। इन्ही जगहों में शामिल है चौरी-चौरा। जिसे इतिहास में कांड के रुप में दर्शाया गया। वर्तमान समय में इसे कांड नहीं बल्कि संग्राम के रुप में दर्शाया गया है। चौरी-चौरा शताब्दी वर्ष समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने वर्चुअली प्रतिभाग किया था। अगर पिछले कुछ सालों की बात करें तो आज चौरी-चौरा शहीद स्मारक का अलग रुप दिखाई देता है।
पर्यटकों को कर रहा आकर्षित
शताब्दी वर्ष समारोह वर्ष 2021 में मनाया गया था। इस कार्यक्रम में पीएम ने वर्चुअली प्रतिभाग किया था। केन्द्र व प्रदेश सरकार की मंशा पर इस जगह को लेकर कई योजनाएं बनाई गयी। चौरी चौरा शहीद स्मारक स्थल का कायाकल्प कर इसे पर्यटन स्थल के रुप में विकसित किया जा चुका है। जहां पर्यटकों को भारी संख्या देखने को मिलती है।
बन चुकी है फिल्म
इस घटना की वास्तविक जानकारी लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से चौरी-चौरा संग्राम पर फिल्म भी बन चुकी है। इस पर आधारित फिल्म 1922 प्रतिकार चौरी चौरा' बन चुकी है। जिसमें मुख्य भूमिका में गोरखपुर के सांसद रवि किशन रहे हैं। इस फिल्म में इस घटना को कांड नहीं बल्कि संग्राम के रुप में दर्शाया गया है।
क्या है चौरी-चौरा कांड
गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ अगस्त 1920 में असहयोग आंदोलन शुरु किया था। इसी आंदोलन के समर्थन में 4 फरवरी को चौरी-चौरा में किसानों द्वारा शांति जुलूस निकाला गया था। इसमें भारी संख्या में लोग शामिल थे। ब्रिटिश पुलिस ने इन्हें रोकने के लाठी चार्ज कर दिया। जब इसका कोई असर नहीं हुआ तो पुलिस ने फायरिंग शुरु कर दी। जिसमें कई किसानों की मौत हो गयी। इसी के विरोध में आंदोलनकारियों ने पुलिस स्टेशन पर हमला कर उसे जला दिया। जिसमें 23 पुलिसकर्मी मारे गये थे।
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