'खून' की दलाली करने वाले रैकेट का पर्दाफाश, एक यूनिट की कीमत 10-12 हजार, नेगेटिव ग्रुप काफी महंगा
उत्तर प्रदेश की गोरखपुर पुलिस ने खून की दलाली करने वाले दो शातिरों को गिरफ्तार कर इस गोरख-धंदे का सनसनीखेज खुलासा किया है। दरअसल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाहर लोगों का खून बेचने का ये धंधा खूब जोर-जोर से चल रहा था। यह दलाल मजदूरों को प्रति यूनिट ब्लड के 10-12 हजार रुपए देने का लालच देकर उनका आए दिन खून निकलवा रहे थे। फिलहाल पुलिस ने दो आरोपियों को अरेस्ट, बाकी रैकेट का पता लगाया जा रहा है।
कैसे ऑपरेट हो रहा 'खून' का धंदा
सबसे पहले तो आपको बताते हैं कि आखिर ये धंदा चलता कैसे है? दरअसल, इस धंदे की सबसे पहली कड़ी होती है अस्पतालों में काम करने वाला स्टाफ। जिन्हे यह बखूबी पता होता है कि किस मरीज को कितनी और कब खून की जरूरत पड़ने वाली है। जिसकी जानकारी यह दलालों से साझा करते हैं। उसके बाद दलाल किसी शिकारी की तरह मजबूर तीमारदार के पीछे लग जाते हैं और उन्हें सस्ते दामों में खून मुहैय्या कराने का वादा करते हैं।

"आम के आम, गुठलियों के दाम"
उधर, यही दलाल किसी परिचित मजबूर व्यक्ति या फिर दिहाड़ी मजदूर से संपर्क कर उन्हें मात्र एक यूनिट ब्लड के बदले 10-12 हजार रुपए देने का वादा करते हैं। साथ ही उन्हें ब्लड डोनेट करने के फायदे भी गिनाते हैं, मतलब "आम के आम, गुठलियों के दाम।" इसके बाद तैयार हो जाने पर यह उन्हें लेकर ब्लड बैंक जाते हैं।

डोनर को दी जाती है ट्रेनिंग
आपको बता दें कि इस प्रक्रिया में अगर निजी ब्लड बैंक शामिल है तो ये दलाल वहां के कर्मचारियों को भी पैसा ऑफर कर सेट कर लेते हैं, ताकि ज्यादा पूछताछ न हो। वहीं सरकारी ब्लड बैंक में भेजने से पहले डोनर को पूरी ट्रेनिंग दी जाती है, जैसे कि क्या सवाल पुछा जाएगा और आपको क्या कहना है।
सबको मिलता है हिस्सा, डोनर को ठेंगा
अब दलाल के पास डोनर भी है और मजबूर कस्टमर भी है। इसके बाद तय योजना के अनुसार ब्लड बैंक में ब्लड निकलवाया जाता है और कस्टमर को दे दिया जाता है। वहीं पैसों के बटवारे में अस्पताल के कर्मचारी का हिस्सा, ब्लड बैंक के कर्मचारी का हिस्सा और डोनर का हिस्सा निकालने के बाद यह दलाल एक यूनिट ब्लड में 5-6 हजार कमा लेता है। साथ ही डोनर को मात्र एक हजार या 1200 रुपए देकर टरका दिया जाता है।
नेगेटिव ग्रुप की कीमत ज्यादा, कई गवां चुके हैं जान
आपको जानकर हैरानी होगी कि अगर पेशेंट का ब्लड नेगेटिव ग्रुप का है तो यह दलाल उसे दुर्लभ बताकर मरीज से 25-30 हजार तक ऐंठ लेते हैं। इस धंदे में दलालों का सबसे बड़ा शिकार होते हैं नशेड़ी युवा, जो पैसों के लिए महीने में 2-3 बार तक ब्लड डोनेट कर देते हैं। इस वजह से कई युवा अपनी जान भी गवां चुके हैं। यह दलाल बारिश के बाद फैली डेंगू या अन्य बीमारी को अपना सीजन मानते हैं।

दो दलालों को दबोचा, अन्य की तलाश जारी
इसी धंदे में लिप्त एक रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। गोरखपुर के पुलिस लाइन सभागार में एसपी नार्थ मनोज कुमार अवस्थी ने सोमवार को इस घटना का खुलासा किया है। महराजगंज के पनियरा के रहने वाले गोरख चौहान की शिकायत पर गोरखपुर की तिवारीपुर थाना क्षेत्र के जाफरा बाजार बिंद टोला के रहने वाले वसील खान और महाराजगंज जिले के फरेंदा थाना क्षेत्र के कम्हरिया खुर्द के रहने वाले केशर देव को अरेस्ट किया गया है।
एसपी नॉर्थ मनोज कुमार अवस्थी ने बताया कि महाराजगंज जिले के पनियरा निवासी गोरख चौहान को झांसे में लेकर दलालों ने उसका एक यूनिट ब्लड निकलवाया और उन्हें भगा दिया। जब गोरख चौहान की घर जाने के बाद तबीयत खराब हुई, तो उन्होंने गुलरिहा थाने पहुंच कर पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई।

दलालों के झांसे में न फंसे, पुलिस करेगी मदद
जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। वहीं पुलिस ने आम जन से अपील करते हुए कहा कि पुलिस विभाग द्वारा एक टीम बनाई गई है। इस टीम में कई आरक्षी हैं, जो जरूरत पड़ने पर लोगों को खुद जाकर ब्लड डोनेट करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी दलाल और ब्लड बैंक के बाहर घूम रहे लोगों के झांसे में आने की जरूरत नहीं है। जरूरत पड़ने पर संबंधित थाने या चौकी पर संपर्क कर ब्लड की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।












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