नवरात्रि 2022: बुढ़िया माई मंदिर,जब जोकर को पुल न पार करने की मां ने दी थी सलाह
उत्तर प्रदेश सहित देशभर में नवरात्रि की धूम शुरू हो गयी है। गोरखपुर जिले में भी दुर्गा पूजा की रौनक एकबार फिर से दिख रही है। लोग मां दुर्गा की अराधना में लीन हो गये हैं और सभी सड़क चौराहों पर देवी भगवती की गीत से वातावर
गोरखपुर,27सितंबर: उत्तर प्रदेश सहित देशभर में नवरात्रि की धूम शुरू हो गयी है। गोरखपुर जिले में भी दुर्गा पूजा की रौनक एकबार फिर से दिख रही है। लोग मां दुर्गा की अराधना में लीन हो गये हैं और सभी सड़क चौराहों पर देवी भगवती की गीत से वातावरण भक्तिमय हो चुका है। भव्य पंडाल जगह-जगह पर दिखने लगे हैं।गोरखपुर जिला मुख्यालय से 12 किमी पूर्व में कुस्मही जंगल के बीच स्थित बुढ़िया माता का मंदिर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी है।मां दुर्गा का यह प्रसिद्ध मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं।इस मंदिर की विशेष महिमा है।यहां भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।आइए जानते हैं क्या है मंदिर का इतिहास एंव महत्व।

जब पूरी बारात नाले में समा गयी थी
मान्यताओं के अनुसार यहां बहुत घना जंगल था जिसमें एक नाला बहता था। नाले पर लकड़ी का पुल था। एक दिन वहां एक बारात आकर नाले के पूरब तरफ रुकी। वहां सफेद वस्त्रों में एक बूढ़ी महिला बैठी थी, उसने नाच मंडली से नाच दिखाने को कहा। नाच मंडली बूढ़ी महिला का मजाक उड़ाते हुए चली गई। लेकिन जोकर ने बांसुरी बजाकर पांच बार घूमकर महिला को नाच दिखा दिया। उस बूढ़ी महिला ने प्रसन्न होकर जोकर को आगाह किया कि वापसी में तुम सबके साथ पुल पार मत करना। तीसरे दिन बारात लौटी तो वही बूढ़ी महिला पुल के पश्चिम तरफ मौजूद थी। बारात जब बीच पुल पर आई तो पुल टूट गया और पूरी बारात नाले में डूब गई। पूरी बारात में सिर्फ वह जोकर बचा जो बारात के साथ नहीं था। इसके बाद बूढ़ी महिला अदृश्य हो गई। काल की गाल में जाने से बचे जोकर ने इस बात का खुलासा किया। तभी से नाले के दोनों तरफ का स्थान बुढि़या माई के नाम से जाना जाता है। बुढि़या माई का मंदिर नाले के दोनों तरफ बना है। इन दोनों मंदिरों के बीच के नाले को नाव से पार किया जाता है।

सभी मुरादें करती हैं पूरी
यह मंदिर भक्तों की आस्था का प्रसिद्ध केंद्र हैं। ऐसी मान्यता है कि मां यहां आने वाले सभी भक्तों की मुरादें पूरी करती हैं।यहां वर्ष भर भक्तों का आना लगा रहता है। देश के कई हिस्से से यहां भक्त आते हैं।

नेपाल व बिहार से भी आते हैं श्रद्धालु
कुसम्ही जंगल में स्थित इस मंदिर पर भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है । प्राकृतिक परिवेश में स्थित मां के दरबार में सबकी मन्नतें पूरी होती हैं। माता का बूढ़ा रूप निराला है। नवरात्र में नेपाल व बिहार से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां आते हैं।

नवरात्र में लगता है मेला
माता के महिमा की ख्याति दूर दूर तक फैली है। वासंतिक एवं शारदीय नवरात्र में लाखों की संख्या में भक्त माता के दर्शन को पहुंचते हैं। माता केे दर्शन को भक्तों की कई किमी लंबी कतार लग जाती है। पूरे नवरात्र मंदिर क्षेत्र में मेला लगा रहता है। इसके साथ मंडन, विवाह सहित कई आयोजन मंदिर के समीप होते हैं।

सीएम योगी का है विशेष लगाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी इस मंदिर से खासा लगाव है।वह यहां अक्सर पूजा-अर्चना करते हैं।सोमवार को अपने गोरखपुर दौरे के दौरान सीएम ने मां की विधिवत पूजा अर्चना की।योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही यहां कई कार्य हुए हैं।आज यह क्षेत्र पर्यटन स्थल के रुप में विकसित है।आगामी समय में यहां टूर ट्रेन चलाने की तैयारी है।












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